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ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान में हड़कंप, शहबाज शरीफ का ऐलान – चीन की तर्ज पर बनेगी नई रॉकेट फोर्स कमांड

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AIN NEWS 1 – भारत के ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान की रक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी. भारतीय मिसाइल हमलों के सामने पाकिस्तानी एयर डिफेंस पूरी तरह नाकाम रही. इस शर्मनाक हार के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपने देश के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर एक नई सैन्य इकाई – आर्मी रॉकेट फोर्स कमांड (ARFC) – बनाने की घोषणा की.

ऑपरेशन सिंदूर से हिली पाकिस्तान की नींव

तीन महीने पहले हुए ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना और मिसाइल बलों ने पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों और सैन्य ठिकानों को गहरी चोट पहुंचाई.

  • लश्कर-ए-तैयबा के मुरीदके और जैश-ए-मोहम्मद के बहावलपुर स्थित हेडक्वार्टर को राफेल लड़ाकू विमानों से लॉन्च की गई स्कैल्प मिसाइलों ने तबाह कर दिया.

  • पाकिस्तान के एयरबेस को बर्बाद करने के लिए सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमानों से दागी गई ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें इस्तेमाल हुईं.

  • पाकिस्तान की एयर डिफेंस सिस्टम इन मिसाइलों को डिटेक्ट तक नहीं कर पाई.

भारत ने न केवल हमले में सफलता हासिल की बल्कि पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई को भी नाकाम किया. पाकिस्तानी फतेह मिसाइल को भारत की मीडियम रेंज सर्फेस टू एयर मिसाइल (MRSAM) बराक-8 ने सिरसा के आसमान में ही मार गिराया.

चीन की तर्ज पर नई रॉकेट फोर्स का ऐलान

शहबाज शरीफ ने घोषणा की कि पाकिस्तान अब चीन की PLA रॉकेट फोर्स की तर्ज पर अपनी रॉकेट फोर्स खड़ी करेगा.

  • इस कमांड का उद्देश्य छोटी, मध्यम और लंबी दूरी की मिसाइलों का संचालन और लॉन्च करना होगा.

  • यह थलसेना और वायुसेना से अलग एक स्वतंत्र कमांड होगी.

फिलहाल पाकिस्तान के पास ऐसी कोई पूर्ण सैन्य कमांड नहीं है. देश का छोटा भूगोल होने के कारण पाकिस्तानी सेना कोर-फॉर्मेशन पर आधारित है, जबकि भारत के पास सात अलग-अलग ऑपरेशनल कमांड हैं.

पाकिस्तान की नाकामी और चुनौतियां

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जो सबसे बड़ा सवाल उठा, वह यह था कि पाकिस्तान के पास भारत की तरह उन्नत मिसाइल डिफेंस क्यों नहीं है.

  • भारतीय ब्रह्मोस और स्कैल्प मिसाइलें सुपरसोनिक गति से लक्ष्य तक पहुंचीं और पाकिस्तानी राडार उन्हें पकड़ तक नहीं पाए.

  • जवाबी मिसाइलें भारतीय डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही नष्ट कर दीं.

नई रॉकेट फोर्स बनाने का ऐलान भले ही पाकिस्तान की सैन्य रणनीति में बदलाव दिखाता हो, लेकिन यह देश की कमजोर अर्थव्यवस्था के कारण एक बड़ी चुनौती भी है.

  • पाकिस्तानी सेना के पास पहले से ही ईंधन और गोला-बारूद की भारी कमी है.

  • कई टैंक लंबे समय से खड़े हैं क्योंकि उन्हें चलाने के लिए तेल नहीं है.

  • सैन्य अभ्यास और ट्रेनिंग के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं.

ऐसे में, एक नई और महंगी रॉकेट फोर्स खड़ी करना पाकिस्तान के लिए आर्थिक और लॉजिस्टिक दोनों स्तरों पर कठिन होगा.

भारत की बढ़त और संदेश

ऑपरेशन सिंदूर ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि भारत के पास न केवल अत्याधुनिक हथियार हैं, बल्कि उन्हें प्रभावी तरीके से इस्तेमाल करने की क्षमता भी है.

  • राफेल और सुखोई जैसे आधुनिक लड़ाकू विमानों का संयोजन

  • ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक मिसाइलें

  • और बराक-8 जैसी एडवांस्ड एयर डिफेंस प्रणाली

इन सबने मिलकर पाकिस्तान को करारा संदेश दिया कि भारत अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है.

शहबाज शरीफ का रॉकेट फोर्स कमांड बनाने का ऐलान पाकिस्तान के लिए एक नई शुरुआत हो सकता है, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के सबक यह बताते हैं कि केवल नई कमांड बनाना पर्याप्त नहीं है. तकनीकी क्षमता, प्रशिक्षण और संसाधनों में भारी निवेश करना ही असली चुनौती होगी.

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