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नोएडा सेक्टर-150 में दर्दनाक हादसा: 80 मिनट तक जिंदगी के लिए लड़ता रहा सॉफ्टवेयर इंजीनियर, पिता से बोला—‘पापा, मुझे बचा लो’!

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AIN NEWS 1: नोएडा के सेक्टर-150 में 16 जनवरी की रात एक ऐसा दिल दहला देने वाला हादसा हुआ, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। घने कोहरे, खराब रोशनी और अधूरी सुरक्षा व्यवस्था ने मिलकर 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की जान ले ली। यह कोई सामान्य सड़क दुर्घटना नहीं थी, बल्कि एक ऐसी त्रासदी थी जिसमें एक युवक करीब 80 मिनट तक मौत से लड़ता रहा, मदद के लिए पुकारता रहा, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका।

कैसे हुआ हादसा

16 जनवरी की रात युवराज मेहता अपनी कार से सेक्टर-150 इलाके से गुजर रहे थे। रात का समय था, चारों ओर घना कोहरा छाया हुआ था और विजिबिलिटी बेहद कम थी। इसी दौरान उनकी कार अचानक नियंत्रण खो बैठी और सड़क किनारे बनी एक दीवार को तोड़ते हुए करीब 30 फीट गहरे पानी से भरे गड्ढे में जा गिरी।

यह गड्ढा किसी निर्माणाधीन परियोजना का हिस्सा बताया जा रहा है, जिसमें बारिश और अन्य कारणों से पानी भर गया था। इलाके में न तो पर्याप्त चेतावनी संकेत लगे थे और न ही कोई मजबूत बैरिकेडिंग थी।

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कार डूबी, लेकिन युवराज ने नहीं मानी हार

हादसे के बाद कार तेजी से पानी में डूबने लगी। हालांकि युवराज ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने किसी तरह कार की छत पर चढ़कर खुद को संभाला और मदद के लिए आवाज़ लगाने लगे। ठंडा, बर्फीला पानी, चारों ओर अंधेरा और घना कोहरा—इन सबके बीच वह अकेले जिंदगी की जंग लड़ रहे थे।

पिता को किया आखिरी फोन

रात करीब 12:20 बजे युवराज ने अपने पिता को फोन किया। फोन के दूसरी तरफ बैठे पिता को शायद यह अंदाजा भी नहीं था कि वह अपने बेटे की आखिरी आवाज सुन रहे हैं।

युवराज की आवाज कांप रही थी। उन्होंने कहा—

“पापा, मेरी कार पानी में गिर गई है… मुझे बचा लो… मैं मरना नहीं चाहता।”

यह शब्द आज भी उनके परिवार के कानों में गूंज रहे हैं। पिता ने तुरंत पुलिस और अन्य आपात सेवाओं को सूचना दी, लेकिन वक्त तेजी से निकलता जा रहा था।

रेस्क्यू टीम पहुंची, लेकिन हालात बेहद मुश्किल

सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। लेकिन हालात किसी के भी काबू में नहीं थे।

घना कोहरा

रात का अंधेरा

30 फीट गहरा गड्ढा

बर्फीला पानी

गड्ढे में निकली हुई लोहे की सरिया

इन सब कारणों से कोई भी रेस्क्यूकर्मी तुरंत पानी में उतरने का साहस नहीं कर सका। हर मिनट की देरी युवराज के लिए खतरे को और बढ़ा रही थी।

80 मिनट तक आती रही आवाज

बताया जा रहा है कि युवराज करीब 1 घंटे 20 मिनट तक कार की छत पर बैठकर मदद के लिए पुकारते रहे। वह लगातार अपने पिता और अन्य लोगों से फोन पर संपर्क में थे। लेकिन करीब 1:45 बजे के आसपास उनकी आवाज आनी बंद हो गई।

संभावना जताई जा रही है कि इसी दौरान कार पूरी तरह पानी में डूब गई और युवराज भी उसके साथ डूब गए।

NDRF के पहुंचने तक बहुत देर हो चुकी थी

हालात की गंभीरता को देखते हुए एनडीआरएफ (NDRF) को भी बुलाया गया। लेकिन जब तक विशेष प्रशिक्षित टीम मौके पर पहुंची, तब तक काफी देर हो चुकी थी।

कई घंटों तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुबह करीब 4:30 बजे युवराज मेहता का शव गड्ढे से बाहर निकाला गया। इस दौरान पूरे इलाके में सन्नाटा पसरा रहा और हर आंख नम थी।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

युवराज मेहता एक होनहार सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे। परिवार के मुताबिक वह अपने करियर को लेकर बेहद मेहनती और सपनों से भरे हुए थे। एक सामान्य सी रात, एक गलत मोड़ और सिस्टम की लापरवाही ने सब कुछ छीन लिया।

पिता बार-बार यही सवाल पूछ रहे हैं—

“अगर समय पर मदद मिल जाती तो क्या मेरा बेटा आज जिंदा होता?”

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस हादसे ने नोएडा प्राधिकरण और प्रशासन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

निर्माणाधीन गड्ढे खुले क्यों थे?

पर्याप्त बैरिकेडिंग और चेतावनी बोर्ड क्यों नहीं लगाए गए?

रेस्क्यू के लिए तुरंत प्रशिक्षित गोताखोर क्यों उपलब्ध नहीं थे?

स्थानीय लोगों का कहना है कि सेक्टर-150 जैसे विकसित इलाके में भी सुरक्षा मानकों की अनदेखी आम बात बन चुकी है।

यह हादसा एक चेतावनी है

युवराज मेहता की मौत सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक चेतावनी है—

प्रशासन के लिए, सिस्टम के लिए और समाज के लिए।

जब तक सड़क सुरक्षा, निर्माण स्थलों की निगरानी और आपात सेवाओं की तत्परता को गंभीरता से नहीं लिया जाएगा, तब तक ऐसी घटनाएं होती रहेंगी।

A tragic road accident in Noida Sector 150 led to the death of 27-year-old software engineer Yuvraj Mehta after his car fell into a 30-feet deep water-filled pit during dense fog conditions. The Noida accident has raised serious questions about road safety, construction site security, and emergency response delays. Despite calling his father for help and surviving for nearly 80 minutes, the lack of timely rescue proved fatal, making this one of the most heartbreaking incidents in Noida recently.

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