AIN NEWS 1: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से पुलिस विभाग को शर्मसार करने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। सदर थाना क्षेत्र में तैनात दारोगा भास्कर कुमार मिश्रा को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने एक आपराधिक मामले से किसी व्यक्ति का नाम हटाने के बदले पैसे की मांग की थी। इस मामले के सामने आने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) कांतेश कुमार मिश्रा ने तत्काल प्रभाव से आरोपी दारोगा को निलंबित कर दिया है।
रिश्वत की डील कैसे हुई?
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सदर थाने में दर्ज एक मामले में नाम हटाने के लिए दारोगा भास्कर कुमार मिश्रा द्वारा ₹50,000 की रिश्वत मांगी गई थी। पीड़ित पक्ष ने जब इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थता जताई, तो दोनों के बीच बातचीत के बाद ₹30,000 में सौदा तय हुआ। तय हुआ कि यह राशि दो किस्तों में दी जाएगी।
इसी समझौते के तहत पहली किस्त के रूप में ₹15,000 देने की बात तय हुई थी। जैसे ही आरोपी दारोगा ने पहली किस्त के तौर पर ₹15,000 की रकम ली, उसी दौरान उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया गया।
रंगे हाथों गिरफ्तारी से मचा हड़कंप
दारोगा की गिरफ्तारी की खबर मिलते ही मुजफ्फरपुर जिले के पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। विभागीय सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही सतर्कता निगरानी प्रक्रिया के तहत की गई। जैसे ही इस पूरे मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची, तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी अधिकारी को निलंबित कर दिया गया।
SSP ने लिया सख्त एक्शन
मामले की गंभीरता को देखते हुए SSP कांतेश कुमार मिश्रा ने बिना देर किए दारोगा भास्कर कुमार मिश्रा को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार के लिए किसी भी स्तर पर कोई जगह नहीं है और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कोर्ट में पेशी के बाद भेजा जाएगा जेल
गिरफ्तार किए गए दारोगा को अब न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेजे जाने की संभावना है। साथ ही, उनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है, जिसमें मामले की पूरी सच्चाई सामने लाई जाएगी।
विभाग की छवि पर सवाल
इस घटना के बाद एक बार फिर पुलिस विभाग की कार्यशैली और ईमानदारी पर सवाल उठने लगे हैं। आम जनता के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि यदि कानून के रखवाले ही इस तरह के कृत्यों में लिप्त पाए जाएंगे, तो आम लोगों को न्याय कैसे मिलेगा?
हालांकि वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं पर समय रहते कार्रवाई करना ही विभाग की प्राथमिकता है ताकि पुलिस की साख को बनाए रखा जा सके।
भ्रष्टाचार के खिलाफ संदेश
इस कार्रवाई को पुलिस विभाग के भीतर एक सख्त संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इससे विभाग के अन्य कर्मियों को भी यह संकेत मिलेगा कि भ्रष्टाचार या अवैध लेनदेन में शामिल होने पर कठोर कार्रवाई तय है।
फिलहाल इस पूरे मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
A major anti-corruption action has been reported from Muzaffarpur where a Sub Inspector posted at Sadar Police Station was caught red-handed while accepting a ₹15,000 bribe for removing a person’s name from a criminal case. SSP Kantesh Kumar Mishra immediately suspended the accused officer after the incident came to light. The arrested SI will be produced in court and sent to judicial custody. This Muzaffarpur police bribe case has triggered serious concerns over corruption within the Bihar police department.


















