मौनी अमावस्या पर संगम तट पर तनाव: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने स्नान से किया इनकार, शिष्यों से मारपीट का आरोप!

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AIN NEWS 1: मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर प्रयागराज में आयोजित माघ मेले के दौरान उस समय माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया, जब द्वारका पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने संगम में स्नान करने से इनकार कर दिया। यह फैसला उन्होंने उस कथित घटना के बाद लिया, जिसमें उनके शिष्यों के साथ धक्का–मुक्की और मारपीट का आरोप लगाया गया है।

📍 संगम स्नान से पहले बदला माहौल

मौनी अमावस्या को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दिन संगम तट पर करोड़ों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाने पहुंचते हैं। इस बार भी प्रयागराज में आस्था का जनसैलाब उमड़ा हुआ था। देश–विदेश से साधु–संत, अखाड़े और श्रद्धालु संगम स्नान के लिए पहुंचे थे।

इसी क्रम में द्वारका पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी भी अखाड़े से संगम नोज की ओर रवाना हुई। लेकिन बीच रास्ते में ही हालात अचानक बिगड़ गए।

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⚠️ शिष्यों से धक्का–मुक्की का आरोप

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का आरोप है कि जब वे अपने शिष्यों और समर्थकों के साथ संगम की ओर बढ़ रहे थे, तभी उत्तर प्रदेश सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी और सुरक्षाकर्मियों द्वारा उनके शिष्यों के साथ अभद्रता की गई।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनके शिष्यों को रोका गया, धक्का दिया गया और उनके साथ मारपीट की गई। उन्होंने यहां तक आरोप लगाया कि अधिकारियों द्वारा डराने और धमकाने के इशारे भी किए गए।

🗣️ “मेरे शिष्यों को पीटा गया, इसलिए स्नान नहीं करूंगा”

एक प्रमुख न्यूज़ चैनल से बातचीत में शंकराचार्य ने कहा,

“जब मेरे शिष्यों के साथ मारपीट हो रही है, अधिकारी मारने का इशारा कर रहे हैं, तो ऐसे माहौल में मैं कैसे स्नान कर सकता हूं? यह स्नान आस्था और शांति का प्रतीक है, डर और दबाव का नहीं।”

इसी के बाद उन्होंने अपनी पालकी को आगे बढ़ाने के बजाय वापस अखाड़े में लौटाने का फैसला लिया और मौनी अमावस्या का संगम स्नान नहीं किया।

🔄 पालकी लौटने से माघ मेले में हड़कंप

शंकराचार्य द्वारा स्नान से इनकार करने की खबर फैलते ही माघ मेले में अफरा–तफरी का माहौल बन गया। साधु–संतों और श्रद्धालुओं के बीच इस घटना को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। कई लोग इसे संतों के सम्मान से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ लोग प्रशासनिक अव्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।

👮‍♂️ प्रशासन की तैयारी और भीड़ नियंत्रण

मौनी अमावस्या को देखते हुए प्रयागराज प्रशासन पहले से ही अलर्ट मोड पर था। संगम नोज से लेकर पूरे मेला क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। ड्रोन कैमरों, कंट्रोल रूम और सीसीटीवी के जरिए भीड़ पर नजर रखी जा रही थी।

प्रशासन का कहना है कि भीड़ अत्यधिक होने के कारण सुरक्षा व्यवस्था सख्त रखनी पड़ी और इसी दौरान कुछ गलतफहमियां पैदा हुईं। हालांकि, इस पूरे मामले पर प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

🕉️ संत समाज में नाराजगी

इस घटना के बाद संत समाज के एक वर्ग में नाराजगी देखने को मिली। कुछ संतों का कहना है कि प्रशासन को संतों की गरिमा और परंपराओं का विशेष ध्यान रखना चाहिए, खासकर मौनी अमावस्या जैसे पवित्र अवसर पर।

वहीं, कुछ संतों ने संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं आस्था के पर्व की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं।

📌 सवालों के घेरे में व्यवस्था

इस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—

क्या भीड़ नियंत्रण के नाम पर संतों के साथ सख्ती जरूरी थी?

क्या प्रशासन और धार्मिक परंपराओं के बीच समन्वय की कमी है?

क्या ऐसी घटनाएं भविष्य में और बड़े विवाद का कारण बन सकती हैं?

मौनी अमावस्या जैसे महापर्व पर जहां श्रद्धा, शांति और आस्था का वातावरण होना चाहिए था, वहीं शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान से इनकार और शिष्यों से मारपीट के आरोपों ने आयोजन की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजरें प्रशासन की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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