AIN NEWS 1 | संसद के मानसून सत्र का आखिरी सप्ताह भी हंगामे की भेंट चढ़ता दिखाई दे रहा है। सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध लगातार बढ़ रहा है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर सदन की कार्यवाही बाधित करने और महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बचने का आरोप लगा रहे हैं।
विपक्ष दिल्ली में Gen-Z आंदोलन के दौरान हुए लाठीचार्ज के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांग रहा है। इसके साथ ही विपक्ष राम मंदिर चंदा मामले पर भी संसद में चर्चा की मांग कर रहा है।
वहीं, सरकार ने सोमवार को कहा था कि अमित शाह जवाब देने के लिए तैयार हैं, लेकिन विपक्ष को पहले बिना हंगामे के चर्चा शुरू होने देनी होगी। विपक्ष का कहना है कि सरकार चर्चा नहीं चाहती और दोनों मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। विपक्ष ने साफ किया है कि इन मांगों पर कोई समझौता नहीं होगा।
लोकसभा शुरू होते ही हंगामा
मंगलवार को लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने हंगामा शुरू कर दिया। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्षी सांसदों को नसीहत देते हुए कहा कि देश सदन की कार्यवाही देख रहा है।
हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई।
इससे पहले NDA सांसदों ने संसद तक मार्च निकाला। उनके हाथों में राहुल गांधी के खिलाफ नारे लिखे पोस्टर थे। सांसदों ने “राहुल गांधी जवाब दो” और “राहुल गांधी शर्म करो” जैसे नारे लगाए।
संसद परिसर में आमने-सामने आए सत्ता पक्ष और विपक्ष
संसद परिसर में विपक्षी सांसदों ने भी प्रदर्शन किया। इस दौरान “अमित शाह जवाब दो” और “चंदा किसने लूटा है” जैसे नारे लगाए गए।
कुछ देर बाद NDA और विपक्ष के सांसद आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों के सांसदों ने एक-दूसरे के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने पहली बार सरकार के सांसदों को प्रदर्शन करते हुए देखा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने सरकार के सांसदों को प्रदर्शन करने के लिए मजबूर तो कर दिया है, अब उन्हें सदन में आकर जवाब देना चाहिए।
अखिलेश यादव ने शिक्षा और राम मंदिर के मुद्दे को जोड़ा
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने शिक्षा, परीक्षा और राम मंदिर से जुड़े मुद्दों को एक-दूसरे से जुड़ा बताया। उन्होंने कहा कि इन दोनों मुद्दों पर संसद में बहस होनी चाहिए।
अखिलेश यादव ने यह भी दावा किया कि दिल्ली में आंदोलन के दौरान आए छात्रों और युवाओं के नेटवर्क से उनका डेटा इकट्ठा किए जाने की बात सुनने में आ रही है। उन्होंने कहा कि भविष्य में सरकार इस डेटा का क्या इस्तेमाल करेगी, यह पता नहीं।
झारखंड लाठीचार्ज ने BJP को दिया नया मुद्दा
संसद में जारी गतिरोध के बीच झारखंड में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज ने BJP को विपक्ष पर हमला करने का नया मुद्दा दे दिया है।
दरअसल, विपक्ष दिल्ली में हुए लाठीचार्ज को लेकर अमित शाह से जवाब मांग रहा है। अब BJP झारखंड में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं को घेर रही है।
BJP के वरिष्ठ नेता तरुण चुघ ने राहुल गांधी पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। वहीं, सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि अमित शाह जवाब देंगे, लेकिन राहुल गांधी को भी इस मुद्दे से भागना नहीं चाहिए।
झारखंड में हेमंत सोरेन के नेतृत्व में JMM, कांग्रेस और वाम दलों का गठबंधन सरकार में है। सोमवार को राहुल गांधी ने झारखंड में छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग की आलोचना की थी। हालांकि, BJP अब इस मुद्दे को संसद में जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है।
FCRA, परिसीमन और महिला आरक्षण पर भी संशय
संसद के मानसून सत्र में अब केवल तीन दिन बचे हैं। ऐसे में तीन महत्वपूर्ण विधेयकों को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
इनमें FCRA संशोधन विधेयक, परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन और महिला आरक्षण से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।
संसद का मौजूदा मानसून सत्र 13 अगस्त तक चलना है। लेकिन लगातार जारी गतिरोध के कारण इन विधेयकों को मौजूदा सत्र में पेश किए जाने या उन पर आगे की प्रक्रिया होने को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
सरकार ने इन विधेयकों को लेकर पहले से तैयारियां की थीं और सदन में पर्याप्त समर्थन जुटाने की कोशिश की थी। इसके बाद कुछ विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों पर अपना रुख नरम करने के संकेत भी दिए थे।
हालांकि, कांग्रेस और उसके कई सहयोगी दल इन प्रस्तावों के साथ-साथ FCRA संशोधन विधेयक का विरोध करने की बात कह चुके हैं।
परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर क्या है प्रस्ताव?
संविधान संशोधन से जुड़े प्रस्ताव में 2029 में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण और लोकसभा क्षेत्रों की संख्या बढ़ाने से संबंधित प्रावधान बताए जा रहे हैं।
इससे पहले अप्रैल में सरकार दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में सफल नहीं हो पाई थी। ऐसे में इन प्रस्तावों को आगे बढ़ाने के लिए सरकार के सामने पर्याप्त समर्थन जुटाना बड़ी चुनौती बनी हुई है।
वहीं, FCRA संशोधन विधेयक 2026 को 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। इस विधेयक पर अभी चर्चा और पारित होने की प्रक्रिया बाकी है।
अब संसद में जारी राजनीतिक गतिरोध के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार इन महत्वपूर्ण विधेयकों को मौजूदा मानसून सत्र में आगे बढ़ा पाएगी या फिर इन्हें अगले सत्र तक इंतजार करना पड़ेगा।



















