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नेपाल में जलप्रलय से तबाही, 788 की मौत; 2,500 से ज्यादा लापता, 77 तीर्थयात्रियों का भी सुराग नहीं, हिमालय पर मंडराया बड़ा खतरा

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AIN NEWS 1: नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने के बाद आई बाढ़ ने कई इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को अपनी चपेट में ले लिया। नेपाल में मृतकों की संख्या बढ़कर 788 हो गई है, जबकि 2,500 से ज्यादा लोगों के अब भी लापता होने की जानकारी है। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।

इस प्राकृतिक आपदा ने केवल नेपाल को ही नहीं, बल्कि भारत, चीन और दूसरे देशों से जुड़े लोगों को भी प्रभावित किया है। बड़ी संख्या में तीर्थयात्री और विदेशी नागरिक नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में फंसे या लापता हुए हैं। इसी बीच त्रिशूली नदी में आई नई बाढ़ ने 130 मीटर लंबे एक सस्पेंशन ब्रिज को भी बहा दिया, जिससे करीब 400 परिवारों का मुख्य सड़क मार्ग से संपर्क प्रभावित हुआ है।

ग्लेशियर टूटने से आई विनाशकारी बाढ़

रिपोर्टों के मुताबिक, नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर और बर्फ-पत्थर के बड़े हिस्से के टूटने के बाद अचानक भारी मात्रा में पानी, मलबा और चट्टानें नीचे की ओर बहने लगीं। इस तेज बहाव ने नदियों के किनारे बसे कई इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया।

बाढ़ का असर खासतौर पर रसुवा, नुवाकोट, चितवन, गोरखा, धादिंग और आसपास के क्षेत्रों में देखने को मिला। कई जगह सड़क और पुल बह जाने के कारण राहत टीमों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में मुश्किल हो रही है।

नेपाल के अधिकारियों के मुताबिक, हजारों सुरक्षाकर्मी राहत और बचाव अभियान में जुटे हैं। कई इलाकों में हेलीकॉप्टरों की मदद से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। वहीं, मलबे में दबे और लापता लोगों की तलाश लगातार जारी है।

788 लोगों की मौत, 2,500 से ज्यादा अब भी लापता

नेपाल में आपदा की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मृतकों की संख्या 788 तक पहुंच गई है। इसके अलावा 2,502 लोगों के लापता होने की सूचना है। कई शवों की पहचान करना भी चुनौती बना हुआ है, क्योंकि बड़ी संख्या में शव बुरी तरह क्षतिग्रस्त अवस्था में मिले हैं।

बाढ़ के बाद प्रभावित इलाकों में पानी, भोजन, दवाइयों और जरूरी सामान की कमी की खबरें भी सामने आई हैं। जिन लोगों के घर पूरी तरह तबाह हो गए हैं, उन्हें राहत शिविरों में रखा गया है। कई परिवार अभी भी अपने परिजनों की तलाश में अस्पतालों और राहत केंद्रों के चक्कर लगा रहे हैं।

भारत की ओर से भी नेपाल को राहत सामग्री और तकनीकी मदद भेजी गई है। भारत ने राहत सामग्री के साथ सुरंगों में फंसे लोगों को बचाने के लिए विशेषज्ञ टीम और शवों की पहचान में मदद के लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञ भी भेजे हैं।

त्रिशूली नदी में फिर आया उफान, 130 मीटर पुल बहा

नेपाल की त्रासदी के बीच त्रिशूली नदी में आई नई बाढ़ ने एक और संकट पैदा कर दिया। गोरखा जिले में घ्यालचोक और पृथ्वी हाईवे के पास चारौदी को जोड़ने वाला करीब 130 मीटर लंबा सस्पेंशन ब्रिज तेज बहाव में बह गया।

यह पुल आसपास के करीब 400 परिवारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण था। स्थानीय लोग इसी रास्ते से दूध, सब्जियां और दूसरी कृषि उपज चारौदी तक पहुंचाते थे। पुल बहने के बाद इन परिवारों के लिए मुख्य सड़क तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।

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सद्गुरु के 77 तीर्थयात्री अब भी लापता

नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई बाढ़ में ईशा फाउंडेशन से जुड़े 77 तीर्थयात्रियों के लापता होने की खबर ने चिंता और बढ़ा दी है। ये लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौट रहे थे और बाढ़ आने के समय ग्यिरोंग इमिग्रेशन सेंटर में मौजूद थे।

सद्गुरु ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि काश उनका समूह थोड़ा बाद में वहां पहुंचा होता। उनके मुताबिक, बाढ़ ने इमिग्रेशन सेंटर और आसपास के बड़े हिस्से को तबाह कर दिया।

ईशा फाउंडेशन के मुताबिक, ग्यिरोंग इलाके में खोज और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। संस्था ने बताया कि उसका दल चीन और नेपाल की तरफ से उपलब्ध सूचनाओं को जुटाकर लापता लोगों का पता लगाने की कोशिश कर रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ग्यिरोंग पोर्ट का इमिग्रेशन परिसर पूरी तरह बह गया है और इलाके में भारी मात्रा में मलबा जमा है। ईशा फाउंडेशन ने बताया कि वहां करीब 45 से 50 फीट तक मलबा जमा होने की जानकारी है। हालांकि, संगठन ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रभावित क्षेत्र तक पहुंच सीमित होने के कारण हर जानकारी की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना संभव नहीं है।

