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धर्म परिवर्तन के बाद लौटे अपने मूल पंथ में, पीलीभीत के 61 परिवारों ने फिर अपनाया सिख धर्म

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AIN NEWS 1 पीलीभीत, उत्तर प्रदेश: धर्म परिवर्तन के बढ़ते मामलों के बीच पीलीभीत जिले से एक अहम खबर सामने आई है, जहां चार गांवों के कुल 61 परिवारों ने सिख धर्म में वापसी की है। यह कार्यक्रम सोमवार को एक विशाल सिख सम्मेलन के दौरान आयोजित किया गया, जिसमें क्षेत्र के प्रमुख गुरुद्वारों से आए धर्मगुरुओं और उपदेशकों ने हिस्सा लिया।

यह सम्मेलन खासतौर पर उन लोगों को सिख धर्म में वापस लाने के लिए आयोजित किया गया था, जिन्होंने पहले ईसाई धर्म अपना लिया था। आयोजकों के अनुसार, यह ‘घर वापसी’ किसी दबाव में नहीं, बल्कि लोगों की अपनी आस्था और स्वेच्छा से हुई।

 

🔸 धर्म परिवर्तन से वापसी की कहानी

पीलीभीत के जिन चार गांवों के लोगों ने सिख धर्म में वापसी की, उनमें प्रमुख रूप से बिलसंडा, अमरिया, न्यूरिया और बरखेड़ा क्षेत्र के गांव शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इन परिवारों ने कुछ साल पहले विभिन्न कारणों से ईसाई धर्म अपना लिया था।

लेकिन बीते कुछ समय से ये लोग पुनः अपनी मूल धार्मिक पहचान की ओर लौटने की भावना से प्रेरित हो रहे थे। इसी क्रम में उन्होंने स्थानीय गुरुद्वारा कमेटियों से संपर्क किया और अपनी ‘घर वापसी’ की इच्छा जताई।

🔸 सिख सम्मेलन का आयोजन

इस ‘घर वापसी’ कार्यक्रम के लिए एक विशेष सिख सम्मेलन का आयोजन किया गया था, जो पीलीभीत के एक प्रमुख गुरुद्वारे में संपन्न हुआ। सम्मेलन में पंजाब, दिल्ली, लुधियाना और उत्तर प्रदेश के विभिन्न गुरुद्वारों से आए धर्मगुरुओं, प्रचारकों और उपदेशकों ने भाग लिया।

समारोह की शुरुआत अरदास (प्रार्थना) और गुरबाणी कीर्तन से हुई। इसके बाद मंच से धर्मगुरुओं ने सिख धर्म के आदर्शों, इतिहास और मूल सिद्धांतों पर प्रकाश डाला।

 

🔸 धार्मिक अनुशासन और सिख सिद्धांतों की शिक्षा

सभी 61 परिवारों को सिख धर्म के आचार-विचार, गुरु ग्रंथ साहिब के महत्व, और जीवन शैली से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि सिख धर्म समानता, सेवा, सत्य और साहस के सिद्धांतों पर आधारित है, और यह किसी भी प्रकार के भेदभाव के खिलाफ खड़ा होता है।

गुरुद्वारों के प्रतिनिधियों ने यह भी बताया कि धर्म परिवर्तन के बाद बहुत से लोग खुद को संस्कृति से कटे हुए और असहज महसूस करते हैं, ऐसे में सिख समाज उनका खुले दिल से स्वागत करता है।

 

🔸 कार्यक्रम के पीछे की सोच

इस पूरे कार्यक्रम के पीछे एकमात्र उद्देश्य यह था कि जो लोग किसी भ्रम या लालच में आकर अपने मूल धर्म को छोड़ चुके थे, उन्हें पुनः अपनी पहचान और जड़ों से जोड़ा जाए। आयोजकों ने साफ किया कि यह कार्यक्रम किसी भी धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने धर्म के प्रति विश्वास और जुड़ाव की भावना को पुनर्जीवित करने के लिए है।

 

🔸 स्थानीय प्रशासन की भूमिका और माहौल

कार्यक्रम के दौरान शांति और अनुशासन का पूरा ध्यान रखा गया। स्थानीय पुलिस प्रशासन और गुरुद्वारा कमेटी की व्यवस्था से यह सुनिश्चित किया गया कि किसी भी प्रकार का विवाद या असहमति न हो।

सम्मेलन के बाद सभी 61 परिवारों को गुरु ग्रंथ साहिब की प्रतियां, सरोपाव (सम्मान वस्त्र) और धार्मिक साहित्य भेंट किया गया।

 

🔸 समाज में सकारात्मक संदेश

इस आयोजन ने इलाके में सामाजिक और धार्मिक समरसता का संदेश दिया है। जहां एक ओर यह कदम सिख समाज के लिए एक बड़ी खबर है, वहीं यह पूरे देश में धार्मिक एकता और विश्वास को बढ़ावा देने वाला उदाहरण भी बना है।

 

धर्म व्यक्ति की आस्था और पहचान से जुड़ा विषय होता है। जब लोग अपने मूल धर्म में वापस लौटते हैं, तो यह केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण होता है। पीलीभीत में हुए इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि आस्था की डोर जितनी मजबूत होती है, उतनी ही भावनात्मक भी होती है।

सिख धर्म में लौटे इन 61 परिवारों की कहानी आने वाले समय में और लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत बन सकती है।

In a significant religious event in Pilibhit, Uttar Pradesh, 61 families from four villages who had previously converted to Christianity returned to Sikhism during a major religious gathering. This ghar wapsi (homecoming) movement was supported by Sikh leaders and Gurdwaras from across India. The event, marked by spiritual discourse and prayer, aimed at reinstating faith and identity among those who had left the Sikh religion. This case highlights the growing trend of religious conversion and reconversion in India, especially among rural communities.

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