AIN NEWS 1 मुंबई: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को मुंबई के शिवाजी पार्क में 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती के दिन प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए पुलिस की अनुमति नहीं मिली है। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली तथा वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर किया जाना था। अनुमति नहीं मिलने के बाद CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने मुंबई में जेल भरो आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है।
मुंबई पुलिस की ओर से 27 सितंबर को जारी जवाब में शिवाजी पार्क में प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने के पीछे कई कारण बताए गए। पुलिस के मुताबिक, हाईकोर्ट के आदेश और महाराष्ट्र सरकार के बाद के निर्देशों के तहत शिवाजी पार्क में इस तरह के आयोजन की अनुमति देने का अधिकार पुलिस के पास नहीं है। इसके अलावा आयोजकों की ओर से मैदान के इस्तेमाल के लिए जरूरी BMC अनुमति भी प्रस्तुत नहीं की गई थी।
पुलिस ने यह भी कहा कि शिवाजी पार्क साइलेंस जोन में आता है और इसके आसपास रिहायशी इलाका है। बड़े प्रदर्शन से शोर और यातायात से जुड़ी समस्या पैदा हो सकती है। अधिकारियों ने आसपास के अस्पतालों तक आपातकालीन वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका भी जताई है। पुलिस ने CJP को मुंबई में किसी दूसरे स्थान का विकल्प तलाशकर वहां के लिए नए सिरे से आवेदन करने की सलाह दी है।
अनुमति नहीं मिली तो जेल भरो आंदोलन का ऐलान
CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने पुलिस के फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि प्रदर्शन के अधिकार से वंचित किए जाने की स्थिति में उनकी पार्टी गांधी जयंती के दिन मुंबई में जेल भरो आंदोलन शुरू करेगी। इससे पहले पार्टी ने 2 अक्टूबर से मुंबई से अपना व्यापक आंदोलन शुरू करने की बात कही थी।
CJP का आंदोलन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयोग के कामकाज और SIR प्रक्रिया से जुड़े सवालों को लेकर है। पार्टी की ओर से आयोग में सुधार, SIR को लेकर पुनर्विचार और वोटर लिस्ट से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
24 सितंबर को CJP ने दिया था 48 घंटे का अल्टीमेटम
इस विवाद की शुरुआत में 24 सितंबर को CJP ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी। पार्टी ने दावा किया था कि अगर 48 घंटे में इस्तीफा नहीं दिया गया तो देशभर में आंदोलन शुरू किया जाएगा।
CJP ने SIR के कारण बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर होने का मुद्दा उठाया। पार्टी ने इसे लेकर चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग की है। हालांकि, CJP की ओर से लगाए गए कई राजनीतिक आरोपों और अलग-अलग नेताओं के निर्वाचन क्षेत्रों में कथित तौर पर वोट हटाए जाने के दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं होती है। इसलिए इन दावों को तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है।
SIR को लेकर क्या है पूरा विवाद?
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR चुनाव आयोग की मतदाता सूची के व्यापक सत्यापन की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची में मौजूद नामों का सत्यापन करना, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं की पहचान करना तथा पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ना है।
2026 में SIR के विभिन्न चरणों के दौरान 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों में लगभग 13.37 करोड़ नाम कम हुए। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक यह संख्या प्री-SIR मतदाता संख्या का करीब 14.1 प्रतिशत थी। हालांकि, ड्राफ्ट सूची से नाम कम होना अपने आप में अंतिम रूप से मतदान का अधिकार समाप्त होना नहीं है। पात्र व्यक्ति दावा और आपत्ति की प्रक्रिया के जरिए अपना नाम दोबारा शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
दिल्ली और महाराष्ट्र की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के आंकड़ों ने भी इस मुद्दे को चर्चा में ला दिया। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में प्री-SIR करीब 1.45 करोड़ मतदाताओं की संख्या घटकर ड्राफ्ट सूची में लगभग 97.53 लाख रह गई, जबकि महाराष्ट्र में यह संख्या 9.78 करोड़ से घटकर करीब 7.71 करोड़ हुई।
दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों से बढ़ा विवाद
