KGMU में कैसे सामने आया डॉ. रमीज का मामला?
AIN NEWS 1: लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के पैथोलॉजी विभाग में जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर के रूप में कार्यरत रहे डॉ. रमीजुद्दीन नायक उर्फ रमीज पर एक महिला डॉक्टर ने शादी का झांसा देकर लंबे समय तक शारीरिक शोषण करने का आरोप लगाया था।
पीड़िता के अनुसार, आरोपी ने शुरुआत में उससे दोस्ती की और धीरे-धीरे नजदीकियां बढ़ाईं। उसने शादी करने का भरोसा दिलाकर संबंध बनाए। आरोप है कि जब महिला डॉक्टर ने शादी को लेकर गंभीरता दिखाई तो आरोपी ने कथित तौर पर धर्म परिवर्तन की शर्त रख दी।
महिला ने यह भी आरोप लगाया कि विरोध करने पर उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और निजी तस्वीरों तथा वीडियो के जरिए धमकियां दी गईं।
दिसंबर 2025 में इस मामले को लेकर शिकायत और प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। आरोपी जनवरी 2026 में गिरफ्तार किया गया था।
मुर्गे के खून से प्रेम पत्र लिखने का चौंकाने वाला आरोप
इस पूरे मामले में सबसे विचित्र और चौंकाने वाला पहलू कथित प्रेम पत्रों से जुड़ा है।
सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, आरोपी युवतियों का विश्वास जीतने और उन्हें अपने प्रेम में फंसाने के लिए मुर्गे के खून से पत्र लिखता था। बताया गया कि वह इन पत्रों को इस तरह पेश करता था, जैसे उसने अपनी उंगली काटकर खुद के खून से प्रेम संदेश लिखा हो।
इस तरीके से वह सामने वाली युवती के सामने अपने प्यार को बेहद गहरा और सच्चा दिखाने की कोशिश करता था।
हालांकि, इस घटना से संबंधित प्रत्येक विवरण की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी आवश्यक है। इसलिए इसे जांच में सामने आए आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
निजी वीडियो और तस्वीरों के जरिए ब्लैकमेलिंग का आरोप
पुलिस जांच में डिजिटल साक्ष्य इस मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर सामने आए हैं।
4 नवंबर की रिपोर्टों के अनुसार, आरोपी के पास से महिलाओं की निजी तस्वीरें और वीडियो मिलने की बात सामने आई। आरोप है कि वह सोशल मीडिया पर बातचीत के दौरान स्क्रीन रिकॉर्डिंग करता था और निजी पलों को डिजिटल माध्यमों में सुरक्षित रखता था।
इसके बाद इन्हीं तस्वीरों और वीडियो का इस्तेमाल कथित तौर पर महिलाओं पर दबाव बनाने और उन्हें धमकाने के लिए किया जाता था।
5 नवंबर को सामने आई रिपोर्ट में आरोपी के पास से 500 से अधिक अश्लील वीडियो और लगभग 4 टेराबाइट डिजिटल डेटा मिलने का दावा किया गया है। एसटीएफ इस डेटा की जांच के जरिए यह पता लगाने में जुटी है कि इसमें कितनी महिलाएं शामिल हैं और क्या किसी अन्य व्यक्ति के साथ भी इन वीडियो को साझा किया गया था।
डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
शादी के रिश्ते तुड़वाने के भी लगाए गए आरोप
पीड़िता ने आरोपी पर उसके निजी जीवन को बुरी तरह प्रभावित करने का आरोप लगाया है।
उसके दावे के मुताबिक, जब भी परिवार की ओर से उसकी शादी के लिए कोई रिश्ता आता था, आरोपी कथित तौर पर संबंधित युवकों या उनके परिवारों तक आपत्तिजनक वीडियो और तस्वीरें पहुंचा देता था।
पीड़िता का दावा है कि इस तरीके से उसके पांच से सात शादी के रिश्ते टूट गए।
इन आरोपों का उद्देश्य महिला को मानसिक रूप से कमजोर करना और उसे अपनी इच्छा के अनुसार निर्णय लेने के लिए मजबूर करना बताया गया है। हालांकि, प्रत्येक रिश्ते के टूटने और वीडियो भेजे जाने से संबंधित परिस्थितियों की पुष्टि जांच के दस्तावेजों से ही हो सकेगी।
जबरन गर्भपात और लंबे समय तक प्रताड़ना के आरोप
इस मामले में महिला डॉक्टर ने केवल ब्लैकमेलिंग ही नहीं, बल्कि लंबे समय तक शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के आरोप भी लगाए हैं।
शिकायत के अनुसार, आरोपी ने शादी का भरोसा देकर संबंध बनाए और बाद में कथित तौर पर गर्भपात कराने का दबाव बनाया। पीड़िता ने जबरन गर्भपात कराने का आरोप लगाया है।
पुलिस की जांच में एक अन्य महिला डॉक्टर का मामला भी सामने आया। उसने भी आरोपी के खिलाफ यौन शोषण, धर्मांतरण के दबाव और गर्भपात से संबंधित गंभीर आरोप लगाए।
पुलिस के आरोपपत्र में दोनों महिलाओं के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों का उल्लेख किया गया है।
एक पीड़िता ने मानसिक प्रताड़ना के कारण आत्महत्या की कोशिश करने की बात भी शिकायत में बताई थी। इससे यह मामला केवल आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा और मानसिक उत्पीड़न का गंभीर प्रश्न भी बन गया।
आरोपी के माता-पिता और अन्य व्यक्ति भी जांच के दायरे में
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने आरोपी के परिवार के कुछ सदस्यों और एक अन्य व्यक्ति की भूमिका की भी पड़ताल की।
पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक, आरोपी के पिता सलीमुद्दीन, मां खतीजा और निकाह में गवाह बने शारिक खान को भी मामले में आरोपी बनाया गया है।
