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पीएम मोदी का असम दौरा: “मैं शिवभक्त हूँ, सारा जहर सह लेता हूँ”—घुसपैठियों, कांग्रेस, और ऑपरेशन सिंदूर पर खास बातें

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AIN NEWS 1 | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पूर्वोत्तर मिशन के तहत असम के दरांग जिले पहुंचे, जहाँ उन्होंने रविवार (14 सितंबर 2025) को ₹18,530 करोड़ से अधिक की बुनियादी ढांचा और औद्योगिक परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कई ऐसे विवादित लेकिन भावनात्मक बयान दिए, जो असम के लोगों की आशाओं, शिकायतों और राजनीति का मिश्रण थे। नीचे उनके भाषण की मुख्य बातें क्रमबद्ध, सरल और जीवंत तरीके से प्रस्तुत हैं:

1. “शिवभक्त हूँ, सारा जहर सह लेता हूँ”

मोदी ने कहा कि उन्हें चाहे जितनी भी गालियाँ हों, आलोचनाएँ हों, वह उन्हें सह ले सकते हैं क्योंकि वे भगवान शिव के भक्त हैं। लेकिन किसी और का अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकते। उनका कहना था कि असम और असमवासियों के सम्मान की रक्षा उनकी प्राथमिकता है।

2. कांग्रेस पर आरोप – भूपेन हजारिका के सम्मान के मामले में

उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाया कि उसने असम और उसके महान कलाकार भूपेन हजारिका के सम्मान के मामले में अपमान किया है। मोदी ने बताया कि जब भूपेन हजारिका को भारत रत्न देने की चर्चा हुई थी, तो कांग्रेस अध्यक्ष ने तंज किया कि “मोदी नाचने-गाने वालों को भारत रत्न दे रहा है।” यह टिप्पणी उन्होंने गलत और अपमानजनक बताया।

3. असम का विकास, डबल इंजन सरकार और बदलाव

  • मोदी ने कहा कि असम पहले संघर्षों से जुझ रहा था, लेकिन अब उसकी तस्वीर बदल रही है।

  • उनका दावा है कि असम में विकास दर करीब 13% है, जो सफलता का संकेत है।

  • डबल इंजन सरकार (संघीय + राज्य सरकार) की निष्ठा, योजनाएँ और जनता की भागीदारी उन्हें इस दिशा में आगे ले जा रही है।

4. पूर्वोत्तर का दर्द — 1962 की स्मृति

उन्होंने याद दिलाया कि भारत-चीन युद्ध (1962) के बाद पूर्वोत्तर विशेषकर असम के लोगों पर जो जख्म आए थे, वे आज भी पूरी तरह नहीं भर पाए हैं। इस ऐतिहासिक अनुभव ने लोगों में आज भी असमाजिक और राजनीतिक संवेदनाएँ जगाई हुई हैं।

5. ऑपरेशन सिंदूर और माँ कामाख्या का आशीर्वाद

पीएम मोदी ने कहा कि जन्माष्टमी के अवसर पर माँ कामाख्या के आशीर्वाद से ऑपरेशन सिंदूर सफल रहा। उन्होंने यह भी कहा कि इस पवित्र धरती पर आने से उन्हें एक अलग पुण्य अनुभव हो रहा है। इस तरह उन्होंने धार्मिक और आध्यात्मिक भावनाओं को जोड़ते हुए लोगों के साथ जुड़ने की कोशिश की।

6. स्वदेशी भावना और “मेड इन इंडिया” का आग्रह

मोदी ने सभा में उपस्थित लोगों से अपील की कि वे यथासंभव स्वदेशी उत्पाद खरीदें। उनका कहना था कि यदि कोई उपहार देंगे, तो वह भारत में बने हों, भारत की मिट्टी की खुशबू हो। इससे न सिर्फ स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा, बल्कि अस्मिताभाव भी मजबूत होगा।

पीएम मोदी के इस भाषण में तीन विषय प्रमुखता से दिखे:

  1. सम्मान और असम की पहचान — भूपेन हजारिका, शिवभक्ति, नाराज़ गालियाँ आदि के माध्यम से।

  2. विकास और सरकार की भूमिका — डबल इंजन सरकार, भारी पूँजी निवेश, नई परियोजनाएँ।

  3. धार्मिक एवं सांस्कृतिक भावनाएँ — माँ कामाख्या, जन्माष्टमी, सभ्यता, स्वदेशीपन।

इन बिंदुओं से स्पष्ट है कि मोदी ने वही विषय चुने जो असम के लोगों में गहरी भावनाएँ जगाते हैं — राज्य की पहचान, सम्मान, और विकास की उम्मीद।

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