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पश्चिम बंगाल हाईकोर्ट से शर्मिष्ठा पनौली को बड़ी राहत, सभी FIRs पर रोक और मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने का आदेश!

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Date:

West Bengal High Court Grants Relief to Sharmishtha Panoli, Stays Multiple FIRs

शर्मिष्ठा पनौली को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, सभी FIRs पर रोक, एक मामले में अगली सुनवाई 5 जून को

AIN NEWS 1 कोलकाता, पश्चिम बंगाल: शर्मिष्ठा पनौली के पक्ष में मंगलवार को एक अहम कानूनी फैसला आया है। हाईकोर्ट में उनके वकील मोहम्मद समीमुद्दीन ने एक रिट याचिका दायर की थी, जिसमें जमानत की मांग भी की गई थी। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज सभी अन्य एफआईआर पर रोक लगा दी है, सिर्फ ‘गार्डन रीच पुलिस स्टेशन’ के मामले को छोड़कर।

हाईकोर्ट की कार्यवाही का संक्षिप्त विवरण

मोहम्मद समीमुद्दीन ने बताया कि, “हमने आज हाईकोर्ट में एक रिट आवेदन दायर किया जिसमें हमने आग्रह किया कि शर्मिष्ठा पनौली को जमानत दी जाए। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और फिर आदेश दिया कि इस मामले से संबंधित केस डायरी को 5 जून, यानी न्यायालय की अगली खुली तिथि पर प्रस्तुत किया जाए।”

यह तारीख अदालत की छुट्टी के बाद की पहली कार्यदिवस है। कोर्ट ने इस दिन सुनवाई को अगली तारीख तय करते हुए सभी अन्य मामलों पर स्थगन (stay) जारी कर दिया।

सभी एफआईआर पर रोक, एक केस में ही कार्रवाई जारी

कोर्ट ने स्पष्ट रूप से आदेश दिया कि शर्मिष्ठा के खिलाफ दर्ज बाकी सभी एफआईआर पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाती है। साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिया गया कि वह शर्मिष्ठा के खिलाफ कोई नया मुकदमा दर्ज न करे, जब तक कि वह मामला ‘गार्डन रीच पुलिस स्टेशन’ से संबंधित न हो।

यह आदेश शर्मिष्ठा को कानूनी राहत प्रदान करता है, और यह सुनिश्चित करता है कि उन्हें बार-बार नए मामलों में न फंसाया जाए।

जेल में मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने का निर्देश

कोर्ट ने जेल प्रशासन यानी सुधारगृह अधीक्षक को भी निर्देशित किया है कि शर्मिष्ठा को हिरासत में रहते हुए सभी आवश्यक और मूलभूत सुविधाएं प्रदान की जाएं। इसमें शुद्ध जल, भोजन, दवा, रहने की उचित व्यवस्था, और अन्य ज़रूरी मानवीय सुविधाएं शामिल हैं।

कोर्ट का यह आदेश विशेष रूप से संवेदनशील है क्योंकि अक्सर जेलों में बंद महिलाओं को बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल पातीं। कोर्ट का यह निर्णय मानवाधिकारों की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

शर्मिष्ठा का मामला क्यों है अहम?

शर्मिष्ठा पनौली का मामला हाल के दिनों में काफी सुर्खियों में रहा है। उन पर एक से अधिक एफआईआर दर्ज की गई थीं, जिनमें कथित तौर पर भड़काऊ भाषण, अफवाह फैलाने, और सामाजिक शांति भंग करने के आरोप शामिल थे। हालांकि, उनके वकील का दावा है कि यह सब एक राजनीतिक साजिश के तहत किया गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि शर्मिष्ठा के खिलाफ कई एफआईआर एक ही घटनाक्रम के आधार पर दर्ज की गई थीं, जो कि कानूनन उचित नहीं है।

अगली सुनवाई 5 जून को

अब यह मामला हाईकोर्ट द्वारा 5 जून को अगली सुनवाई के लिए निर्धारित किया गया है। उस दिन पुलिस द्वारा केस डायरी पेश की जाएगी और कोर्ट उस पर विचार करेगी कि क्या उन्हें जमानत दी जानी चाहिए या नहीं।

वकील की प्रतिक्रिया

शर्मिष्ठा पनौली के अधिवक्ता मोहम्मद समीमुद्दीन ने कहा, “हमें उम्मीद है कि अगली सुनवाई में कोर्ट हमें और राहत देगी। हमने स्पष्ट रूप से कोर्ट के सामने सारे तथ्यों को रखा है और हमारी दलीलें मजबूत हैं।”

शर्मिष्ठा पनौली को पश्चिम बंगाल हाईकोर्ट से मिली यह राहत न केवल उनके लिए बल्कि उनके समर्थकों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के लिए भी एक बड़ी जीत मानी जा रही है। कोर्ट ने कानून का पालन करते हुए यह सुनिश्चित किया कि एक व्यक्ति को एक ही आरोप में बार-बार परेशान न किया जाए। अब नजरें 5 जून की सुनवाई पर टिकी हैं, जब यह तय होगा कि शर्मिष्ठा को जमानत मिलेगी या नहीं।

Sharmishtha Panoli has received significant legal relief from the West Bengal High Court. The court has stayed all FIRs registered against her, except for the Garden Reach Police Station case. Her bail plea was heard, and the matter has been posted for further hearing on June 5. The court also directed the Correctional Home Superintendent to provide basic amenities to her during custody. This development marks a critical turn in the legal proceedings surrounding Sharmishtha Panoli in Kolkata, West Bengal.

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