दूसरी पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसे नशीली दवा देकर यौन उत्पीड़न किया गया और बाद में निजी तस्वीरों के जरिए दबाव बनाया गया। उसने आरोपी के परिवार पर भी प्रताड़ना और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने के आरोप लगाए।
इन आरोपों की जांच के दौरान पुलिस ने मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों से साक्ष्य जुटाए।
800 से अधिक पन्नों की चार्जशीट दाखिल
मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम 28 फरवरी 2026 को सामने आया था, जब पुलिस ने डॉ. रमीज और उसके माता-पिता के खिलाफ लगभग 800 पन्नों की चार्जशीट दाखिल किए जाने की जानकारी दी थी।
इसमें यौन शोषण, जबरन गर्भपात और गैरकानूनी धर्मांतरण के दबाव से जुड़े आरोप शामिल बताए गए।
आरोपपत्र में पुलिस ने पीड़िताओं के बयान, डिजिटल साक्ष्य और जांच के दौरान जुटाई गई अन्य सामग्री का उल्लेख किया है।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि चार्जशीट दाखिल होना आरोपों का न्यायिक रूप से सिद्ध होना नहीं है। अदालत में साक्ष्यों की जांच और सुनवाई के बाद ही आरोपों पर अंतिम निर्णय होगा।
KGMU प्रशासन और उत्तर प्रदेश सरकार भी सक्रिय
मामले का प्रभाव अब विश्वविद्यालय प्रशासन तक पहुंच चुका है। KGMU प्रशासन ने पहले आरोपी को निलंबित करने और परिसर में प्रवेश पर रोक लगाने जैसी कार्रवाई की थी। विश्वविद्यालय की आंतरिक समितियों ने भी शिकायतों की जांच की।
इसके अलावा, उत्तर प्रदेश सरकार ने 30 अक्टूबर 2026 को जारी निर्देशों के माध्यम से एसटीएफ की रिपोर्ट में नामित डॉक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा है।
5 नवंबर तक सामने आई जानकारी के अनुसार, विश्वविद्यालय की विशेष कार्य परिषद की बैठक 6 नवंबर 2026 को प्रस्तावित है। इस बैठक में एसटीएफ की रिपोर्ट और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ संभावित प्रशासनिक कार्रवाई पर विचार किया जाना है।
इससे स्पष्ट है कि मामला अब केवल एक आरोपी डॉक्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्वविद्यालय में महिला कर्मचारियों और डॉक्टरों की सुरक्षा तथा शिकायतों पर प्रशासनिक कार्रवाई की व्यवस्था भी जांच के केंद्र में है।
एसटीएफ अब किन पहलुओं की जांच कर रही है?
जांच एजेंसियों के सामने अब कई महत्वपूर्ण सवाल हैं।
पहला, आरोपी के पास से मिले डिजिटल डेटा में कितनी महिलाओं की निजी तस्वीरें और वीडियो मौजूद हैं?
दूसरा, क्या इन तस्वीरों और वीडियो का इस्तेमाल अन्य महिलाओं को धमकाने के लिए भी किया गया?
तीसरा, क्या इस पूरे मामले में दूसरे लोगों की भी कोई भूमिका रही है?
चौथा, क्या विश्वविद्यालय के भीतर किसी स्तर पर शिकायतों को दबाने या आरोपियों को संरक्षण देने की कोशिश हुई?
इसके अलावा, एसटीएफ की रिपोर्ट में सरकारी शोध बजट और फेलोशिप की रकम के कथित दुरुपयोग से जुड़े पहलुओं की जांच का भी उल्लेख सामने आया है।
इन सभी सवालों के जवाब जांच और संबंधित दस्तावेजों के सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
महिला सुरक्षा और संस्थागत जवाबदेही पर उठे सवाल
KGMU देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में गिना जाता है। ऐसे संस्थान से जुड़े मामले में इतने गंभीर आरोप सामने आना स्वाभाविक रूप से चिंता पैदा करता है।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि चिकित्सा संस्थानों में काम करने वाली महिला डॉक्टरों और कर्मचारियों की शिकायतों पर कितनी तेजी और निष्पक्षता से कार्रवाई की जाती है।
किसी भी महिला की निजी तस्वीरों या वीडियो के जरिए उसे धमकाना, उसकी स्वतंत्रता को प्रभावित करना और उसके साथ जबरदस्ती करना गंभीर आपराधिक विषय हैं। ऐसे मामलों में पीड़िता की पहचान और निजता की रक्षा करना भी उतना ही जरूरी है।
फिलहाल पुलिस और एसटीएफ की जांच के साथ-साथ विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्रवाई पर भी नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट, एसटीएफ की जांच और अदालत में चलने वाली कार्यवाही से इस मामले की कई और परतें सामने आ सकती हैं।
नोट: इस रिपोर्ट में वर्णित आरोप पुलिस जांच, शिकायतों और मीडिया में प्रकाशित जानकारियों पर आधारित हैं। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय सक्षम न्यायालय द्वारा साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।
The KGMU Lucknow doctor case involving Dr. Rameezuddin has raised serious concerns over women’s safety, alleged sexual exploitation, forced abortion, blackmailing and pressure for religious conversion. According to media reports, the Uttar Pradesh STF investigation has uncovered more than 500 objectionable videos and approximately 4 TB of digital data. The investigation also examines allegations involving private photographs, digital blackmail, multiple victims and the possible involvement of other individuals. The KGMU case has prompted questions about institutional accountability, workplace safety and the protection of women doctors in Uttar Pradesh.



















