AIN NEWS 1: नोएडा के सेक्टर-94 स्थित सुपरनोवा प्रोजेक्ट में रहने वाले लोगों के सामने एक बार फिर पानी का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। एनसीआर की चर्चित और सबसे ऊंची इमारतों में शामिल सुपरनोवा में नोएडा प्राधिकरण की गंगाजल आपूर्ति बंद होने के बाद निवासी भूजल पर निर्भर हैं। आरोप है कि बिल्डर की ओर से पानी का पुराना बकाया जमा नहीं किया गया, जिसके चलते जल विभाग ने कनेक्शन काट दिया।
ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पानी के बिल की मूल बकाया राशि करीब 42 लाख रुपये थी। ब्याज जुड़ने के बाद यह रकम बढ़कर करीब 72 लाख रुपये बताई जा रही है। अब सुपरनोवा अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन यानी AOA इस रकम को चुकाकर पानी की सप्लाई बहाल कराने की कोशिश में जुटी है, लेकिन एसोसिएशन आर्थिक दबाव और भारी ब्याज की वजह से प्राधिकरण से राहत की मांग कर रही है।
450 परिवारों के सामने पानी की परेशानी
गंगाजल की सप्लाई बंद होने का सबसे सीधा असर सुपरनोवा में रह रहे करीब 450 परिवारों पर पड़ा है। रोजमर्रा की जरूरतों के लिए अब सोसायटी को भूजल का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों के मुताबिक, इस पानी में TDS यानी Total Dissolved Solids की मात्रा अधिक है।

पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि लंबे समय तक हाई-TDS भूजल पर निर्भर रहने से घरेलू उपयोग और पीने के पानी की व्यवस्था को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है। AOA को भूजल को उपयोग योग्य बनाने के लिए अतिरिक्त खर्च भी करना पड़ रहा है। जून 2026 की रिपोर्ट में भी बताया गया था कि गंगाजल आपूर्ति बंद रहने के दौरान निजी बोरवेल से पानी उपलब्ध कराया जा रहा था और उसमें TDS अधिक होने की शिकायत थी।
आखिर क्यों कटा गंगाजल का कनेक्शन?
मामले की जड़ पुराने पानी के बिल से जुड़ी है। सुपरनोवा का रखरखाव पहले बिल्डर से जुड़ी व्यवस्था के जरिए संचालित होता था। बाद में NCLAT के आदेश के बाद सोसायटी के रखरखाव की जिम्मेदारी AOA को सौंपने की प्रक्रिया शुरू हुई।
NCLAT ने मार्च 2025 में सुपरनोवा के मामले में महत्वपूर्ण आदेश देते हुए कहा था कि पंजीकृत Apartment Owners Association को सोसायटी के कॉमन एरिया और सुविधाओं का प्रबंधन सौंपा जाना चाहिए। कोर्ट रिकॉर्ड में 31 दिसंबर 2024 की बैठक और जनवरी 2025 के अंत/फरवरी 2025 से AOA को मेंटेनेंस सौंपने की व्यवस्था का भी उल्लेख मिलता है।
AOA का कहना है कि जब उसे व्यवस्था मिली, उस समय पानी का पुराना बकाया पहले से मौजूद था। बिल्डर की ओर से इसे पूरी तरह चुकाया नहीं गया। इसके बाद नोएडा प्राधिकरण के जल विभाग ने बकाया राशि की वजह से गंगाजल की आपूर्ति रोक दी।
42 लाख से 72 लाख कैसे पहुंचा बकाया?
यह मामला अब सिर्फ पानी के कनेक्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि बकाया राशि को लेकर भी पेचीदा हो गया है। ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि मूल पानी का बिल करीब 42 लाख रुपये था। ब्याज जुड़ने के बाद कुल बकाया लगभग 72 लाख रुपये बताया गया है। यानी ब्याज और अन्य देयताओं के कारण करीब 30 लाख रुपये का अंतर सामने आया है।
AOA का कहना है कि वह पानी का बिल जमा करने के लिए तैयार है, लेकिन इतनी बड़ी राशि एक साथ जमा करना आसान नहीं है। एसोसिएशन का जोर इस बात पर है कि प्राधिकरण ब्याज में कुछ राहत दे, जिससे बकाया का भुगतान किया जा सके और गंगाजल की आपूर्ति दोबारा शुरू हो।
AOA संरक्षक सुरेश नंदवानी के मुताबिक, एसोसिएशन पानी का बिल देने के लिए तैयार है। उनका कहना है कि प्राधिकरण से बातचीत के दौरान ब्याज की रकम काफी अधिक बताई जा रही है और एसोसिएशन चाहती है कि इसमें राहत मिले।
पहले भी सामने आ चुका है पानी का संकट
सुपरनोवा में गंगाजल आपूर्ति बंद होने का मामला नया नहीं है। जून 2026 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, उस समय सोसायटी में करीब एक साल से गंगाजल की सप्लाई बाधित बताई गई थी और बकाया राशि करीब 54 लाख रुपये बताई गई थी। AOA निजी बोरवेल के जरिए पानी उपलब्ध करा रही थी।
अब सितंबर 2026 की ताजा रिपोर्ट में बकाया की राशि ब्याज समेत करीब 72 लाख रुपये बताई गई है। इससे साफ है कि पुराने बकाये का समाधान नहीं होने पर देनदारी बढ़ती गई और पानी की समस्या भी बनी रही।
