AIN NEWS 1: मोदीनगर क्षेत्र में फर्जी पासपोर्ट बनाने के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि भोजपुर और त्योड़ी थाना क्षेत्र के पते का दुरुपयोग कर कुल 22 फर्जी पासपोर्ट जारी करवा लिए गए। इस पूरे मामले में पुलिस सत्यापन प्रक्रिया की गंभीर लापरवाही उजागर हुई है, जिसके चलते एक सिपाही को निलंबित कर दिया गया है, जबकि एक दरोगा समेत अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी गई है।

यह खुलासा तब हुआ जब दिल्ली स्थित क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय (RPO) ने गाजियाबाद पुलिस को पत्र भेजकर कुछ संदिग्ध पासपोर्ट पतों की जांच कराने को कहा। जांच रिपोर्ट में पाया गया कि एक ही मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कर अलग-अलग नामों पर पासपोर्ट जारी किए गए थे, जो अपने-आप में संदेह पैदा करने वाला था।
📌 कैसे सामने आया फर्जीवाड़ा?
11 दिसंबर 2025 को दिल्ली के क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय ने थाना भोजपुर को पत्र भेजकर 22 पासपोर्ट के पतों की पुष्टि कराने के निर्देश दिए। जब पुलिस ने कागजों पर दर्ज पतों की वास्तविकता जांची, तो पता चला कि जिन लोगों के नाम पर पासपोर्ट बने थे, वे उन पतों पर रहते ही नहीं थे।
जांच में यह भी सामने आया कि ये सभी पासपोर्ट सैदपुर, त्योड़ी 7 विस्बा और भोजपुर गांव के पते पर दिखाए गए थे। खास बात यह रही कि सभी आवेदनों में संपर्क के लिए एक ही मोबाइल नंबर दर्ज था।
🚨 पुलिस सत्यापन में भारी चूक
मामले की जांच जब आगे बढ़ी तो सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया कि पासपोर्ट सत्यापन के दौरान पुलिस ने अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई। आरोप है कि जिन पुलिसकर्मियों को मौके पर जाकर पते की जांच करनी थी, उन्होंने बिना स्थल पर गए ही थाने से रिपोर्ट भेज दी।
भोजपुर थाने में तैनात एक दरोगा और दो सिपाहियों की भूमिका को संदिग्ध माना जा रहा है। अगर समय रहते पते का भौतिक सत्यापन किया गया होता, तो यह फर्जीवाड़ा शुरुआती स्तर पर ही पकड़ा जा सकता था।
👮♂️ सिपाही निलंबित, विभागीय जांच तेज
लापरवाही बरतने के आरोप में डाक मुंशी सिपाही दीपक कुमार को निलंबित कर दिया गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मामला सामने आने के बाद से दीपक कुमार का मोबाइल बंद है और वह फिलहाल फरार बताया जा रहा है।
इसके अलावा, पिछले एक साल में भोजपुर थाने में जिन-जिन पुलिसकर्मियों को पासपोर्ट सत्यापन का जिम्मा दिया गया था, उनके मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) भी खंगाले जा रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किसी तरह की मिलीभगत तो नहीं थी।
🧾 पोस्टमैन की भूमिका ने खोले कई राज
जांच के दौरान एक और अहम कड़ी सामने आई—पोस्टमैन अरुण कुमार। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की, जिसके बाद पूरे रैकेट की परतें खुलने लगीं।
अरुण कुमार ने बताया कि करीब पांच महीने पहले विवेक गांधी और प्रकाश सुब्बा नाम के दो युवक उसके संपर्क में आए थे। उन्होंने कहा था कि भोजपुर और त्योड़ी के पते पर आने वाले पासपोर्ट लाभार्थियों को न देकर सीधे उन्हें सौंप दिए जाएं। इसके बदले प्रति पासपोर्ट दो हजार रुपये देने का लालच दिया गया।
पैसों के लालच में आकर पोस्टमैन ने सभी पासपोर्ट आरोपियों को सौंप दिए, जिससे यह फर्जीवाड़ा और गहराता चला गया।
👥 अब तक पांच आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में अब तक पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें शामिल हैं—
विवेक गांधी
प्रकाश सुब्बा
पोस्टमैन अरुण कुमार
अमनदीप सिंह
सावंतकौर
सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, जबकि अन्य फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस की पांच टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
🛂 इन नामों पर बने फर्जी पासपोर्ट
जांच में सामने आया कि कुल 22 फर्जी पासपोर्ट अलग-अलग नामों पर बनवाए गए, जिनमें प्रमुख नाम हैं—
अमनप्रीत कौर, जसप्रीत कौर, रितु शर्मा, मेधना राणा, रामकुमारी, दलजीत सिंह, मोहिंद्र कौर, यशोदा राय, बसंती राय, जीत कौर, शमशेर सिंह, कमलजीत कौर, इंद्र सिंह, बलविंद्र सिंह, मनजीत सिंह, रजमीत सिंह, तरनजीत कौर, सिमरन कौर, जगलीन कौर, गुरनूर कौर, जसकरण सिंह और जपमैहर कौर।
सभी पासपोर्ट फर्जी दस्तावेजों के आधार पर तैयार कराए गए थे।
🗣️ पुलिस अधिकारियों का बयान
डीसीपी ग्रामीण सुरेंद्र नाथ तिवारी ने बताया कि पासपोर्ट सत्यापन से जुड़े सभी पुलिसकर्मियों की पहचान की जा रही है। लापरवाही सामने आने पर सिपाही दीपक कुमार को निलंबित किया गया है। यदि अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका उजागर होती है, तो उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
वहीं एसीपी मोदीनगर अमित सक्सेना ने कहा कि गिरफ्तार सभी आरोपियों का चालान कर दिया गया है और फरार लोगों की तलाश जारी है। इस पूरे मामले में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
A major fake passport case has been exposed in Modinagar, Ghaziabad, where 22 passports were fraudulently issued using forged documents and fake addresses. The investigation revealed serious police verification negligence, leading to the suspension of a police constable and departmental inquiries against other officials. The Modinagar fake passport racket also involved a postman and multiple intermediaries, highlighting critical loopholes in the passport verification system in India.







