spot_imgspot_img

यूपी में पंचायत चुनाव 2027 विधानसभा चुनाव के बाद? ओबीसी आयोग की देरी से बढ़ी अटकलें!

spot_img

Date:

यूपी में पंचायत चुनाव 2027 विधानसभा चुनाव के बाद? ओबीसी आयोग की देरी से बढ़ी अटकलें

AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव समय पर होते नजर नहीं आ रहे हैं। राजनीतिक गलियारों से लेकर प्रशासनिक हलकों तक यही चर्चा है कि अब पंचायत चुनाव 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद ही कराए जा सकते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए आयोग के गठन में हो रही देरी को माना जा रहा है।

क्या है मौजूदा स्थिति?

साल 2021 में प्रदेश में पंचायत चुनाव कराए गए थे। ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य का कार्यकाल 2 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। सामान्य प्रक्रिया के अनुसार अप्रैल से जून 2026 के बीच नए चुनाव कराए जाने चाहिए।

लेकिन अभी तक ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए आयोग का गठन नहीं हुआ है। सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में आश्वासन दिया है कि आयोग बनाकर आरक्षण प्रक्रिया पूरी की जाएगी, उसके बाद ही चुनाव होंगे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आयोग के गठन से लेकर रिपोर्ट आने तक कम से कम 3 से 6 महीने लग सकते हैं। अगर आयोग फरवरी में भी बनता है तो रिपोर्ट मई या जून से पहले आना मुश्किल है।

प्रशासनिक अड़चनें भी बड़ी वजह

इस समय मतदाता सूची का पुनरीक्षण भी चल रहा है। राज्य में एसआईआर (Special Intensive Revision) के तहत अंतिम मतदाता सूची 10 अप्रैल को जारी होनी है।

इसके अलावा 1 अप्रैल से जनगणना का हाउसहोल्ड सर्वे शुरू हो रहा है। इस सर्वे में शिक्षक, शिक्षा मित्र, लेखपाल और अन्य कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी। यही कर्मचारी बीएलओ (Booth Level Officer) भी होते हैं। ऐसे में पंचायत चुनाव के लिए पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध कराना सरकार के लिए चुनौती बन सकता है।

राजनीतिक दलों की तैयारी भी ठंडी

सत्ता पक्ष भारतीय जनता पार्टी और मुख्य विपक्ष समाजवादी पार्टी—दोनों ही दलों की ओर से पंचायत चुनाव को लेकर कोई ठोस तैयारी जमीन पर नजर नहीं आ रही है।

ना बूथ स्तर पर प्रबंधन की कवायद दिख रही है और ना ही प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया तेज हुई है। यहां तक कि पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर की पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अंदर भी पंचायत चुनाव को लेकर कोई खास सक्रियता नहीं है।

पार्टी के पदाधिकारियों को संकेत दे दिया गया है कि अभी विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी पर ध्यान केंद्रित किया जाए।

मंत्री बयान क्यों दे रहे समय पर चुनाव का?

हालांकि सार्वजनिक मंचों से ओमप्रकाश राजभर लगातार कह रहे हैं कि पंचायत चुनाव समय पर होंगे। राजनीतिक विश्लेषक इसे रणनीतिक बयान मानते हैं।

उनका तर्क है कि अगर अभी से चुनाव टालने की घोषणा कर दी जाए तो कार्यकर्ताओं का मनोबल गिर सकता है। जमीनी स्तर पर सक्रियता कम हो सकती है। इसलिए बयानबाजी के जरिए राजनीतिक माहौल बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

क्या विधानसभा चुनाव ज्यादा अहम?

प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनाव की अहमियत पंचायत चुनाव से कहीं अधिक मानी जाती है। 2027 का चुनाव सत्ता की दिशा तय करेगा।

सूत्रों के मुताबिक, सरकार और पार्टी के भीतर इस बात पर सहमति बन चुकी है कि पंचायत चुनाव विधानसभा से पहले कराने पर गांवों में राजनीतिक टकराव बढ़ सकता है। पंचायत चुनाव सिंबल (चुनाव चिन्ह) पर नहीं होते, ऐसे में एक ही पार्टी के कई कार्यकर्ता आमने-सामने आ जाते हैं। इससे अंदरूनी रंजिश बढ़ती है और विधानसभा चुनाव पर असर पड़ सकता है।

2021 का अनुभव भी कारण?

