spot_imgspot_img

नवरात्रि अष्टमी और नवमी 2026: क्या करें, क्या न करें और सही पूजा विधि की पूरी जानकारी!

spot_img

Date:

नवरात्रि अष्टमी और नवमी 2026: क्या करें, क्या न करें और सही पूजा विधि की पूरी जानकारी

AIN NEWS 1: नवरात्रि का पर्व हिंदू धर्म में बेहद श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। इनमें से अष्टमी और नवमी का विशेष महत्व होता है। कई लोग इन दोनों दिनों को सबसे पवित्र मानते हैं और पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना करते हैं।

कई बार ऐसा भी होता है कि अष्टमी और नवमी एक ही दिन पड़ जाती हैं। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठता है कि पूजा कैसे करें, कन्या पूजन कब करें और व्रत कब खोलें। इस लेख में हम आपको इन सभी सवालों के आसान और स्पष्ट जवाब देंगे।

अष्टमी का धार्मिक महत्व

अष्टमी को “महाअष्टमी” भी कहा जाता है। इस दिन मां दुर्गा के चामुंडा स्वरूप की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इसी दिन देवी ने महिषासुर जैसे राक्षसों का संहार किया था। इसलिए यह दिन शक्ति और विजय का प्रतीक माना जाता है।

इस दिन विशेष पूजा, व्रत और हवन करने से मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।

अष्टमी के दिन क्या करना चाहिए

1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें

अष्टमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना शुभ माना जाता है। इसके बाद साफ और हल्के रंग के कपड़े पहनें।

2. मां दुर्गा की विधि-विधान से पूजा करें

घर के मंदिर को साफ करके दीपक जलाएं। मां दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर के सामने फूल, धूप और नैवेद्य अर्पित करें। दुर्गा चालीसा या सप्तशती का पाठ करना भी लाभकारी माना जाता है।

3. मंत्र जाप करें

“ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे” मंत्र का जाप करने से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है और मन शांत रहता है।

कन्या पूजन का महत्व और विधि

अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। इसे “कंजक पूजन” भी कहा जाता है।

कैसे करें कन्या पूजन:

2 से 10 वर्ष की 9 कन्याओं को आमंत्रित करें

उनके पैर धोकर उन्हें सम्मानपूर्वक बैठाएं

माथे पर तिलक लगाएं

उन्हें भोजन कराएं (पूरी, चना और हलवा)

उपहार या दक्षिणा दें

कई लोग एक छोटे लड़के (लंगूर या भैरव) को भी साथ में भोजन कराते हैं, जो शुभ माना जाता है।

अगर 9 कन्याएं उपलब्ध न हों, तो 1, 3 या 5 कन्याओं का पूजन भी किया जा सकता है।

हवन का महत्व

अष्टमी या नवमी के दिन हवन करना भी बहुत शुभ माना जाता है। हवन करने से वातावरण शुद्ध होता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है। हवन में घी, हवन सामग्री और मंत्रों के साथ आहुति दी जाती है।

अष्टमी के दिन क्या नहीं करना चाहिए

मांसाहार और शराब का सेवन बिल्कुल न करें

घर में झगड़ा या नकारात्मक माहौल न बनाएं

बाल और नाखून काटने से बचें

व्रत को अधूरा न छोड़ें

पूजा के समय अशुद्धता या गंदगी न रखें

नवमी का महत्व

नवमी को “महानवमी” कहा जाता है। इस दिन मां दुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा की जाती है। यह दिन साधना और सिद्धि का प्रतीक माना जाता है।

कई लोग नवमी के दिन ही कन्या पूजन और हवन करते हैं, खासकर तब जब अष्टमी और नवमी अलग-अलग दिनों में पड़ती हैं।

जब अष्टमी और नवमी एक ही दिन हों

कभी-कभी पंचांग के अनुसार अष्टमी और नवमी तिथि एक ही दिन पड़ जाती है। ऐसी स्थिति में पूजा को लेकर भ्रम हो सकता है।

क्या करें ऐसे में:

