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लाल किले पर पीएम मोदी के भाषण से निराश हुए सीएम उमर अब्दुल्ला, बोले – “हमने क्या खता की है?”

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AIN NEWS 1 श्रीनगर, 15 अगस्त – जम्मू-कश्मीर में 79वां स्वतंत्रता दिवस पूरे उत्साह के साथ मनाया गया. राजधानी श्रीनगर के बख्शी स्टेडियम में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने राष्ट्रीय ध्वज फहराकर आज़ादी का जश्न मनाया. हालांकि, उनका भाषण इस बार केवल स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाओं तक सीमित नहीं रहा. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल किले से दिए गए 103 मिनट लंबे भाषण पर अपनी नाराज़गी और निराशा जताई.

जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस देने की उम्मीद टूटी

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी सरकार को यह उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री मोदी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जम्मू-कश्मीर को फिर से पूर्ण राज्य का दर्जा देने का ऐलान करेंगे. लेकिन पीएम मोदी के पूरे भाषण में इस मुद्दे पर एक भी शब्द नहीं आया.

भावुक अंदाज़ में सीएम उमर अब्दुल्ला ने कहा –
“पिछली बार मैं जब यहां खड़ा था, तब एक राज्य का मुख्यमंत्री था. हमारे पास अपना संविधान था, अपनी पहचान थी. लेकिन आज हम उसी पहचान के इंतज़ार में खड़े हैं. मुझे नहीं पता कि इसमें देरी क्यों हो रही है.”

“उम्मीद की रोशनी कम हुई है”

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि वे इस दिन दिल्ली से किसी बड़े फैसले की घोषणा की उम्मीद कर रहे थे.
“हम इंतजार करते रहे, लेकिन कुछ नहीं हुआ. मैं पूरी तरह निराश नहीं हूं, लेकिन सच यह है कि उम्मीद की रोशनी थोड़ी मंद पड़ गई है.”

उन्होंने साफ कहा कि केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को देश के बाकी राज्यों के बराबर लाने का वादा किया था, लेकिन आज भी ऐसा नहीं हो सका है.
“अगर हम बराबर नहीं हैं, तो फिर मैं पूछना चाहता हूं – हमने आखिर क्या खता की है?”

किश्तवाड़ में बादल फटने की त्रासदी

सीएम उमर अब्दुल्ला ने अपने भाषण में 14 अगस्त को किश्तवाड़ में हुई प्राकृतिक आपदा का भी जिक्र किया. बादल फटने से आई इस तबाही में अब तक 60 लोगों की मौत हो चुकी है और 100 से ज्यादा लोग घायल हैं.

उन्होंने कहा –
“कई लोग अभी भी लापता हैं और उनके बारे में स्पष्ट आंकड़ा नहीं मिल पाया है. इस घटना की पूरी जांच की जाएगी और यह पता लगाया जाएगा कि कहां लापरवाही हुई.”

उमर अब्दुल्ला ने यह भी सवाल उठाया कि जब मौसम विभाग पहले से चेतावनी दे चुका था, तब भी इतनी बड़ी त्रासदी कैसे हो गई. उन्होंने कहा कि सरकार को इस सवाल का जवाब देना होगा और सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से होने वाले नुकसान को रोका जा सके.

राजनीतिक संदेश और जनता से जुड़ाव

उमर अब्दुल्ला का यह भाषण केवल एक औपचारिक स्वतंत्रता दिवस संबोधन नहीं था. इसमें जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक स्थिति, जनता की भावनाएं और हालिया प्राकृतिक आपदा का दर्द स्पष्ट रूप से झलक रहा था. एक ओर उन्होंने केंद्र सरकार से बराबरी का हक मांगा, तो दूसरी ओर किश्तवाड़ के पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की.

भाषण का सारांश

  1. पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल न होने पर निराशा – सीएम को उम्मीद थी कि पीएम मोदी कोई ऐलान करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

  2. केंद्र से सवाल – “अगर हम बाकी राज्यों के बराबर नहीं हैं, तो हमारी गलती क्या है?”

  3. किश्तवाड़ आपदा पर चिंता – 60 मृतक, 100 से ज्यादा घायल, कई लापता; जांच और जवाबदेही की मांग.

  4. उम्मीद में कमी – उमर अब्दुल्ला ने कहा कि वे निराश नहीं हैं, लेकिन उनकी उम्मीदें कमजोर हुई हैं.

इस पूरे घटनाक्रम ने जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक दिशा और केंद्र-राज्य संबंधों पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है.

On India’s 79th Independence Day, Jammu and Kashmir CM Omar Abdullah voiced disappointment over PM Narendra Modi’s 103-minute Red Fort speech, which did not address restoring J&K’s full statehood. Abdullah questioned the delay, asking, “What fault is ours?” He also expressed concern over the Kishtwar cloudburst disaster that killed 60 people and injured over 100, demanding a thorough investigation. His remarks have reignited debates on Jammu and Kashmir’s political status and the central government’s promises.

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