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लखनऊ KGMU में मेडिकल चमत्कार: मजदूर के शरीर को आर-पार भेद गए चार सरिये, साढ़े आठ घंटे की जटिल सर्जरी से बची जान!

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लखनऊ KGMU में डॉक्टरों ने किया मेडिकल चमत्कार, शरीर को आर-पार भेद गए चार लोहे के सरिये, साढ़े आठ घंटे चली सर्जरी के बाद बची मजदूर की जान

AIN NEWS 1 लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों ने एक ऐसा ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा किया है, जिसे चिकित्सा क्षेत्र में किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा है। निर्माणाधीन इमारत पर काम कर रहे 23 वर्षीय एक मजदूर के शरीर में चार बड़े लोहे के सरिये आर-पार हो गए थे। हादसा इतना भयावह था कि मौके पर मौजूद लोगों को लगा कि युवक का बचना लगभग असंभव है। लेकिन KGMU के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने करीब साढ़े आठ घंटे तक चली जटिल सर्जरी के बाद उसकी जान बचा ली।

डॉक्टरों के अनुसार मरीज अब खतरे से बाहर है और लगातार उसकी निगरानी की जा रही है। यह ऑपरेशन ट्रॉमा सर्जरी, एनेस्थीसिया, ऑर्थोपेडिक्स, यूरोलॉजी, जनरल सर्जरी और क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों के संयुक्त प्रयास से सफल हो सका।

निर्माणाधीन इमारत में काम करते समय हुआ हादसा

जानकारी के अनुसार 23 वर्षीय मजदूर एक निर्माणाधीन भवन में काम कर रहा था। इसी दौरान अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया और वह नीचे गिर पड़ा। नीचे पहले से रखे चार लंबे लोहे के सरिये उसके शरीर में घुस गए और आर-पार निकल गए।

हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सहकर्मियों और स्थानीय लोगों ने बिना सरियों को निकाले बेहद सावधानी से घायल युवक को अस्पताल पहुंचाया। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरियों को मौके पर निकालने की कोशिश की जाती, तो अत्यधिक रक्तस्राव के कारण मरीज की जान भी जा सकती थी।

गंभीर हालत में KGMU ट्रॉमा सेंटर लाया गया

घायल युवक को तत्काल KGMU ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसकी स्थिति का गहन परीक्षण किया। एक्स-रे, सीटी स्कैन और अन्य जांचों में पता चला कि चारों सरिये शरीर के अलग-अलग हिस्सों को चीरते हुए अंदर तक पहुंचे हैं।

इनसे कई महत्वपूर्ण अंगों और ऊतकों को गंभीर नुकसान पहुंचा था। मरीज की हालत बेहद नाजुक थी और हर मिनट उसके लिए महत्वपूर्ण था।

डॉक्टरों ने बनाई विशेष रणनीति

मामले की गंभीरता को देखते हुए KGMU प्रशासन ने तुरंत विभिन्न विभागों के वरिष्ठ डॉक्टरों की संयुक्त टीम गठित की। ऑपरेशन शुरू करने से पहले प्रत्येक सरिये की स्थिति, उसकी दिशा और आसपास मौजूद रक्त वाहिकाओं व अंगों का विस्तार से अध्ययन किया गया।

डॉक्टरों ने तय किया कि किसी भी सरिये को जल्दबाजी में नहीं निकाला जाएगा। प्रत्येक सरिये को नियंत्रित तरीके से निकालते हुए क्षतिग्रस्त अंगों की मरम्मत की जाएगी, ताकि रक्तस्राव को रोका जा सके और मरीज की जान बचाई जा सके।

साढ़े आठ घंटे तक चला जटिल ऑपरेशन

ऑपरेशन थिएटर में शुरू हुई सर्जरी लगातार लगभग साढ़े आठ घंटे तक चली। इस दौरान डॉक्टरों की टीम ने एक-एक कर चारों लोहे के सरियों को बेहद सावधानी से बाहर निकाला।

सर्जरी के दौरान कई स्थानों पर आंतरिक रक्तस्राव को नियंत्रित किया गया। क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत की गई और प्रभावित अंगों का उपचार किया गया। पूरी प्रक्रिया के दौरान एनेस्थीसिया और क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ लगातार मरीज की जीवनरक्षक प्रणाली पर नजर बनाए रहे।

