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बकरीद 2025 से पहले मोरक्को में कुर्बानी पर पाबंदी, छापेमारी से जनता में उबाल!

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Morocco Bans Eid al-Adha Animal Sacrifice in 2025, Sparks National Outrage

मोरक्को में बकरीद पर कुर्बानी पर रोक, घर-घर छापेमारी से जनता में आक्रोश

AIN NEWS 1: ईद-उल-अजहा (बकरीद) मुसलमानों के लिए एक प्रमुख धार्मिक पर्व है जिसमें जानवरों की कुर्बानी एक प्रमुख परंपरा मानी जाती है। लेकिन 2025 में मुस्लिम देश मोरक्को में इस परंपरा पर अचानक रोक लगा दी गई है, जिससे पूरे देश में विवाद और आक्रोश फैल गया है।

राजा का आदेश और उसका कारण

मोरक्को के राजा मोहम्मद VI ने एक शाही फरमान के जरिए ऐलान किया कि इस साल आम जनता को कुर्बानी की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि वे खुद ही पूरे देश की तरफ से कुर्बानी देंगे। इसके पीछे उन्होंने “आर्थिक और स्वास्थ्य कारणों” का हवाला दिया है।

राजा के इस फैसले का तात्पर्य यह था कि देश की बिगड़ती आर्थिक स्थिति और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के कारण वे चाहते हैं कि आम लोग इस बार जानवरों की कुर्बानी न करें। उन्होंने लोगों से संयम बरतने और सामाजिक एकता बनाए रखने की अपील की।

पूरे देश में छापेमारी

राजा के आदेश के तुरंत बाद ही मोरक्को की पुलिस ने विभिन्न शहरों और गांवों में छापेमारी शुरू कर दी। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा गया कि सुरक्षाबल घर-घर जाकर बकरे जब्त कर रहे हैं।

इन वीडियो में लोगों को रोते और पुलिस से बहस करते हुए भी देखा गया है। कई लोगों का आरोप है कि पुलिस ने जबरदस्ती उनके पालतू जानवर तक उठा लिए।

जनता का गुस्सा

इस फैसले से मोरक्को की जनता में भारी आक्रोश है। सोशल मीडिया पर #SaveOurSacrifice जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।

लोगों का कहना है कि यह फैसला न केवल धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है, बल्कि सरकार की विफलताओं को छुपाने की एक साजिश भी है। कई लोगों ने इसे “धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़” और “इस्लामिक परंपरा का अपमान” करार दिया है।

धार्मिक नेताओं की प्रतिक्रिया

देश के इस्लामी विद्वानों और धार्मिक नेताओं ने सरकार की इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि ईद-उल-अजहा पर कुर्बानी एक धार्मिक कर्तव्य है, जिसे कोई सरकार नहीं रोक सकती।

उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि यदि यह फैसला वापस नहीं लिया गया, तो इससे देश में धार्मिक असंतोष और अशांति बढ़ सकती है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

कुछ विपक्षी दलों ने भी इस फैसले की निंदा की है। उनका कहना है कि सरकार महंगाई, बेरोजगारी और खाद्य संकट जैसे मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए धार्मिक मामलों में दखल दे रही है।

इस फैसले को लेकर संसद में भी बहस की संभावना है, क्योंकि यह पहली बार है जब मोरक्को जैसे मुस्लिम देश में बकरीद की कुर्बानी पर रोक लगाई गई है।

सरकार की सफाई

सरकार का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह अस्थायी है और इस साल की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। उनका कहना है कि देश में मांस की भारी कमी, बकरों की बढ़ती कीमत और स्वास्थ्य आपात स्थिति को देखते हुए यह कदम उठाना पड़ा.

बकरीद जैसे धार्मिक अवसर पर इस तरह की रोक न केवल जनता के आस्था को ठेस पहुंचाती है, बल्कि यह एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक विवाद को भी जन्म देती है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि क्या मोरक्को सरकार अपने इस फैसले पर कायम रहती है या जनता के दबाव में कोई संशोधन करती है।

Morocco has sparked global attention by banning animal sacrifice during Eid al-Adha 2025. King Mohammed VI cited economic and health reasons for this controversial decision, stating he will perform the sacrifice on behalf of the nation. The Morocco Eid al-Adha ban has triggered public outrage, police raids, and criticism from Islamic scholars, raising concerns about religious freedom and state control. This Eid 2025 controversy in a Muslim-majority country has become a major topic in international and Islamic discourse.

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