AIN NEWS 1 नई दिल्ली:  संसद के बजट सत्र के दौरान राजनीतिक माहौल लगातार गर्म बना हुआ है। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को लेकर चल रही चर्चा के बीच संसद में गतिरोध और गहरा गया है। आज शाम करीब 5 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा में इस प्रस्ताव पर अपना जवाब देने वाले हैं। पीएम मोदी का यह भाषण मौजूदा सियासी हालात के लिहाज़ से बेहद अहम माना जा रहा है।

हालांकि, प्रधानमंत्री के जवाब से पहले ही संसद के भीतर विपक्ष और सरकार के बीच टकराव और तीखा हो गया है। सदन में हंगामे, नारेबाजी और कार्यवाही में व्यवधान के चलते विपक्षी दलों के आठ सांसदों को पूरे बजट सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया है। इन सांसदों में कांग्रेस और CPI(M) के सदस्य शामिल हैं।

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस

बजट सत्र की शुरुआत में राष्ट्रपति द्वारा संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित किया गया था। इसके बाद लोकसभा और राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा चल रही है। परंपरा के अनुसार, इस चर्चा के अंत में प्रधानमंत्री दोनों सदनों में सरकार की ओर से जवाब देते हैं।

लोकसभा में आज प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन इसी क्रम का हिस्सा है। माना जा रहा है कि पीएम मोदी अपने भाषण में सरकार की नीतियों, उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं के साथ-साथ विपक्ष के आरोपों का भी जवाब देंगे।

राहुल गांधी को बोलने की अनुमति नहीं मिलने पर विवाद

इस पूरे घटनाक्रम के बीच नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को लगातार दूसरे दिन लोकसभा में बोलने की अनुमति नहीं मिलने से विवाद और बढ़ गया है। कांग्रेस का आरोप है कि विपक्ष की आवाज़ को दबाया जा रहा है और जानबूझकर महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से रोका जा रहा है।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान अपनी बात रखना चाहते थे, लेकिन उन्हें अवसर नहीं दिया गया। इसे लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने सदन में जोरदार विरोध दर्ज कराया।

हंगामे के बाद 8 सांसद निलंबित

लोकसभा में बढ़ते हंगामे और कार्यवाही में बार-बार बाधा के चलते स्पीकर ने कड़ा रुख अपनाया। इसके बाद कांग्रेस और CPI(M) के कुल आठ सांसदों को पूरे बजट सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया।

निलंबन के साथ ही इन सांसदों पर कई तरह की पाबंदियां भी लगा दी गई हैं।

उन्हें सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं होगी

संसदीय समितियों की बैठकों में भाग नहीं ले सकेंगे

सांसदों को मिलने वाले भत्ते भी निलंबन अवधि में नहीं मिलेंगे

सरकार का कहना है कि सदन की गरिमा बनाए रखना ज़रूरी है और बार-बार व्यवधान किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता।

विपक्ष का आरोप: लोकतंत्र पर हमला

विपक्षी दलों ने सांसदों के निलंबन को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया है। कांग्रेस और वाम दलों का कहना है कि यह कदम सरकार की असहिष्णुता को दर्शाता है। उनका आरोप है कि सरकार सवालों से बचने के लिए विपक्ष को चुप कराने की कोशिश कर रही है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि संसद जनता की आवाज़ उठाने का मंच है और विपक्ष का काम सवाल पूछना है। अगर सवाल पूछने पर सांसदों को निलंबित किया जाएगा, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।

सरकार का पक्ष

वहीं, सरकार और सत्तारूढ़ दल भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि विपक्ष जानबूझकर सदन की कार्यवाही बाधित कर रहा है। उनका तर्क है कि चर्चा के लिए पर्याप्त समय दिया जा रहा है, लेकिन विपक्ष केवल हंगामा करना चाहता है।

सरकार का कहना है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर गंभीर और मर्यादित चर्चा होनी चाहिए, न कि नारेबाजी और व्यवधान।

पीएम मोदी के भाषण पर टिकी निगाहें

इन सभी घटनाओं के बीच अब सबकी निगाहें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा में दिए जाने वाले जवाब पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि पीएम मोदी अपने भाषण में विपक्ष के आरोपों का सीधा जवाब देंगे और सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करेंगे।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री का यह भाषण न केवल संसद के भीतर बल्कि देश की राजनीति में भी अहम संदेश देगा। बजट सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच जारी टकराव की दिशा पीएम मोदी के जवाब के बाद काफी हद तक साफ हो सकती है।

आगे क्या?

फिलहाल संसद में गतिरोध खत्म होने के कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिख रहे हैं। विपक्ष सांसदों के निलंबन को वापस लेने की मांग पर अड़ा हुआ है, जबकि सरकार अपने फैसले पर कायम नजर आ रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चल पाएगी या नहीं, यह देखना दिलचस्प होगा।

The Indian Parliament is witnessing a major deadlock during the Budget Session as Prime Minister Narendra Modi is set to address the Lok Sabha on the President’s Address. The suspension of eight opposition MPs, including members from Congress and CPI(M), has intensified the political standoff. With Rahul Gandhi denied the opportunity to speak for the second consecutive day, opposition parties have accused the government of suppressing dissent, making this parliamentary session a key moment in Indian political discourse.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here