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मिडिल ईस्ट जंग का असर: वैश्विक शेयर बाजार में हाहाकार, निवेशकों के डूबे अरबों डॉलर!

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मिडिल ईस्ट जंग का असर: वैश्विक शेयर बाजार में हाहाकार, निवेशकों के डूबे अरबों डॉलर

AIN NEWS 1: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और जंग का असर अब सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका सीधा प्रभाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल रहा है। बीते तीन हफ्तों में हालात लगातार बिगड़ते गए हैं और इसका सबसे बड़ा झटका शेयर बाजारों को लगा है। अमेरिका से लेकर एशिया और भारत तक, हर जगह निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

अमेरिकी शेयर बाजार की बात करें तो यहां करीब 1 ट्रिलियन डॉलर की भारी गिरावट दर्ज की गई है। यह गिरावट सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे निवेशकों की चिंता और अनिश्चितता साफ नजर आती है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिका का रुख भी काफी सख्त हो गया है, जहां वह इजरायल का समर्थन कर रहा है। दूसरी तरफ ईरान लगातार पलटवार और बदले की बात कर रहा है, जिससे हालात और ज्यादा गंभीर बनते जा रहे हैं।

युद्ध जैसे हालात में सबसे पहले असर आर्थिक गतिविधियों पर पड़ता है। निवेशक सुरक्षित विकल्पों की तरफ भागते हैं और शेयर बाजार में बिकवाली बढ़ जाती है। यही वजह है कि अमेरिकी बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली है।

एशियाई बाजार भी इस संकट से अछूते नहीं रहे हैं। जापान का शेयर बाजार इस समय सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में शामिल है। यहां के प्रमुख इंडेक्स में 12 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। खासकर निक्केई 225 इंडेक्स में आई गिरावट ने निवेशकों को बड़ा झटका दिया है। अनुमान है कि इस गिरावट के चलते जापान के बाजार से 60 से 70 लाख करोड़ रुपये तक की संपत्ति साफ हो चुकी है।

भारत की बात करें तो यहां भी हालात कम गंभीर नहीं हैं। सोमवार को शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली। प्रमुख सूचकांक निफ्टी 22500 के स्तर से नीचे फिसल गया, जबकि सेंसेक्स में भी भारी गिरावट दर्ज की गई। एक ही दिन में करीब 2.5 फीसदी की गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

अगर पिछले तीन हफ्तों का आंकड़ा देखें तो भारतीय बाजार में करीब 12 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। यह गिरावट बताती है कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर सीधे भारतीय बाजार पर भी पड़ रहा है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितता के चलते बाजार लगातार दबाव में है।

इस साल जनवरी में निफ्टी ने 26,373 अंकों का रिकॉर्ड स्तर छुआ था। उस समय बाजार में काफी उत्साह था और निवेशकों को अच्छे रिटर्न की उम्मीद थी। लेकिन मौजूदा हालात ने पूरी तस्वीर बदल दी है। अब निफ्टी अपने उच्चतम स्तर से करीब 15 फीसदी नीचे आ चुका है।

इस गिरावट का सबसे ज्यादा असर रिटेल निवेशकों पर पड़ा है। बड़े निवेशक जहां अपने पोर्टफोलियो को मैनेज कर लेते हैं, वहीं छोटे निवेशकों के लिए यह समय काफी मुश्किल भरा होता है। जब इंडेक्स 15 फीसदी गिरता है तो आम निवेशकों का पोर्टफोलियो 25 से 30 फीसदी तक नीचे चला जाता है।

बाजार में इस तरह की गिरावट से घबराहट का माहौल बन जाता है। निवेशक जल्दबाजी में अपने शेयर बेचने लगते हैं, जिससे गिरावट और तेज हो जाती है। यही वजह है कि मौजूदा हालात को लेकर विशेषज्ञ भी सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।

कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट में चल रही जंग का असर अब वैश्विक स्तर पर साफ दिखाई दे रहा है। अमेरिका, जापान और भारत जैसे बड़े बाजार भी इससे अछूते नहीं हैं। जब तक क्षेत्र में तनाव कम नहीं होता, तब तक बाजार में स्थिरता की उम्मीद करना मुश्किल नजर आ रहा है।

The ongoing Middle East war has triggered a global market crash, causing massive losses in major economies. The US stock market has reportedly lost over $1 trillion, while Asian markets including Japan’s Nikkei have seen sharp declines. In India, the Nifty falling below 22500 and Sensex crash have created panic among investors. This stock market decline highlights the economic impact of war and rising geopolitical tensions on global financial stability

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