SIR को लेकर विवाद उस समय और बढ़ गया जब इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों और आदेशों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें नए मतदाताओं को जोड़ने, मतदाता सूची से नाम हटाने और चुनाव आयोग के डिजिटल सिस्टम तक पहुंच जैसे मुद्दे शामिल थे।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ कदमों को अपनी जानकारी के बिना लिए जाने पर सवाल उठाए और मतदाता डेटाबेस से जुड़े अधिकारों के केंद्रीकरण को लेकर चिंता जताई।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों के बाद अपना पक्ष स्पष्ट किया। आयोग ने कहा कि SIR से संबंधित आदेश तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से जारी हुए थे। आयोग के अनुसार, संधू और जोशी की ओर से कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र किसी नीति संबंधी फैसले या आयोग के IT विभाग से संबंधित नहीं थे, बल्कि प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी के कामकाज से जुड़े थे।
इस तरह SIR को लेकर दो अलग-अलग पक्ष सामने हैं। एक तरफ मीडिया रिपोर्टों में दो चुनाव आयुक्तों की लिखित आपत्तियों का उल्लेख है, वहीं चुनाव आयोग ने कहा है कि SIR के फैसले तीनों आयुक्तों की सहमति से लिए गए थे।
Form-6 को लेकर भी सवाल
नए मतदाताओं को वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए Form-6 का इस्तेमाल किया जाता है। SIR के दौरान इससे जुड़े अतिरिक्त घोषणा-पत्र को लेकर भी विवाद सामने आया।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, SIR से जुड़े आवेदन में नए मतदाताओं से उनके या उनके माता-पिता/दादा-दादी के पुराने SIR रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी मांगे जाने पर सवाल उठे।
चुनाव आयोग ने इस पर कहा कि Form-6 में मूल बदलाव नहीं किया गया है, बल्कि SIR से संबंधित अतिरिक्त Annexure-D घोषणा लागू की गई है। आयोग ने यह भी कहा कि संबंधित प्रावधान को सुप्रीम कोर्ट के सामने चुनौती दी गई थी और अदालत ने इसे बरकरार रखा है।
ECINET की जांच के लिए समिति बनी
विवाद के बीच चुनाव आयोग ने अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म ECINET की समीक्षा के लिए एक समिति बनाने का फैसला किया है। आयोग के मुताबिक समिति की अध्यक्षता एक वरिष्ठ डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर करेंगे और इसमें IIT या IIIT का एक स्वतंत्र विशेषज्ञ भी शामिल होगा।
समिति यह देखेगी कि ECINET की कार्यप्रणाली संबंधित कानूनों और नियमों के अनुरूप है या नहीं। आयोग ने यह भी कहा है कि फील्ड अधिकारियों को उनके वैधानिक अधिकारों के अनुसार भूमिका-आधारित पहुंच उपलब्ध है।
अब 2 अक्टूबर पर सबकी नजर
मुंबई पुलिस से अनुमति नहीं मिलने के बाद CJP ने आंदोलन को लेकर अपना रुख और स्पष्ट कर दिया है। पार्टी की ओर से कहा गया है कि अगर प्रदर्शन के अधिकार पर रोक जारी रही तो 2 अक्टूबर को जेल भरो आंदोलन किया जाएगा।
फिलहाल पुलिस ने CJP को मुंबई में किसी वैकल्पिक स्थान पर प्रदर्शन के लिए आवेदन करने का विकल्प दिया है। ऐसे में अब यह देखना होगा कि पार्टी किसी दूसरे स्थान के लिए अनुमति मांगती है या शिवाजी पार्क में प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर आगे कोई कानूनी या प्रशासनिक कदम उठाती है।
SIR को लेकर देशभर में जारी बहस के बीच यह मामला चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के पुनरीक्षण, नए मतदाताओं के पंजीकरण और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़े सवालों को भी सामने ला रहा है। इस पूरे विवाद में CJP और अन्य आलोचकों के आरोपों के साथ-साथ चुनाव आयोग की ओर से दी गई सफाई को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
The Cockroach Janata Party (CJP) has announced a Jail Bharo Andolan in Mumbai after Mumbai Police denied permission for its October 2 protest at Shivaji Park against Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar and the Election Commission of India. The controversy is linked to the Special Intensive Revision (SIR) of electoral rolls, which has resulted in more than 13 crore names being left out of draft voter lists across 30 States and Union Territories. The Election Commission has defended the SIR process, clarified the Form 6 issue and announced a review committee for ECINET, while reports have highlighted objections raised by Election Commissioners Sukhbir Singh Sandhu and Vivek Joshi.



















