AIN NEWS 1: नोएडा के सेक्टर-150 में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की दर्दनाक मौत के मामले ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। यह मामला अब सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेही से जुड़ा गंभीर सवाल बन चुका है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना को बेहद गंभीरता से लेते हुए कड़ा रुख अपनाया है और मामले की उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान, बड़े प्रशासनिक फैसले
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना की रिपोर्ट सामने आने के बाद तत्काल संज्ञान लिया। शुरुआती जांच और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर यह साफ हुआ कि मामले में नोएडा अथॉरिटी की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। इसी को देखते हुए मुख्यमंत्री ने नोएडा अथॉरिटी के CEO लोकेश एम को उनके सभी पदों से हटा दिया है और उन्हें वेटिंग में डाल दिया गया है।
मेरठ के उजैद कुरैशी का आतंकी कनेक्शन, अलकायदा से जुड़ाव की जांच तेज
यह फैसला प्रशासनिक गलियारों में बड़ा और सख्त संदेश माना जा रहा है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी, चाहे वह कितना ही बड़ा अधिकारी क्यों न हो।
SIT का गठन, 5 दिन में रिपोर्ट का आदेश
मुख्यमंत्री के निर्देश पर इस पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है। इस SIT की अध्यक्षता मेरठ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) करेंगे। टीम में मेरठ के मंडलायुक्त और लोक निर्माण विभाग (PWD) के चीफ इंजीनियर को भी शामिल किया गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने SIT को साफ निर्देश दिए हैं कि वह पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच करे और 5 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपे। जांच में यह भी देखा जाएगा कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ, जिम्मेदार कौन हैं और किन स्तरों पर लापरवाही बरती गई।
क्या है पूरा मामला?
नोएडा के सेक्टर-150 इलाके में एक निर्माणाधीन परियोजना के बेसमेंट में भरे सीवर या पानी में गिरने से एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत हो गई थी। यह घटना तब और गंभीर हो गई जब पता चला कि घटनास्थल पर सुरक्षा इंतजाम न के बराबर थे। न तो पर्याप्त बैरिकेडिंग थी और न ही चेतावनी बोर्ड लगाए गए थे।
स्थानीय लोगों और मृतक के परिजनों ने बिल्डर और अथॉरिटी दोनों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि अगर समय रहते सुरक्षा मानकों का पालन किया गया होता, तो यह जान बचाई जा सकती थी।
नोएडा अथॉरिटी की कार्रवाई
मुख्यमंत्री के सख्त रुख के बाद नोएडा अथॉरिटी भी हरकत में आई है। अथॉरिटी ने मामले में जिम्मेदार माने जा रहे एक जूनियर इंजीनियर (JE) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके अलावा अन्य अधिकारियों को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
अथॉरिटी का कहना है कि आंतरिक जांच के साथ-साथ SIT जांच में भी पूरा सहयोग किया जाएगा और जो भी अधिकारी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
बिल्डर पर FIR, कानूनी शिकंजा कसना शुरू
इस मामले में संबंधित बिल्डर के खिलाफ पहले ही FIR दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने बिल्डर की भूमिका की जांच शुरू कर दी है और निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, अगर जांच में यह साबित होता है कि बिल्डर ने जानबूझकर नियमों की अनदेखी की, तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें गिरफ्तारी और प्रोजेक्ट से जुड़े अन्य प्रतिबंध भी शामिल हो सकते हैं।
सरकार का संदेश: जवाबदेही तय होगी
इस पूरे घटनाक्रम के जरिए योगी सरकार ने साफ कर दिया है कि विकास परियोजनाओं के नाम पर आम लोगों की जान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए हैं कि प्रदेश भर में निर्माणाधीन स्थलों का सुरक्षा ऑडिट किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
सरकार का मानना है कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शहरी विकास, प्रशासनिक निगरानी और नियमों के पालन से जुड़ा बड़ा सवाल है।
परिजनों को न्याय की उम्मीद
मृतक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के परिजन इस कार्रवाई से कुछ हद तक संतुष्ट जरूर नजर आ रहे हैं, लेकिन उनका कहना है कि असली न्याय तभी मिलेगा जब सभी दोषियों को सजा मिलेगी। परिजनों ने सरकार से मांग की है कि जांच निष्पक्ष हो और किसी भी दबाव में न आए।
आगे क्या?
अब सबकी नजर SIT की रिपोर्ट पर टिकी है। पांच दिनों में आने वाली इस रिपोर्ट से यह साफ होगा कि हादसे के पीछे कौन-कौन जिम्मेदार हैं और प्रशासन आगे क्या कदम उठाएगा। अगर रिपोर्ट में बड़े खुलासे होते हैं, तो आने वाले दिनों में और भी बड़े एक्शन देखने को मिल सकते हैं।
The Noida software engineer death case in Sector 150 has drawn significant attention after Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath ordered a high-level SIT probe. The Noida Authority CEO has been removed following allegations of negligence, while an FIR has been registered against the builder involved. This case highlights serious concerns regarding construction safety, administrative accountability, and government action in Noida, making it a crucial issue in Uttar Pradesh governance and urban development.



















