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प्रेमानंद महाराज की वायरल तस्वीर पर संत समाज का फूटा गुस्सा, दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी!

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Mathura: Sant Samaj Slams Premanand Maharaj’s Viral Photo, Warns of Legal Action

वृंदावन में प्रेमानंद महाराज की वायरल फोटो पर संत समाज का रोष, दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

AIN NEWS 1 मथुरा/वृंदावन – वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद संत समाज में भारी नाराज़गी देखने को मिल रही है। संतों का कहना है कि यह तस्वीर ब्रज की परंपरा और धार्मिक आस्थाओं के विरुद्ध है। उन्होंने इसे “निंदनीय और अपमानजनक” बताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है।

गौतम ऋषि आश्रम में संतों की बैठक

गुरुवार को वृंदावन के पंचकोसी परिक्रमा मार्ग स्थित गौतम ऋषि आश्रम में एक विशेष बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का आयोजन चतु संप्रदाय विरक्त वैष्णव परिषद के बैनर तले हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में संत-महंतों ने भाग लिया। बैठक की अध्यक्षता परिषद के अध्यक्ष महंत सनतकुमार दास महाराज ने की।

बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रेमानंद महाराज की वायरल हो रही उस फोटो पर चर्चा करना था, जिसे लेकर पूरे संत समाज में रोष है।

वायरल फोटो को बताया अपमानजनक

संतों ने सामूहिक रूप से इस बात पर जोर दिया कि जो छवि सोशल मीडिया पर फैलाई गई है, वह ब्रज की धार्मिक परंपराओं और श्रद्धा के खिलाफ है। उनका कहना है कि इस तरह की तस्वीरें न केवल संत परंपरा को अपमानित करती हैं, बल्कि लोगों की आस्था को भी ठेस पहुंचाती हैं।

महंत सनतकुमार दास महाराज ने कहा, “जो भी व्यक्ति इस तस्वीर के पीछे है, उसके खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। यदि प्रशासन इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाता, तो संत समाज को खुद आगे आना पड़ेगा।”

केली कुंज आश्रम और शिष्यों को दी चेतावनी

बैठक में केली कुंज आश्रम प्रबंधन और प्रेमानंद महाराज के शिष्यों को भी आड़े हाथों लिया गया। परिषद ने चेतावनी दी कि यदि आश्रम या शिष्य समुदाय ने स्वयं कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई, तो साधु समाज कानूनी और सामाजिक रूप से विरोध करेगा।

बांके बिहारी मंदिर के प्रस्तावित न्यास पर भी आपत्ति

संत समाज ने केवल तस्वीर के विवाद तक ही अपनी बात सीमित नहीं रखी, बल्कि वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में प्रस्तावित नए न्यास (ट्रस्ट) के गठन पर भी आपत्ति जताई।

परिषद के उपाध्यक्ष महंत मोहिनी बिहारी शरण महाराज ने कहा कि, “यह न्यास सेवायतों के पारंपरिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। यदि यह लागू होता है, तो मंदिर की आंतरिक व्यवस्था में बाहरी हस्तक्षेप बढ़ेगा, जो भक्तों और सेवायतों दोनों के लिए घातक होगा।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संत समाज के लिए अस्वीकार्य है और इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।

बैठक में उपस्थित प्रमुख संत-महंत

इस बैठक में ब्रज क्षेत्र के कई प्रमुख संत और महंत शामिल हुए, जिनमें शामिल थे:

महंत लाड़ली शरण दास महाराज

महंत फूलडोल बिहारी दास महाराज

महंत हेमकांत शरण देवाचार्य

घमंड पीठाधीश्वर वेणु गोपाल दास महाराज

वंशीवट पीठाधीश्वर जयराम दास महाराज

सभी ने एक सुर में इस विवाद के प्रति अपनी नाराजगी जताई और ब्रज की सांस्कृतिक गरिमा बनाए रखने पर जोर दिया।

ब्रज की परंपराएं और संतों की भूमिका

ब्रज क्षेत्र हमेशा से भक्ति, सेवा और श्रद्धा की भूमि रहा है। यहां की परंपराएं अत्यंत पवित्र मानी जाती हैं। संत समाज इस विरासत का संरक्षक रहा है। ऐसे में जब कोई संत या आश्रम विवाद में आता है, तो यह न केवल संत समाज की छवि को धूमिल करता है, बल्कि भक्तों के विश्वास को भी आघात पहुंचाता है।

संतों ने अपील की कि समाज में फैली अफवाहों और गलत तस्वीरों से बचा जाए और परंपराओं की मर्यादा को बनाए रखा जाए।

क्या है आगे की राह?

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है। क्या Kelley Kunj आश्रम इस पर पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराता है या नहीं, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। लेकिन इतना तय है कि संत समाज इस बार पीछे हटने के मूड में नहीं है।

प्रेमानंद महाराज की वायरल फोटो और बांके बिहारी मंदिर के प्रस्तावित न्यास को लेकर संत समाज सख्त रुख अपना चुका है। अगर इस मामले में जल्द कोई स्पष्ट कार्रवाई नहीं हुई, तो यह विवाद और गहराने की आशंका है। साथ ही यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं की मर्यादा बनाए रखने की जिम्मेदारी किसकी है—व्यक्ति, संस्था या सरकार की?

A recent viral photo of Premanand Maharaj has caused an uproar in the Sant Samaj of Vrindavan. Respected saints and Mahants have termed the image offensive to the sacred traditions of Braj. At a meeting organized by Chatu Sampraday Virakt Vaishnav Parishad, they demanded strict legal action against those responsible. The saints also opposed the proposed trust formation at the Banke Bihari temple, calling it an intrusion into the traditional rights of sevayats. This controversy is making headlines in Mathura and Vrindavan, raising questions about religious sentiments and temple management.

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