1200 लोगों की पानी की जरूरत भूजल से पूरी करने की चुनौती
रिपोर्ट के मुताबिक सुपरनोवा में करीब 1200 लोग रह रहे हैं। प्रति व्यक्ति प्रतिदिन लगभग 135 लीटर पानी की जरूरत के हिसाब से कुल खपत करीब 1.62 लाख लीटर प्रतिदिन बैठती है।
गंगाजल की आपूर्ति बंद होने के बाद इतनी बड़ी मात्रा में पानी की जरूरत पूरी करने के लिए भूजल पर निर्भरता बढ़ गई है। इससे न सिर्फ पानी की गुणवत्ता का सवाल उठ रहा है, बल्कि भूजल के लगातार दोहन को लेकर पर्यावरणीय नियमों का मुद्दा भी सामने आता है।
निवासियों के लिए समस्या यह है कि उनके सामने तत्काल कोई आसान विकल्प नहीं है। पानी रोजमर्रा की बुनियादी जरूरत है और गंगाजल कनेक्शन बंद होने के कारण वैकल्पिक व्यवस्था पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
सुपरनोवा की 87 मंजिल की योजना, 67 मंजिलों का निर्माण
सुपरनोवा नोएडा के सेक्टर-94 में स्थित एक बड़ा मिश्रित उपयोग वाला प्रोजेक्ट है। परियोजना की योजना 87 मंजिलों तक निर्माण की थी और उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार करीब 67 मंजिलों का निर्माण हो चुका है। निर्माण कार्य फिलहाल रुका हुआ बताया जा रहा है।
UP-RERA के रिकॉर्ड में सुपरनोवा परियोजना से संबंधित स्वीकृत दस्तावेज, वाटर सप्लाई प्लान और अन्य परियोजना दस्तावेज दर्ज हैं। परियोजना का पंजीकरण और उससे संबंधित रिकॉर्ड भी सरकारी पोर्टल पर उपलब्ध हैं।
इमारत अपनी ऊंचाई और आकार के कारण नोएडा की पहचान में शामिल है, लेकिन अब यहां रहने वाले परिवारों के लिए सबसे बड़ा सवाल ऊंची इमारत नहीं बल्कि घरों में आने वाला पानी बन गया है।
बिल्डर की पुरानी देनदारी का बोझ AOA पर क्यों?
पूरे विवाद का सबसे अहम सवाल यही है कि जिस समय पानी का बिल बकाया हुआ, उस समय इसकी जिम्मेदारी किसकी थी और हैंडओवर के बाद पुराने बकाये का भुगतान कौन करेगा?
AOA का पक्ष है कि उसे सोसायटी का संचालन मिलने के समय पुरानी देनदारी मौजूद थी। अब निवासी चाहते हैं कि उन्हें ऐसी देनदारी का बोझ न उठाना पड़े जो उनके मुताबिक पिछली व्यवस्था से जुड़ी है।
दूसरी तरफ, पानी की सप्लाई बंद होने के बाद तत्काल समाधान निकालने की जिम्मेदारी भी AOA के सामने है। यही वजह है कि एसोसिएशन प्राधिकरण के साथ बातचीत कर बकाया और ब्याज में राहत का रास्ता तलाश रही है।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल सबसे बड़ा लक्ष्य गंगाजल की आपूर्ति दोबारा शुरू कराना है। इसके लिए बकाया राशि का निपटारा जरूरी है। AOA प्राधिकरण से ब्याज में राहत की मांग कर रही है। यदि दोनों पक्ष किसी भुगतान योजना या राहत पर सहमत होते हैं, तो सोसायटी में गंगाजल कनेक्शन बहाल होने का रास्ता साफ हो सकता है।
सुपरनोवा के निवासियों के लिए यह मामला केवल एक बिल का नहीं है। करीब 450 परिवारों के लिए साफ और भरोसेमंद पानी सीधे तौर पर रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा मुद्दा है। ऐसे में पुरानी देनदारी, ब्याज और हैंडओवर की जिम्मेदारी के विवाद के बीच सबसे जरूरी यह है कि समाधान जल्द निकले और लोगों को हाई-TDS भूजल पर निर्भर रहने से राहत मिले।
ध्यान देने योग्य तथ्य: उपलब्ध रिपोर्टों में बकाया राशि अलग-अलग समय पर अलग बताई गई है। जून 2026 की रिपोर्ट में करीब 54 लाख रुपये और सितंबर 2026 की ताजा रिपोर्ट में मूल बकाया करीब 42 लाख तथा ब्याज समेत करीब 72 लाख रुपये बताया गया है। इसलिए ₹72 लाख को वर्तमान रिपोर्ट में बताए गए ब्याज सहित बकाये के रूप में समझना उचित है।
Noida Supernova is facing a serious water crisis after the Gangajal water connection was reportedly disconnected over an outstanding water bill. The Supernova project in Sector 94, Noida, has around 450 families affected by the disruption, with residents relying on groundwater containing high TDS levels. The reported outstanding amount was around Rs 42 lakh initially and has reportedly increased to nearly Rs 72 lakh including interest. The Supernova Apartment Owners Association (AOA) is seeking relief on interest from the Noida Authority so that the Gangajal water supply can be restored. The issue is also linked to the handover of maintenance from the builder to the AOA following NCLAT proceedings.



















