KGMU लव जिहाद प्रकरण में सैयद अब्बास पर जांच के आदेश, यूपी सरकार ने गठित की समिति

AIN NEWS 1: लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। इस बार मामला विश्वविद्यालय के कुलपति कार्यालय में तैनात रहे पूर्व ओएसडी (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) सैयद अब्बास से जुड़ा हुआ है। उत्तर प्रदेश सरकार ने उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की गंभीरता को देखते हुए एक जांच समिति का गठन किया है, जो पूरे प्रकरण की गहराई से जांच करेगी।
यह मामला उस समय सामने आया जब कथित “लव जिहाद” से जुड़े एक विवाद के दौरान सैयद अब्बास की भूमिका को लेकर कई सवाल उठने लगे थे। आरोप है कि उन्होंने इस मामले में आरोपी एक डॉक्टर को बचाने की कोशिश की थी। इसके अलावा विश्वविद्यालय परिसर में धार्मिक गतिविधियों और आयोजनों को बढ़ावा देने जैसे आरोप भी उन पर लगाए गए थे।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
जानकारी के अनुसार, केजीएमयू में कार्यरत एक डॉक्टर पर गंभीर आरोप लगे थे, जिनकी जांच के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठे। इसी दौरान यह बात सामने आई कि कुलपति कार्यालय में तैनात ओएसडी सैयद अब्बास ने कथित तौर पर आरोपी डॉक्टर के पक्ष में हस्तक्षेप किया था। इस आरोप के बाद छात्र संगठनों और विभिन्न सामाजिक समूहों में असंतोष फैल गया।
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब कुछ धार्मिक संगठनों ने यह दावा किया कि विश्वविद्यालय परिसर के अंदर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित कराए जा रहे थे। उनका कहना था कि एक शैक्षणिक संस्थान में इस तरह की गतिविधियां प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती हैं।
नियुक्ति प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बीच नेशनल मेडिकोज ऑर्गेनाइजेशन (NMO) ने भी सैयद अब्बास की नियुक्ति को लेकर आपत्ति जताई। संगठन ने आरोप लगाया कि उन्हें कुलपति कार्यालय में नियमों के विपरीत तरीके से तैनात किया गया था।
एनएमओ का कहना था कि उनकी नियुक्ति प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी और निर्धारित प्रशासनिक मानकों का पालन नहीं किया गया। संगठन ने इस मामले को लेकर प्रशासन से जवाब मांगा और निष्पक्ष जांच की मांग की।
प्रशासन ने पहले ही हटाया था पद से
लगातार बढ़ते दबाव और विवाद के चलते केजीएमयू प्रशासन ने सैयद अब्बास को उनके पद से हटा दिया था। हालांकि, उस समय यह कार्रवाई चुपचाप की गई थी और आधिकारिक रूप से ज्यादा जानकारी साझा नहीं की गई थी।
लेकिन अब उत्तर प्रदेश सरकार ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए औपचारिक जांच के आदेश दे दिए हैं। सरकार द्वारा गठित समिति न केवल सैयद अब्बास पर लगे आरोपों की जांच करेगी, बल्कि उनकी नियुक्ति प्रक्रिया, प्रशासनिक भूमिका और विवादित घटनाओं में संभावित हस्तक्षेप जैसे सभी पहलुओं की पड़ताल करेगी।
जांच समिति किन बिंदुओं पर करेगी काम?
सरकार की ओर से गठित समिति निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर जांच करेगी:
आरोपी डॉक्टर को बचाने के आरोपों की सच्चाई
केजीएमयू परिसर में धार्मिक आयोजनों से जुड़े दावे
सैयद अब्बास की नियुक्ति प्रक्रिया की वैधता
प्रशासनिक पद पर रहते हुए उनकी भूमिका और अधिकारों का उपयोग
विश्वविद्यालय के नियमों और प्रक्रियाओं का पालन हुआ या नहीं
समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई तय की जाएगी।
विश्वविद्यालय की छवि पर पड़ा असर
इस पूरे प्रकरण ने केजीएमयू की प्रशासनिक कार्यप्रणाली और संस्थागत निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में शुमार केजीएमयू की छवि को इस विवाद से नुकसान पहुंचा है।
छात्रों और शिक्षकों के बीच भी इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हैं। कई लोगों का मानना है कि एक शैक्षणिक संस्थान में पारदर्शिता और नियमों का पालन सर्वोपरि होना चाहिए, ताकि संस्थान की साख बरकरार रहे।
आगे क्या?
अब सभी की निगाहें सरकार द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो सैयद अब्बास के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई हो सकती है।
वहीं, इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका की भी समीक्षा की जा सकती है, जिससे भविष्य में इस तरह के विवादों की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
The Uttar Pradesh government has initiated an official inquiry against former OSD Syed Abbas of King George Medical University (KGMU) in Lucknow following allegations linked to the Love Jihad controversy, irregular appointment process, and reported religious activities inside the campus. The National Medicos Organisation had earlier raised objections over his appointment, claiming it violated administrative norms. The inquiry committee will investigate Syed Abbas’s role, administrative conduct, and alleged involvement in protecting an accused doctor during the KGMU Love Jihad case.


