काफी कठिन और जोखिम भरे ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने मरीज की जान बचाने में सफलता हासिल की।

अब खतरे से बाहर है मरीज

सर्जरी के बाद मरीज को आईसीयू में शिफ्ट किया गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टर उसकी लगातार निगरानी कर रहे हैं। अस्पताल के अनुसार उसकी हालत पहले से काफी बेहतर है और वह खतरे से बाहर है।

हालांकि पूरी तरह स्वस्थ होने में अभी कुछ समय लगेगा। डॉक्टर संक्रमण से बचाव, घाव भरने की प्रक्रिया और शरीर के अन्य अंगों की कार्यक्षमता पर लगातार नजर रखे हुए हैं।

समय पर अस्पताल पहुंचना बना सबसे बड़ा कारण

विशेषज्ञ डॉक्टरों का कहना है कि इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि घायल युवक को समय रहते अस्पताल पहुंचा दिया गया और रास्ते में सरियों को निकालने की कोशिश नहीं की गई।

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डॉक्टरों के अनुसार किसी भी ऐसे हादसे में शरीर में धंसी हुई वस्तु को मौके पर निकालना बेहद खतरनाक हो सकता है। इससे भारी रक्तस्राव शुरू हो सकता है और मरीज की मौत भी हो सकती है।

ऐसे हादसों में क्या करें?

चिकित्सकों ने लोगों को सलाह दी है कि यदि किसी व्यक्ति के शरीर में लोहे का सरिया, रॉड, चाकू या कोई अन्य नुकीली वस्तु धंस जाए तो:

वस्तु को स्वयं निकालने की कोशिश न करें।

घायल व्यक्ति को कम से कम हिलाएं।

तुरंत एंबुलेंस या नजदीकी ट्रॉमा सेंटर पहुंचाएं।

रक्तस्राव होने पर आसपास के हिस्से पर हल्का दबाव दें, लेकिन धंसी हुई वस्तु को न छुएं।

जितनी जल्दी विशेषज्ञ इलाज मिलेगा, जान बचने की संभावना उतनी अधिक होगी।

KGMU की विशेषज्ञता एक बार फिर आई सामने

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी देश के प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों में गिनी जाती है। यहां गंभीर ट्रॉमा, न्यूरोसर्जरी, कार्डियक और मल्टी ऑर्गन सर्जरी जैसी जटिल प्रक्रियाएं नियमित रूप से की जाती हैं।

इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आधुनिक चिकित्सा तकनीक, अनुभवी डॉक्टरों और टीमवर्क के दम पर बेहद गंभीर मरीजों की जान भी बचाई जा सकती है।

विशेषज्ञों की राय

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों का पालन करना बेहद आवश्यक है। हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट और अन्य सुरक्षा उपकरणों का उपयोग ऐसे हादसों की संभावना को काफी हद तक कम कर सकता है।

इसके अलावा निर्माण कंपनियों को भी सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन कराना चाहिए ताकि मजदूरों की जान जोखिम में न पड़े।

लखनऊ के KGMU ट्रॉमा सेंटर में हुई यह सर्जरी आधुनिक चिकित्सा विज्ञान, अनुभवी डॉक्टरों की कुशलता और समय पर मिले इलाज का उत्कृष्ट उदाहरण है। चार लोहे के सरियों से बुरी तरह घायल एक युवक का सुरक्षित बच जाना न केवल चिकित्सा जगत की बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि गंभीर से गंभीर दुर्घटना में भी सही प्राथमिक उपचार और विशेषज्ञ चिकित्सा से जीवन बचाया जा सकता है।

A remarkable medical miracle at KGMU Lucknow has drawn national attention after doctors successfully saved a 23-year-old construction worker whose body was pierced by four iron rods in a devastating construction site accident. Following an 8.5-hour life-saving surgery at the KGMU Trauma Centre, the patient was declared out of danger. The case highlights the expertise of KGMU doctors, advanced trauma surgery, emergency medical care, and the importance of timely treatment in severe accident cases. This extraordinary surgery is being recognized as one of the most remarkable medical miracles in India.

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