AIN NEWS 1 गाज़ियाबाद/मोदीनगर: मोदीनगर के सब रजिस्ट्रार कार्यालय में निजी व्यक्ति के जरिए सरकारी दस्तावेजों का काम करवाया जा रहा है, जिससे अधिवक्ताओं में भारी नाराजगी है। वकीलों का आरोप है कि वर्षों से कार्यालय में कार्यरत विकास शर्मा नामक निजी युवक भ्रष्टाचार के जरिए भारी संपत्ति बना चुका है, और रजिस्ट्री ऑफिस में गैरकानूनी तरीके से लोगों से अवैध वसूली करता है।
कौन है विकास शर्मा और क्या हैं आरोप?
जानकारी के अनुसार, विकास शर्मा बीते 10 सालों से रजिस्ट्री कार्यालय में स्कैनिंग का कार्य कर रहा है। हालांकि वह न तो कोई सरकारी कर्मचारी है, न ही संविदा कर्मी। बावजूद इसके, उसे ऑफिस में महत्वपूर्ण दस्तावेजों से जुड़ा काम सौंपा गया है।
वकीलों का आरोप है कि वह जानबूझकर लोगों के दस्तावेजों में गलतियां निकालता है और फिर समाधान के नाम पर मोटी रकम वसूलता है। कई लोगों ने यह भी कहा कि पैसे न देने पर वह फाइलों को आगे नहीं बढ़ने देता। इससे परेशान होकर अधिवक्ताओं ने एक हफ्ते पहले सब रजिस्ट्रार को शिकायत पत्र दिया और विकास को हटाने की मांग की।
शिकायत के बावजूद कार्यवाही नहीं, बढ़ा आक्रोश
शिकायत के बाद रजिस्ट्रार कार्यालय ने विकास को हटाने का आश्वासन दिया, लेकिन अब तक उसे ऑफिस से नहीं निकाला गया है। उल्टा, शिकायत के बावजूद उसी से सरकारी काम कराए जा रहे हैं। इस बात का वीडियो सबूत भी अधिवक्ताओं के पास है।
आज, वकीलों का गुस्सा सब रजिस्ट्रार पर फूट पड़ा। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि विकास को जल्द नहीं हटाया गया, तो वे तहसील में धरना-प्रदर्शन करेंगे।
प्रशासनिक मिलीभगत और यूपी सरकार के आदेश की अवहेलना?
वकीलों ने सवाल उठाया है कि एक निजी युवक, जो किसी सरकारी सेवा में नहीं है, आखिर उसे किस लालच में अब तक ऑफिस में बनाए रखा गया है? इससे पहले भी विकास शर्मा के खिलाफ कई शिकायतें दर्ज हुईं, लेकिन उसका कोई असर नहीं पड़ा।
अधिवक्ताओं का मानना है कि रजिस्ट्रार और विकास के बीच सांठगांठ है और दोनों मिलकर अवैध कमाई कर रहे हैं। यूपी सरकार का स्पष्ट आदेश है कि किसी भी निजी व्यक्ति को सरकारी कार्यालयों में काम नहीं करने दिया जाएगा।
अब देखना यह है कि क्या इस बार अधिवक्ताओं की भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई रंग लाती है या फिर एक बार फिर विकास शर्मा सिस्टम के संरक्षण में बच निकलता है?
In Modinagar, Uttar Pradesh, lawyers have raised serious allegations against a private individual, Vikas Sharma, working illegally inside the sub-registrar office. Despite government orders banning private staff in such roles, Sharma allegedly handles sensitive documents, demands bribes, and manipulates paperwork. Lawyers are now threatening protests if he is not removed, questioning the role of the sub-registrar in supporting such corruption.



















