AIN NEWS 1 नैनीताल: उत्तराखंड के प्रसिद्ध कैंची धाम में बढ़ती श्रद्धालुओं की भीड़ अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। बाबा नीम करौली के दर्शन के लिए हर सप्ताह बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। हाल के वीकेंड में श्रद्धालुओं की संख्या बेहद तेजी से बढ़ने के बाद यातायात, पार्किंग और मंदिर परिसर की व्यवस्था पर दबाव देखने को मिला। इसी को देखते हुए कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत की अध्यक्षता में अधिकारियों, पुलिस, मंदिर प्रबंधन और स्थानीय कारोबारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में कैंची धाम के लिए लंबे समय की क्राउड मैनेजमेंट व्यवस्था तैयार करने पर जोर दिया गया।
प्रशासन अब सिर्फ भीड़ आने के बाद व्यवस्था संभालने के बजाय पहले से यह अनुमान लगाने की तैयारी कर रहा है कि किसी दिन कैंची धाम में कितने श्रद्धालु पहुंच सकते हैं। इसके आधार पर पार्किंग, यातायात, शटल सेवा, सुरक्षा और मंदिर में दर्शन की व्यवस्था तय की जाएगी।
कैंची धाम आने से पहले रजिस्ट्रेशन की तैयारी
बैठक में सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव श्रद्धालुओं के प्री-रजिस्ट्रेशन को लेकर सामने आया है। प्रशासन का मानना है कि यदि पहले से यह जानकारी उपलब्ध रहे कि किस दिन कितने श्रद्धालु कैंची धाम आने वाले हैं, तो उसी हिसाब से व्यवस्थाएं की जा सकती हैं।
इसके लिए जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की ओर से शासन को श्रद्धालुओं के अनिवार्य रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव भेजे जाने की बात सामने आई है। साथ ही श्रद्धालुओं और पर्यटकों के रजिस्ट्रेशन के लिए एक पोर्टल शुरू करने की तैयारी भी बताई गई है।
हालांकि, अभी इसे लागू व्यवस्था के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। अंतिम नियम और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शासन स्तर पर निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।
रोजाना 20 से 25 हजार श्रद्धालुओं की क्षमता पर विचार
बैठक में कैंची धाम में रोजाना करीब 20 से 25 हजार श्रद्धालुओं की संख्या को फिलहाल एक मैनेजेबल कैप के तौर पर देखा गया है। यानी इतनी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंदिर और आसपास की व्यवस्थाओं को संभालना अपेक्षाकृत संभव माना जा रहा है।
लेकिन यह संख्या अंतिम और स्थायी सीमा नहीं है। प्रशासन परिस्थितियों, उपलब्ध संसाधनों और जमीनी स्थिति के अनुसार इसमें बदलाव कर सकता है।
यह प्रस्ताव इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल के वीकेंड में श्रद्धालुओं की संख्या इस अनुमानित क्षमता से काफी ऊपर पहुंच गई थी। रिपोर्टों के मुताबिक एक वीकेंड पर श्रद्धालुओं की संख्या 50 हजार से अधिक पहुंचने की बात सामने आई, जिससे सड़क, पार्किंग और स्थानीय व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया।
मंदिर में अलग होगी एंट्री और एग्जिट व्यवस्था
भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए मंदिर परिसर में प्रवेश और निकास के रास्ते अलग-अलग करने पर भी जोर दिया गया है। खासकर वीकेंड पर जब श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ती है, तब एक ही रास्ते से लोगों के आने-जाने के कारण भीड़ बढ़ने की संभावना रहती है।
प्रशासन ने बेहतर भीड़ नियंत्रण के लिए एंट्री और एग्जिट को अलग करने की व्यवस्था पर काम करने के निर्देश दिए हैं। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक इसे बेहतर बनाने के लिए करीब 15 दिन के भीतर व्यवस्था तैयार करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
इससे मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित करने और कतार व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
हर वीकेंड से पहले होगी क्राउड मैनेजमेंट की तैयारी
अब कैंची धाम में व्यवस्था केवल बड़े धार्मिक आयोजनों या विशेष पर्वों तक सीमित नहीं रहेगी। सामान्य वीकेंड पर भी श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने को देखते हुए प्रशासन ने नियमित समीक्षा की व्यवस्था पर जोर दिया है।
एसडीएम, सीओ और एआरटीओ स्तर के अधिकारियों के बीच वीकेंड से पहले बैठक कर भीड़ का अनुमान, पार्किंग की स्थिति, ट्रैफिक व्यवस्था, शटल सेवा और संभावित रूट डायवर्जन की समीक्षा की जाएगी। जरूरत के अनुसार मौके पर अतिरिक्त व्यवस्था की जा सकेगी।
