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ईरान-इजरायल तनाव का भारत पर असर: गुजरात से दिल्ली तक पेट्रोल पंपों पर बढ़ी चिंता, लोगों में फुल टैंक कराने की होड़!

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ईरान-इजरायल तनाव के बीच भारत में बढ़ी ईंधन संकट की आशंका

AIN NEWS 1: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। ईरान और इजरायल के बीच जारी टकराव, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती चिंताओं और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हलचल ने देशभर में लोगों की बेचैनी बढ़ा दी है। गुजरात, दिल्ली और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में पेट्रोल पंपों पर अचानक भीड़ बढ़ गई है। कई जगहों पर लोगों ने अपने वाहन फुल टैंक कराने शुरू कर दिए हैं, जबकि कुछ जिलों में पेट्रोल पंपों पर ‘No Stock’ के बोर्ड भी नजर आने लगे हैं।

स्थिति ऐसी बनती दिख रही है कि आम लोग अब आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल महंगे होने की आशंका से पहले ही तैयारी में जुट गए हैं।

गुजरात के महीसागर जिले में 62 पेट्रोल पंपों पर ‘No Stock’

गुजरात के महीसागर जिले से सबसे चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। यहां जिले के 62 पेट्रोल पंपों पर ‘No Stock’ के बोर्ड लगाए गए हैं। ईंधन की सप्लाई प्रभावित होने से आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति सामान्य नहीं रही। कई पंपों पर लंबी लाइनें लगी रहीं और कुछ ही घंटों में स्टॉक खत्म हो गया। इसका सबसे ज्यादा असर किसानों और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों पर पड़ा है, जहां खेती और परिवहन पूरी तरह डीजल पर निर्भर है।

कई किसानों ने चिंता जताई कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो खेती-किसानी के काम प्रभावित हो सकते हैं। ट्रैक्टर, सिंचाई पंप और माल ढुलाई के लिए डीजल की उपलब्धता बेहद जरूरी है।

लोगों में बढ़ा डर, फुल टैंक कराने की होड़

ईंधन संकट की खबरें सामने आने के बाद कई राज्यों में लोगों ने एहतियात के तौर पर अपने वाहन फुल टैंक कराने शुरू कर दिए। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में देर रात तक पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ देखने को मिली।

दो पहिया और चार पहिया वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। लोगों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय हालात और बिगड़े तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें अचानक बढ़ सकती हैं। इसी डर के चलते लोगों ने जरूरत से ज्यादा ईंधन भरवाना शुरू कर दिया।

पेट्रोल पंप संचालकों के मुताबिक सामान्य दिनों की तुलना में बिक्री अचानक कई गुना बढ़ गई। कुछ जगहों पर स्थिति पैनिक बाइंग जैसी बन गई, जहां लोग रोजमर्रा की जरूरत से ज्यादा ईंधन खरीदते नजर आए।

होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना अहम?

दुनिया के तेल कारोबार का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। यह समुद्री मार्ग खाड़ी देशों को दुनिया के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। भारत समेत कई देश अपने तेल आयात के लिए इसी रास्ते पर निर्भर हैं।

यदि इस मार्ग पर किसी तरह की रुकावट आती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। यही वजह है कि ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव तथा होर्मुज को लेकर आने वाले बयानों पर पूरी दुनिया नजर बनाए हुए है।

हालांकि ईरान की ओर से हाल ही में बयान दिया गया कि कमर्शियल जहाजों के लिए होर्मुज खुला रहेगा, लेकिन इसके साथ कुछ शर्तों की बात भी कही गई है। इससे वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।

ट्रंप और जिनपिंग की बातचीत से बढ़ी चर्चा

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर लगातार कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई बातचीत में भी होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा चर्चा में रहा।

सूत्रों के मुताबिक दोनों नेताओं ने वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सप्लाई को प्रभावित होने से बचाने पर जोर दिया। इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के भारत दौरे ने भी राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य पूर्व में हालात और बिगड़ते हैं तो इसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था, ईंधन कीमतों और महंगाई पर पड़ सकता है।

केंद्र सरकार की बढ़ी चिंता

हाल ही में केंद्र सरकार ने सोने-चांदी समेत कई धातुओं पर इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाई है। इसी बीच मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा भी किया जा रहा है कि आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।

हालांकि सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन वैश्विक हालात को देखते हुए ऊर्जा बाजार पर लगातार नजर रखी जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में यदि कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी आती है, तो घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ना तय है।

दिल्ली में ‘वर्क फ्रॉम होम’ की पहल

दिल्ली में बढ़ते ट्रैफिक और संभावित ईंधन दबाव को देखते हुए प्रशासन ने भी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सप्ताह में दो दिन ‘वर्क फ्रॉम होम’ लागू करने का फैसला लिया है।

सरकार का मानना है कि इससे ट्रैफिक कम होगा, ईंधन की खपत घटेगी और लोगों को राहत मिलेगी। विशेषज्ञ इसे एक एहतियाती कदम मान रहे हैं, ताकि भविष्य में यदि ईंधन संकट गहराता है तो उसका असर कम किया जा सके।

BRICS बैठक में जयशंकर ने उठाया ऊर्जा संकट का मुद्दा

BRICS बैठक में विदेश मंत्री S. Jaishankar ने वैश्विक संघर्षों, ऊर्जा संकट और व्यापारिक बाधाओं को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में देशों के बीच व्यावहारिक सहयोग और मजबूत कूटनीति बेहद जरूरी है।

जयशंकर ने साफ कहा कि वैश्विक अस्थिरता का असर सीधे आम लोगों की जिंदगी पर पड़ता है, इसलिए सभी देशों को मिलकर समाधान निकालना होगा।

मॉनसून की राहत भरी खबर

जहां एक ओर ईंधन संकट और महंगाई की आशंकाओं ने लोगों की चिंता बढ़ाई है, वहीं दूसरी ओर मौसम विभाग ने राहत भरी खबर दी है। IMD के अनुसार 16 मई के आसपास दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अंडमान-निकोबार क्षेत्र में दस्तक दे सकता है।

यदि मॉनसून सामान्य रहता है तो इससे कृषि क्षेत्र को राहत मिलेगी और खाद्य महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

आगे क्या?

फिलहाल भारत में ईंधन की सप्लाई पूरी तरह बंद होने जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण बाजार में अस्थिरता जरूर बढ़ी है। सरकार हालात पर नजर बनाए हुए है और तेल कंपनियां सप्लाई सामान्य रखने की कोशिश कर रही हैं।

हालांकि विशेषज्ञ लोगों से अपील कर रहे हैं कि अफवाहों से बचें और घबराहट में जरूरत से ज्यादा ईंधन खरीदने से परहेज करें। क्योंकि पैनिक बाइंग से स्थिति और बिगड़ सकती है।

आने वाले दिनों में मध्य पूर्व के हालात, होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार की दिशा तय करेगी कि भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर कितना असर पड़ेगा।

The rising Iran-Israel conflict and growing tensions around the Strait of Hormuz are beginning to impact fuel sentiment in India. Several petrol pumps in Gujarat reported “No Stock” situations, while panic buying was witnessed in cities like Raipur due to fears of petrol and diesel price hikes. The Indian government is closely monitoring global crude oil markets, as any disruption in the Strait of Hormuz could affect fuel supply chains worldwide. Meanwhile, discussions at the BRICS meeting and diplomatic talks involving Iran, China, and the United States have intensified amid concerns over energy security and global trade routes.

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