सुबह अष्टमी तिथि में पूजा करें

उसी दिन कन्या पूजन कर लें

हवन भी उसी दिन करना शुभ माना जाता है

अष्टमी खत्म होने से पहले कन्या पूजन करना बेहतर होता है

इस स्थिति में अधिकतर लोग अष्टमी को प्राथमिकता देते हैं।

कन्या पूजन का सही समय

कन्या पूजन सुबह से दोपहर के बीच करना सबसे अच्छा माना जाता है।

आमतौर पर सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे के बीच का समय सबसे शुभ होता है।

ध्यान रखें कि पूजन अष्टमी तिथि के दौरान ही कर लिया जाए।

प्रसाद में क्या बनाएं

कन्या पूजन में पारंपरिक रूप से तीन चीजें बनाई जाती हैं:

काले चने

सूजी का हलवा

पूरी

इसे “अष्टमी प्रसाद” कहा जाता है और इसे बहुत पवित्र माना जाता है।

व्रत कब खोलें

व्रत खोलने का सही समय कन्या पूजन और हवन के बाद होता है।

सबसे पहले मां दुर्गा को भोग लगाएं, फिर कन्याओं को भोजन कराएं और अंत में खुद प्रसाद ग्रहण करें।

जरूरी सावधानियां

कन्याओं का सम्मान करें, उन्हें नाराज न करें

साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें

श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा करें

प्रसाद पहले कन्याओं को दें, बाद में खुद लें

नवरात्रि की अष्टमी और नवमी केवल पूजा का दिन नहीं, बल्कि आस्था, अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक हैं। इन दिनों में सही विधि से पूजा करने और कन्या पूजन करने से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति आती है।

यदि अष्टमी और नवमी एक ही दिन पड़ें, तो घबराने की जरूरत नहीं है। श्रद्धा के साथ अष्टमी के दौरान ही सभी प्रमुख अनुष्ठान पूरे कर लेना ही सबसे उत्तम माना जाता है।

Navratri Ashtami and Navami 2026 are considered highly significant days in Hindu festivals, especially for performing Kanya Pujan, Durga Puja rituals, and fasting practices. Devotees observe strict vrat rules, offer prayers to Goddess Durga, and prepare traditional prasad like halwa, puri, and chana. Understanding the correct puja vidhi, auspicious timing for Kanjak Pujan, and what to do or avoid during Ashtami and Navami can help in gaining spiritual benefits and blessings. This guide provides complete details in simple language for better clarity and practice.

spot_img
spot_imgspot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_imgspot_img

Share post:

New Delhi
overcast clouds
25 ° C
26.1 °
25 °
94%
2.1m/s
100%
Sat
27 °
Sun
28 °
Mon
38 °
Tue
40 °
Wed
41 °
Video thumbnail
दिल्ली CM रेखा गुप्ता का औचक निरीक्षण, जलभराव की स्थिति का जायजा लेकर अधिकारियों को दिए निर्देश
00:50
Video thumbnail
Akhilesh Yadav : "जिन्होंने रामधन की डकैती की है, आस्था के पैसे की चोरी की है वह घबराए हुए हैं..."
00:55
Video thumbnail
Kangana Ranaut Angry : "11 करोड़ दिए हैं और काम एक भी नहीं हुआ..."
00:32
Video thumbnail
दिल्ली मेट्रो से SRCC पहुंचे पीएम मोदी
01:12
Video thumbnail
द्वारका एक्सप्रेसवे की सुरंग में बारिश के बाद जलभराव, 60 मिनट तक रेंगता रहा ट्रैफिक
00:14
Video thumbnail
हरियाणा: शराब की बोतल लेकर कार पर बैठी युवती का हाईवोल्टेज ड्रामा, लोगों से भिड़ने का वीडियो वायरल
01:21
Video thumbnail
सहारनपुर: कलक्ट्रेट परिसर की मस्जिद सुबह 5 बजे ढहाई गई
00:16
Video thumbnail
Mirzapur the movie Public Reaction | First Day Public Review | Reaction on Pankaj Tripathi, Divyendu
13:18
Video thumbnail
Pushkar Singh Dhami : “एक मौलाना ने धमकी दी थी कि अगर मदरसे बंद किए गए तो...”
00:49
Video thumbnail
कान्हा की नगरी मथुरा में पहुँचे CM योगी आदित्यनाथ
00:30

Subscribe

spot_img
spot_imgspot_img

Popular

spot_img

More like this
Related