भवाली और आसपास से चल सकती है शटल सेवा
कैंची धाम के आसपास पार्किंग की सीमित क्षमता को देखते हुए शटल सेवा को भी महत्वपूर्ण विकल्प माना जा रहा है। ज्यादा भीड़ होने पर भवाली और आसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालुओं को शटल वाहनों के माध्यम से कैंची धाम तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा सकती है।
इसमें परिवहन विभाग और केएमओयू की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। उद्देश्य यह है कि हर श्रद्धालु अपने निजी वाहन से सीधे मंदिर के आसपास पहुंचने की कोशिश न करे। इससे मुख्य सड़क पर वाहनों का दबाव और पार्किंग की समस्या दोनों कम की जा सकती हैं।
होटल और होमस्टे की भी होगी निगरानी
कैंची धाम में बढ़ती भीड़ का असर सिर्फ मंदिर और सड़क पर ही नहीं, बल्कि आसपास के होटल और होमस्टे कारोबार पर भी पड़ रहा है। प्रशासन ने क्षेत्र में उपलब्ध ठहरने की क्षमता को ध्यान में रखते हुए होटल और होमस्टे की निगरानी पर भी जोर दिया है।
श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे कैंची धाम आने से पहले अपने ठहरने की व्यवस्था बुक कर लें। बिना बुकिंग पहुंचने पर होटल या होमस्टे की तलाश में वाहन इधर-उधर घूमते हैं, जिससे ट्रैफिक और पार्किंग का दबाव और बढ़ जाता है।
बैठक में होटल-होमस्टे को नियमित करने और रेस्टोरेंट में रेट लिस्ट प्रदर्शित कराने की बात भी सामने आई है। वीकेंड पर प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीमों द्वारा निगरानी किए जाने की तैयारी है।
अवैध बाइक टैक्सी और शिप्रा नदी पर भी नजर
क्राउड मैनेजमेंट की योजना केवल मंदिर तक सीमित नहीं है। बैठक में आसपास चल रही अवैध बाइक टैक्सी जैसी गतिविधियों पर कार्रवाई और शिप्रा नदी क्षेत्र की निगरानी का मुद्दा भी उठाया गया।
प्रशासन का उद्देश्य कैंची धाम आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के साथ-साथ पूरे क्षेत्र में यातायात और सार्वजनिक व्यवस्था को बेहतर बनाना है।
क्यों जरूरी हो गया बदलाव?
कैंची धाम पिछले कुछ वर्षों में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हुआ है। सप्ताहांत, छुट्टियों और विशेष अवसरों पर यहां अचानक बड़ी संख्या में लोग पहुंच जाते हैं। ऐसी स्थिति में स्थानीय सड़कें, पार्किंग, होटल और मंदिर परिसर की क्षमता पर एक साथ दबाव पड़ता है।
इसी वजह से प्रशासन अब ऐसी व्यवस्था बनाना चाहता है जिसमें श्रद्धालुओं की संख्या का अनुमान पहले से लगाया जा सके और उसी के मुताबिक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।
कुल मिलाकर कैंची धाम में प्रस्तावित बदलाव का मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं को रोकना नहीं, बल्कि बढ़ती भीड़ को व्यवस्थित तरीके से संभालना है। प्री-रजिस्ट्रेशन, संभावित 20 से 25 हजार की मैनेजेबल कैप, अलग एंट्री-एग्जिट, शटल सेवा, पार्किंग और ट्रैफिक प्लान तथा होटल-होमस्टे की निगरानी जैसे कदम इसी दिशा में उठाए जा रहे हैं।
हालांकि श्रद्धालुओं के लिए सबसे अहम बात यह है कि रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता और प्रवेश की अंतिम सीमा कब से लागू होगी, इसकी आधिकारिक प्रक्रिया शासन के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी। इसलिए कैंची धाम जाने की योजना बना रहे लोगों को आगे जारी होने वाले प्रशासनिक दिशा-निर्देशों पर नजर रखनी चाहिए।
Kainchi Dham in Nainital is preparing for a new crowd management system as the number of devotees visiting Neem Karoli Baba Temple continues to rise. The proposed Kainchi Dham registration system may require devotees to pre-register before visiting, while a manageable daily capacity of around 20,000 to 25,000 devotees is being considered. The administration is also working on separate entry and exit routes, shuttle services, traffic management, parking arrangements and monitoring of hotels and homestays. Kumaon Commissioner Deepak Rawat has reviewed the arrangements to improve the Kainchi Dham darshan experience and manage the growing religious tourism in the region.



















