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दक्षिण कश्मीर में फिर मंडराए पाकिस्तानी ड्रोन, सेना हाई अलर्ट पर!

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AIN NEWS 1: दक्षिण कश्मीर में एक बार फिर पाकिस्तानी ड्रोन देखे गए हैं, जिससे पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। जानकारी के अनुसार, ये ड्रोन अनंतनाग, बडगाम और श्रीनगर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में देखे गए। यह घटना उस दिन सामने आई है जब भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम की घोषणा हुई है।

ड्रोन देखे जाने की घटनाएं:

भारतीय सेना के सूत्रों के मुताबिक, ड्रोन की गतिविधियां अनंतनाग, बडगाम और श्रीनगर के आसमान में देखी गईं। ये इलाके पहले से ही संवेदनशील माने जाते हैं और सीमा पार से घुसपैठ की कोशिशों के लिए जाने जाते हैं। सेना तुरंत अलर्ट मोड में आ गई है और आसपास के क्षेत्रों में तलाशी अभियान चलाया गया।

पूर्व डीजीपी शेष पॉल वैद्य की प्रतिक्रिया:

इस पूरे मामले पर जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) शेष पॉल वैद्य ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा,

“सेना को 2-3 दिन और मिलने चाहिए थे। पाकिस्तान पहले ही घुटनों पर आ चुका था। अगर हमारे जवानों को कुछ और वक्त मिल जाता तो हम पाकिस्तान को पूरी तरह से हैमर कर सकते थे।”

उनका इशारा स्पष्ट था कि पाकिस्तान की ऐसी नापाक हरकतों से साफ है कि उसकी मंशा शांति की नहीं है, बल्कि वह किसी न किसी तरीके से अशांति फैलाने की कोशिश करता रहता है।

शशि थरूर का ऐतिहासिक संदर्भ:

वरिष्ठ कांग्रेस नेता और सांसद शशि थरूर ने भी पाकिस्तान की वर्तमान स्थिति को लेकर एक ऐतिहासिक दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने कहा,

 “1971 की स्थिति बिल्कुल अलग थी। तब बांग्लादेश खुद भी अपनी आज़ादी की लड़ाई लड़ रहा था। इसलिए भारत ने पाकिस्तान को दो हिस्सों में तोड़ने में सफलता पाई थी। लेकिन आज का समय अलग है और परिस्थिति भी अलग है।”

शशि थरूर के इस बयान से यह संकेत मिलता है कि आज की भौगोलिक और कूटनीतिक स्थितियों में भारत को अलग रणनीति अपनानी होगी।

ISPR के DG अहमद शरीफ पर गंभीर आरोप:

इस बीच, पाकिस्तान की सेना के मीडिया विंग ISPR के प्रमुख मेजर जनरल अहमद शरीफ को लेकर भी एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है।

बताया जा रहा है कि अहमद शरीफ वही व्यक्ति हैं जो UNSC द्वारा नामित आतंकवादी सुल्तान बशीरुद्दीन महमूद के बेटे हैं। यह वही सुल्तान बशीरुद्दीन हैं जो ओसामा बिन लादेन से मिले थे और जिन पर अल-कायदा को परमाणु तकनीक देने की कोशिश का आरोप है।

इस संबंध में राष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान की सेना और आतंकवाद के बीच संबंध पहले भी उजागर होते रहे हैं, लेकिन अब यह मामला और भी गंभीर हो गया है।

सीमा पर बढ़ती चुनौतियां और भारत की तैयारी:

सीमा पर पाकिस्तान की ओर से ड्रोन भेजने की यह रणनीति सिर्फ निगरानी तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे हथियारों की तस्करी, आतंकियों की मदद और खुफिया जानकारी इकट्ठा करने जैसे उद्देश्यों की आशंका रहती है।

भारत की सुरक्षा एजेंसियां इन ड्रोन गतिविधियों को बेहद गंभीरता से ले रही हैं और सीमा पर इलेक्ट्रॉनिक निगरानी प्रणाली को और अधिक मजबूत किया जा रहा है।

सीमा पर ड्रोन की गतिविधियों और पाकिस्तान की पुरानी चालबाजियों को देखते हुए, भारत को पूरी सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। युद्धविराम जैसे प्रयास तभी कारगर हो सकते हैं जब दोनों पक्षों की मंशा शांति की हो। लेकिन जब एक पक्ष लगातार उल्लंघन करता है, तो जवाबी रणनीति ज़रूरी हो जाती है।

इस समय देश को अपनी सुरक्षा एजेंसियों और सेना के साथ मजबूती से खड़ा रहना होगा ताकि दुश्मन की किसी भी चाल का मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके।

Pakistani drones were once again spotted in South Kashmir’s Anantnag, Budgam, and Srinagar regions just after the ceasefire announcement. This has raised major national security concerns, prompting the Indian Army to stay on high alert. Former Jammu and Kashmir DGP Shesh Paul Vaid and political leader Shashi Tharoor have reacted strongly, drawing comparisons with the 1971 India-Pakistan war. Meanwhile, questions have been raised about ISPR DG Ahmed Sharif’s links to known terrorist Sultan Bashiruddin Mehmood. The situation underscores rising tension along the border and the need for vigilance against Pakistani provocations.

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