कोविड-19 की दूसरी लहर के बीच 2021 में पंचायत चुनाव चार चरणों में कराए गए थे। पहले चरण में 15 अप्रैल को 18 जिलों में मतदान हुआ था। अंतिम चरण 29 अप्रैल को 17 जिलों में संपन्न हुआ और 2 मई को मतगणना हुई।

उस चुनाव में क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष की 825 सीटों में से 648 सीटें भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने जीती थीं। जिला पंचायत अध्यक्ष की 75 सीटों में से 67 पर भाजपा का कब्जा रहा।

लेकिन पहले चरण के दौरान पार्टी को कुछ क्षेत्रों में असंतोष और बगावत का सामना भी करना पड़ा था। डैमेज कंट्रोल में काफी ऊर्जा खर्च करनी पड़ी। यही वजह है कि इस बार पार्टी कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।

कार्यकाल खत्म होने के बाद क्या होगा?

अगर मई 2026 तक चुनाव नहीं कराए जाते हैं तो पंचायतों का संचालन कैसे होगा?

पंचायतीराज विभाग के सूत्र बताते हैं कि ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत में रिसीवर नियुक्त किए जा सकते हैं। जब तक चुनाव नहीं होते, प्रशासनिक अधिकारी ही कार्यभार संभालेंगे।

हालांकि कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादा लंबी देरी होने पर मामला फिर अदालत पहुंच सकता है। पूर्व राज्य निर्वाचन अधिकारी मानते हैं कि इच्छुक उम्मीदवार हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सकते हैं।

अगर सरकार ठोस कारण नहीं बता पाती तो अदालत चुनाव कराने का निर्देश भी दे सकती है।

आगे क्या संकेत?

वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए पंचायत चुनाव अप्रैल-जून 2026 में होना मुश्किल लग रहा है। ओबीसी आयोग की रिपोर्ट, जनगणना, मतदाता सूची संशोधन और राजनीतिक प्राथमिकताएं—इन सभी कारणों से चुनाव टलने की संभावना मजबूत है।

अब निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार आयोग का गठन कब करती है और हाईकोर्ट में क्या स्थिति स्पष्ट करती है।

फिलहाल इतना तय है कि पंचायत चुनाव की राजनीति सीधे तौर पर 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीति से जुड़ चुकी है। गांव की सरकार का चुनाव अब प्रदेश की सत्ता की राजनीति का हिस्सा बन गया है।

The Uttar Pradesh Panchayat Elections 2026 are likely to be postponed until after the 2027 Assembly Elections due to delays in the formation of the OBC Reservation Commission. The Yogi government informed the Allahabad High Court about constituting an OBC commission before conducting local body polls. Political parties including BJP and SP are reportedly focusing more on the UP Assembly Elections 2027, making Panchayat polls a secondary priority. Administrative challenges such as census duty and voter list revision further complicate the timeline.

spot_img
spot_imgspot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_imgspot_img

Share post:

New Delhi
overcast clouds
29.1 ° C
29.1 °
29.1 °
74 %
3kmh
100 %
Tue
34 °
Wed
38 °
Thu
37 °
Fri
35 °
Sat
30 °
Video thumbnail
चिल्लाता रह गया विपक्ष, मोदी सरकार ने पास किया ऐतिहासिक बिल! Lok Sabha
20:41
Video thumbnail
2.70 लाख रुपए के नोटों से बनी कांवड़ हुई वायरल
00:19
Video thumbnail
अखिलेश यादव बोले- छात्रों का मुद्दा और आस्था से खिलवाड़, दोनों पर सरकार चर्चा करे
00:59
Video thumbnail
राम मंदिर चढ़ावा मामले पर दूध लेकर संसद पहुंचे डिंपल यादव समेत सांसद
00:42
Video thumbnail
झारखंड में वाटर कैनन के सामने डटे छात्र, पीछे हटने की बजाय किया डांस
00:21
Video thumbnail
‘आंसू की हर एक बूंद से टपक रहा गोल्ड मेडल’, खिलाड़ियों के जज्बे पर PM Modi का बयान
00:14
Video thumbnail
Dimple Yadav : "FCRA बिल इसलिए लाया जा रहा है जिससे संगठनों पर दबाव...”
00:47
Video thumbnail
Dimple Yadav on Yogi Adityanath & Ram Mandir Donation Theft : "दूध का दूध और पानी का पानी...”
01:12
Video thumbnail
झारखंड में युवा विधानसभा के बाहर
00:05
Video thumbnail
झारखंड छात्र आंदोलन पर अखिलेश यादव का निशाना, बोले- छात्रों को रोजगार देना मोदी सरकार की जिम्मेदारी
00:28

Subscribe

spot_img
spot_imgspot_img

Popular

spot_img

More like this
Related

‘भले ही गोली मार दें, पूरा वंदे मातरम नहीं गाएंगे’, कांग्रेस सांसद राजमोहन उन्नीथन का बयान

AIN NEWS 1तिरुवनंतपुरम: केरल में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को...