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मारुति सुजुकी को बड़ा झटका: रायपुर उपभोक्ता आयोग ने डॉक्टर को नई Grand Vitara देने का दिया आदेश, कंपनी ने फैसले को दी चुनौती!

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मारुति सुजुकी को बड़ा झटका: रायपुर उपभोक्ता आयोग ने डॉक्टर को नई Grand Vitara देने का दिया आदेश, कंपनी ने फैसले को दी चुनौती

AIN NEWS 1: देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनियों में शामिल मारुति सुजुकी को छत्तीसगढ़ के रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (Consumer Commission) से बड़ा झटका लगा है। आयोग ने कंपनी और उसके अधिकृत डीलर को एक डॉक्टर को नई Maruti Suzuki Grand Vitara Strong Hybrid उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। आयोग ने माना कि ग्राहक को बेची गई कार में गंभीर तकनीकी विवाद सामने आया और कंपनी की ओर से दी गई सेवा उपभोक्ता के हितों के अनुरूप नहीं थी।

हालांकि इस मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि मारुति सुजुकी ने आयोग के आदेश से असहमति जताई है। कंपनी का कहना है कि संबंधित वाहन पूरी तरह E20 ईंधन के अनुकूल (E20 Compatible) था और इंजन में आई समस्या का कारण ईंधन की गुणवत्ता हो सकती है। कंपनी ने संकेत दिया है कि वह इस फैसले को उच्च मंच पर चुनौती देगी।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला रायपुर निवासी डॉ. प्रेमराज देबता से जुड़ा है। उन्होंने जून 2024 में मारुति सुजुकी की Grand Vitara Strong Hybrid Zeta Plus खरीदी थी। कार खरीदने के बाद शुरुआती महीनों में सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन कुछ समय बाद वाहन में तकनीकी दिक्कतें सामने आने लगीं।

करीब 21,913 किलोमीटर चलने के बाद अचानक कार का इंजन खराब हो गया और वाहन सड़क पर बंद हो गया। इसके बाद कार को अधिकृत सर्विस सेंटर ले जाया गया, जहां जांच के बाद कंपनी की ओर से इंजन में गंभीर खराबी बताई गई।

डॉ. देबता का आरोप था कि कार वारंटी अवधि में होने के बावजूद कंपनी ने मुफ्त मरम्मत करने के बजाय उनसे लगभग 5.30 लाख रुपये का खर्च मांग लिया। उनका कहना था कि यह पूरी तरह अनुचित था क्योंकि वाहन अभी भी वारंटी के दायरे में था।

उपभोक्ता आयोग तक कैसे पहुंचा मामला?

जब कंपनी और डीलर से समाधान नहीं मिला तो डॉ. देबता ने रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने शिकायत में आरोप लगाया कि उन्हें नया मॉडल बताकर पुराना वाहन बेचा गया और बाद में वारंटी के बावजूद मरम्मत से इनकार किया गया।

आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें, दस्तावेज और तकनीकी रिकॉर्ड का विस्तृत अध्ययन किया। सुनवाई के दौरान वाहन के निर्माण वर्ष, तकनीकी विनिर्देश और वारंटी से जुड़े कई दस्तावेज आयोग के सामने पेश किए गए।

आयोग ने किन आधारों पर दिया फैसला?

सुनवाई के बाद आयोग ने माना कि शिकायतकर्ता को बेचा गया वाहन जनवरी 2023 में निर्मित मॉडल था, जबकि उसकी बिक्री जून 2024 में की गई। आयोग ने यह भी माना कि वाहन की बिक्री और तकनीकी जानकारी को लेकर पर्याप्त पारदर्शिता नहीं बरती गई।

आयोग के अनुसार कंपनी और डीलर की ओर से उपभोक्ता को उचित सेवा उपलब्ध नहीं कराई गई। वारंटी अवधि के दौरान भारी मरम्मत राशि की मांग करना भी उपभोक्ता के अधिकारों के विपरीत माना गया।

इन्हीं आधारों पर आयोग ने इसे सेवा में कमी (Deficiency in Service) और अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) की श्रेणी में माना।

आयोग ने क्या आदेश दिया?

रायपुर जिला उपभोक्ता आयोग ने अपने आदेश में कहा कि कंपनी और डीलर 45 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता को नई E20-कंप्लायंट Maruti Suzuki Grand Vitara Strong Hybrid उपलब्ध कराएं।

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यदि निर्धारित अवधि में नई कार उपलब्ध नहीं कराई जाती है, तो कंपनी को वाहन की ऑन-रोड कीमत लगभग 20.50 लाख रुपये (जिसमें रजिस्ट्रेशन और इंश्योरेंस भी शामिल है) ग्राहक को लौटानी होगी।

इसके अलावा आयोग ने कंपनी को:

1 लाख रुपये मानसिक पीड़ा और असुविधा के लिए

10 हजार रुपये मुकदमे के खर्च के लिए

यानी कुल 1.10 लाख रुपये अतिरिक्त भुगतान करने का भी निर्देश दिया।

E20 ईंधन क्या है और विवाद क्यों हुआ?

