AIN NEWS 1: पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मेरठ के शताब्दीनगर में आयोजित नमो भारत रैपिड रेल और मेट्रो परियोजना के शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान एक ऐसा राजनीतिक दृश्य देखने को मिला, जिसने आने वाले समय के चुनावी समीकरणों को लेकर चर्चाओं को और गर्म कर दिया है।
इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी को मंच पर अपने पास बैठाकर एक मजबूत राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की। यह दृश्य सिर्फ एक औपचारिकता नहीं था, बल्कि इसे पश्चिम यूपी की राजनीति में बदलते समीकरणों के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
मंच पर दिखी नई राजनीतिक केमिस्ट्री
कार्यक्रम के दौरान मंच पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। लेकिन जिस तरह से जयंत चौधरी को प्रधानमंत्री के साथ प्रमुखता से स्थान दिया गया, उसने राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ मंच साझा करने का मामला नहीं था, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान और जाट मतदाताओं को साधने की एक रणनीतिक कोशिश का हिस्सा हो सकता है। गौरतलब है कि इस क्षेत्र में जाट समुदाय लंबे समय से चुनावी राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाता रहा है।
चौधरी चरण सिंह का जिक्र और किसान संदेश
अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने किसानों के हित में किए गए उनके योगदान की सराहना करते हुए उन्हें भारत रत्न दिए जाने का भी जिक्र किया।
जैसे ही प्रधानमंत्री ने चौधरी चरण सिंह का नाम लिया, कार्यक्रम में मौजूद किसानों और रालोद कार्यकर्ताओं ने जोरदार नारेबाजी की। इससे साफ संकेत मिला कि पश्चिम यूपी में आज भी किसान राजनीति का असर उतना ही मजबूत है, जितना पहले हुआ करता था।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि चौधरी चरण सिंह का बार-बार जिक्र कर भाजपा ने किसान समुदाय के बीच एक सकारात्मक संदेश देने की कोशिश की है, जो आने वाले विधानसभा चुनावों में अहम साबित हो सकता है।
नाम लेकर किया विशेष उल्लेख
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन के दौरान मंच पर मौजूद कई जनप्रतिनिधियों का नाम नहीं लिया। इनमें सांसद अरुण गोविल सहित कई विधायक और विधान परिषद सदस्य शामिल थे। लेकिन उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी का नाम विशेष रूप से लिया।
राजनीतिक हलकों में इसे एक महत्वपूर्ण संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे भाजपा और रालोद के बीच बढ़ते तालमेल का संदेश देने की कोशिश की गई है।
जयंत चौधरी को नहीं मिला भाषण का मौका
हालांकि जयंत चौधरी पूरे कार्यक्रम के दौरान मंच पर मौजूद रहे, लेकिन उन्हें संबोधन का अवसर नहीं दिया गया। इससे उनके समर्थकों में हल्की नाराजगी देखने को मिली। कई लोगों का मानना था कि उन्हें बोलने का मौका मिलना चाहिए था।
इसके बावजूद उनकी मंच पर मौजूदगी को भाजपा और रालोद के बीच मजबूत होते राजनीतिक रिश्तों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
2027 चुनाव से पहले बदलते समीकरण
मेरठ की इस जनसभा ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पश्चिम यूपी की भूमिका बेहद अहम रहने वाली है। किसान और जाट वोट बैंक इस क्षेत्र में किसी भी राजनीतिक दल की जीत या हार तय करने की क्षमता रखते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा जयंत चौधरी को दी गई अहमियत और चौधरी चरण सिंह का जिक्र यह दर्शाता है कि भाजपा पहले से ही पश्चिम यूपी में अपने चुनावी समीकरण मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह मंच साझेदारी आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति में बड़े बदलावों का संकेत हो सकती है। अब देखना यह होगा कि यह राजनीतिक समीकरण चुनावी नतीजों में कितना असर डाल पाता है।
Prime Minister Narendra Modi’s public appearance with RLD chief Jayant Chaudhary during the Namo Bharat Rapid Rail and Metro project launch in Meerut has triggered major political discussions in Western Uttar Pradesh. The visual optics of BJP and RLD leadership sharing the stage is being interpreted as a strategic move to consolidate the Jat and farmer vote bank ahead of the 2027 Uttar Pradesh Assembly Elections. Modi’s repeated mention of former Prime Minister Chaudhary Charan Singh further highlights the BJP’s outreach towards agrarian communities in West UP.


















