AIN NEWS 1 | 12 फरवरी 2026 का दिन देश के श्रमिक आंदोलनों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज हो गया। इस दिन देशभर के मजदूर संगठनों के आह्वान पर आयोजित आम हड़ताल में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव और सेल्स प्रमोशन कर्मचारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। विशेष रूप से दिल्ली में कार्यरत दवा प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी ने इस आंदोलन को नई ऊर्जा दी।
ऑल इंडिया संयुक्त ट्रेड यूनियन्स और फेडरेशन ऑफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FMRAI) के आह्वान पर आयोजित इस हड़ताल में दिल्ली स्टेट मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स ऑर्गेनाइजेशन (DSMRO) के सभी सदस्य एकजुट दिखाई दिए। राजधानी दिल्ली में लगभग 2000 से अधिक मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव सड़कों पर उतरे और विभिन्न बड़े अस्पतालों तथा ट्रेड क्षेत्रों में प्रदर्शन कर अपनी मांगों को बुलंद किया।
दिल्ली में दिखा अभूतपूर्व जोश
दिल्ली के प्रमुख अस्पतालों के बाहर और प्रमुख दवा बाजारों में दवा प्रतिनिधियों ने शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावशाली प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे वर्षों से अपने अधिकारों की बहाली के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा।
इस आंदोलन का नेतृत्व संगठन के महासचिव पी.के. चौरसिया, प्रधान नरेश शर्मा, उप-प्रधान पंकज कुमार, कोषाध्यक्ष अभिषेक वर्मा सहित अन्य पदाधिकारियों ने किया। हॉस्पिटल कमिटी के प्रमुख नेताओं—ओम प्रकाश, राम शुक्ला, संगीत कुमार, अमित तिवारी, राधाबल्लभ कौशिक, मनोज मिश्रा, बृजेश, तरुण और अनिल भला—ने भी सक्रिय भूमिका निभाई।
मुख्य मांगें क्या हैं?
मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव और डीएसएमआरओ यूनियन की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
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चार श्रम संहिताओं (Labour Codes) को वापस लिया जाए — कर्मचारियों का आरोप है कि ये श्रम संहिताएं मजदूर विरोधी हैं और इससे पहले लागू 13 क्षेत्र-विशिष्ट कानूनों के अधिकार कमज़ोर हुए हैं।
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सेल्स प्रमोशन एम्प्लॉइज (कंडीशन ऑफ सर्विस) एक्ट 1976 को पूर्ण रूप से लागू किया जाए — यह कानून मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के अधिकारों की सुरक्षा के लिए बनाया गया था, लेकिन व्यवहार में इसका पालन पूरी तरह नहीं हो रहा।
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अस्पतालों में प्रवेश पर लगी रोक हटाई जाए — कई अस्पतालों में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव की एंट्री पर प्रतिबंध है, जिससे उनके कार्य में बाधा आती है।
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दिल्ली में 8 घंटे का कार्य-दिवस लागू किया जाए — जिसमें 1 घंटा लंच और 1 घंटा पेपरवर्क शामिल हो।
राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक प्रभाव
यह हड़ताल केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रही। पूरे देश में सेल्स प्रमोशन कर्मचारियों ने 100% कामकाज ठप कर आंदोलन का समर्थन किया। FMRAI ने इसे श्रमिक वर्ग की एक ऐतिहासिक एकजुटता बताया और सभी सदस्यों को इस सफलता के लिए बधाई दी।
संगठन के अनुसार, यह आंदोलन “नेशनल प्लेटफॉर्म ऑफ सेंट्रल ट्रेड यूनियन्स” के आह्वान पर आयोजित किया गया था। उनका दावा है कि इस हड़ताल के माध्यम से केंद्र सरकार के श्रम मंत्रालय पर दबाव बनाया गया है, ताकि मजदूर-विरोधी नीतियों को वापस लिया जा सके।
त्रिपुरा में घटना की निंदा
इस बीच, त्रिपुरा की राजधानी अगरतला के आईजीएम अस्पताल में हड़ताल के दौरान कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा प्रदर्शनकारियों पर हमले की खबर सामने आई। बताया गया कि हड़ताल कार्यक्रम के दौरान कुछ लोगों ने प्रदर्शनकारियों को डराने-धमकाने की कोशिश की।
हालांकि, वहां मौजूद कर्मचारियों और आम नागरिकों के शांत लेकिन दृढ़ विरोध के चलते हमलावरों को पीछे हटना पड़ा। FMRAI ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए संबंधित अधिकारियों से दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
आंदोलन का व्यापक संदेश
इस हड़ताल ने यह स्पष्ट कर दिया कि सेल्स प्रमोशन कर्मचारी अपने अधिकारों को लेकर सजग हैं और यदि आवश्यक हुआ तो वे लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे। उनका कहना है कि यह आंदोलन केवल वेतन या समय-सीमा का मुद्दा नहीं, बल्कि सम्मान और सुरक्षा का सवाल है।
FMRAI का मानना है कि इस ऐतिहासिक एकजुटता से सरकार पर सकारात्मक दबाव बनेगा और श्रमिकों के हित में ठोस कदम उठाए जाएंगे।





