भारत सरकार पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ाने की नीति पर तेजी से काम कर रही है। इसी के तहत E20 Fuel यानी ऐसा पेट्रोल जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है, धीरे-धीरे पूरे देश में उपलब्ध कराया जा रहा है।

नई कारों को E20 ईंधन के अनुरूप बनाया जा रहा है ताकि पर्यावरण प्रदूषण कम हो और पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता घटे।

इस मामले में विवाद इस बात को लेकर सामने आया कि शिकायतकर्ता का दावा था कि उन्हें ऐसा वाहन दिया गया जो E20 के अनुरूप नहीं था, जबकि कंपनी इस दावे से पूरी तरह असहमत है।

मारुति सुजुकी ने क्या कहा?

फैसले के बाद मारुति सुजुकी ने आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी करते हुए कहा कि वह आयोग के आदेश से अवगत है।

कंपनी का कहना है कि संबंधित Grand Vitara पहले से ही E20 Compatible थी और वाहन के Owner’s Manual में स्पष्ट रूप से इसका उल्लेख किया गया है।

मारुति सुजुकी का यह भी कहना है कि वाहन में आई समस्या E20 ईंधन के कारण नहीं बल्कि कथित रूप से दूषित (Contaminated) ईंधन के इस्तेमाल से हुई हो सकती है।

कंपनी ने संकेत दिया है कि वह इस आदेश को उच्च उपभोक्ता आयोग या सक्षम न्यायालय में चुनौती देगी।

क्या यह अंतिम फैसला है?

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह जिला उपभोक्ता आयोग का फैसला है। यदि मारुति सुजुकी इस आदेश के खिलाफ अपील करती है तो मामला राज्य उपभोक्ता आयोग और उसके बाद राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग तक भी जा सकता है।

इसलिए फिलहाल यह अंतिम न्यायिक निर्णय नहीं माना जाएगा। आगे की कानूनी प्रक्रिया में आदेश में बदलाव भी संभव है।

उपभोक्ताओं के लिए क्या सीख?

यह मामला वाहन खरीदने वाले सभी ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि नई कार खरीदते समय ग्राहक को कुछ बातों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

वाहन का Manufacturing Date जरूर जांचें।

Owner’s Manual को ध्यान से पढ़ें।

वारंटी की सभी शर्तों को समझें।

किसी भी तकनीकी खराबी पर लिखित शिकायत दर्ज कराएं।

सर्विस सेंटर की रिपोर्ट सुरक्षित रखें।

समाधान न मिलने पर उपभोक्ता आयोग का सहारा लें।

E20 तकनीक पर क्यों बढ़ रहा है जोर?

भारत सरकार वर्ष 2025-26 तक E20 ईंधन के व्यापक उपयोग का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है। इसके लिए ऑटोमोबाइल कंपनियां लगातार नए इंजन विकसित कर रही हैं। हालांकि संक्रमण के इस दौर में ग्राहकों और कंपनियों दोनों के लिए तकनीकी जानकारी और पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

रायपुर जिला उपभोक्ता आयोग का यह फैसला ऑटोमोबाइल सेक्टर और उपभोक्ता अधिकारों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आयोग ने ग्राहक के पक्ष में फैसला देते हुए नई कार देने या पूरी कीमत लौटाने का आदेश दिया है। दूसरी ओर मारुति सुजुकी ने आदेश से असहमति जताते हुए दावा किया है कि विवादित वाहन पूरी तरह E20-कंप्लायंट था और इंजन की खराबी का कारण ईंधन की गुणवत्ता हो सकती है। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी उच्च अदालत में अपील करती है या आयोग के आदेश का पालन करती है।

The Raipur Consumer Commission has directed Maruti Suzuki to replace a Grand Vitara Strong Hybrid or refund the customer after a dispute over E20 fuel compatibility, warranty coverage, and alleged service deficiency. The case has drawn nationwide attention in the Indian automobile industry, highlighting important issues related to consumer rights, car warranty claims, engine failure, E20 compliant vehicles, and hybrid SUVs. Maruti Suzuki maintains that the vehicle was fully E20 compatible and has announced its intention to challenge the order before a higher forum, making this one of the most significant consumer court cases in India’s automotive sector.

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