हिंदू कुश हिमालय पर जलवायु संकट की चेतावनी

नेपाल की इस आपदा ने हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरे को लेकर चिंता और तेज कर दी है। हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियरों के पिघलने, ग्लेशियल झीलों के बढ़ने और अचानक बाढ़ जैसी घटनाओं का खतरा वैज्ञानिक और पर्यावरण विशेषज्ञ लंबे समय से बताते रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र जलवायु तंत्र और ICIMOD के बीच भी हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में जलवायु कार्रवाई को मजबूत करने के लिए सहयोग चल रहा है। इस क्षेत्र को लेकर विशेषज्ञों की चिंता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां होने वाले बदलाव करोड़ों लोगों की जल सुरक्षा और आजीविका को प्रभावित कर सकते हैं।

नेपाल की मौजूदा त्रासदी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि हिमालयी इलाकों में शुरुआती चेतावनी प्रणाली, ग्लेशियर निगरानी और आपदा प्रबंधन को कितना मजबूत किया जाना चाहिए।

यमुना एक्सप्रेसवे पर भी बड़ा हादसा

नेपाल की त्रासदी के बीच उत्तर प्रदेश के यमुना एक्सप्रेसवे से भी दर्दनाक सड़क हादसे की खबर सामने आई है। ग्रेटर नोएडा के जेवर क्षेत्र में तेज रफ्तार ट्रक अनियंत्रित होकर डिवाइडर और रेलिंग तोड़ते हुए दूसरी दिशा में पहुंच गया और एक कार से जा टकराया।

हादसे में कार सवार चार लोगों की मौत हो गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक ट्रक नोएडा से मथुरा की ओर जा रहा था। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और हादसे के कारणों की पड़ताल की जा रही है।

मोहन भागवत का संदेश—‘हिंदू जागेगा तो दुनिया जागेगी’

इन घटनाओं के बीच आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कनाडा के टोरंटो में आयोजित ‘हिंदू विश्व बंधु-एम्ब्रेस द वर्ल्ड इन फ्रेंडशिप’ कार्यक्रम में भारत और हिंदू समाज की भूमिका पर बात की।

भागवत ने कहा कि भारत की पहचान केवल शक्ति या प्रभुत्व से नहीं, बल्कि सेवा, सहयोग और मानवता के प्रति जिम्मेदारी से जुड़ी रही है। उन्होंने कहा कि अगर हिंदू जागेगा तो दुनिया जागेगी।

उन्होंने भारत के ‘डीएनए’ का उल्लेख करते हुए कहा कि जरूरतमंदों की मदद के लिए हाथ बढ़ाना भारत की परंपरा रही है। उनके मुताबिक भारत का उत्थान केवल भारत की ताकत बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका अर्थ अधिक एकजुट और स्वतंत्र मानवता से है।

भागवत ने यह भी कहा कि इतिहास में भारत के पास महाशक्ति बनने की क्षमता थी, लेकिन उसका लक्ष्य केवल महाशक्ति बनना नहीं था। उनके अनुसार भारत ने दुनिया की सेवा करने की भूमिका निभाई और इसी कारण उसे ‘विश्वगुरु’ के रूप में देखा गया।

एक साथ कई चुनौतियां

नेपाल की प्राकृतिक आपदा, हिमालय में बढ़ता जलवायु खतरा और भारत-नेपाल सीमा से जुड़े तीर्थयात्रियों की सुरक्षा इस समय बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है। दूसरी ओर यमुना एक्सप्रेसवे का हादसा सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।

नेपाल में बचाव अभियान अभी जारी है और हजारों परिवार अपने लापता परिजनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं। 77 तीर्थयात्रियों समेत बड़ी संख्या में विदेशी नागरिकों के लापता होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ी है।

ऐसे समय में राहत और बचाव कार्य के साथ-साथ हिमालयी क्षेत्र में भविष्य की आपदाओं से निपटने के लिए मजबूत निगरानी, शुरुआती चेतावनी प्रणाली और बेहतर आपदा प्रबंधन की जरूरत पहले से कहीं अधिक महसूस हो रही है।

Nepal Flood 2026 has caused widespread destruction after a glacial collapse and ice-rock avalanche triggered devastating flash floods across the Himalayan region. The Nepal flood death toll has reached 788, while more than 2,500 people remain missing. The disaster has also affected Kailash Mansarovar pilgrims, including 77 Isha Foundation pilgrims reported missing near Gyirong. The Trishuli River flood swept away a 130-metre suspension bridge, highlighting the growing vulnerability of the Hindu Kush Himalayas to climate change and extreme weather events. Meanwhile, RSS chief Mohan Bhagwat’s Hindu Vishwa Bandhu message focused on India’s tradition of service, unity and global friendship.

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