AIN NEWS 1 वृंदावन: संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की मौत के बाद वृंदावन स्थित श्रीराधा केली कुंज आश्रम से जुड़ी व्यवस्थाओं में बदलाव किया गया है। आश्रम की ओर से सामने आई जानकारी के मुताबिक अब दीक्षा, दर्शन और शिष्यों की वेशभूषा को लेकर कुछ नए नियम लागू किए गए हैं। इन बदलावों के बीच रसिक दुलारी की मौत की पुलिस जांच भी जारी है।
25 सितंबर 2026 को रसिक दुलारी शरण की गुरु कृपा कुंज की चौथी मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई थी। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, CCTV फुटेज तथा अन्य सामग्री को जांच के दायरे में लिया।
मौत के बाद आश्रम की व्यवस्था में बदलाव
रसिक दुलारी की मौत के कुछ दिनों बाद आश्रम से जुड़े प्लेटफॉर्म पर नई व्यवस्था की जानकारी सामने आई। इसके तहत फाइनल दीक्षा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने की बात कही गई है। इसके अलावा आश्रम से जुड़े कुछ स्थानों पर दीक्षित भक्तों के दर्शन और टोकन व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है।
रिपोर्टों के अनुसार यमुना विहार कुंज बेलवन में दीक्षित भक्तों के लिए होने वाली दर्शन व्यवस्था को फिलहाल रोक दिया गया है। वहीं एकांतिक दर्शन और वार्तालाप से जुड़ी व्यवस्था में भी बदलाव की जानकारी सामने आई है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इसका अर्थ पूरे आश्रम या प्रेमानंद महाराज से जुड़ी सभी धार्मिक गतिविधियों के पूरी तरह बंद होने से नहीं है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक बदलाव विशेष रूप से कुछ दर्शन और दीक्षा व्यवस्थाओं को लेकर किए गए हैं।
शिष्यों के पहनावे को लेकर भी नया नियम
आश्रम की नई व्यवस्था में शिष्यों की वेशभूषा को लेकर भी महत्वपूर्ण बदलाव की बात सामने आई है।
रिपोर्टों के अनुसार, वृंदावन में रह रहे कुछ दीक्षित शिष्यों, खासकर गृहस्थ जीवन से जुड़े उन लोगों के लिए जो विरक्त वेश में रहते थे, अब सामान्य कपड़े पहनकर साधना करने के निर्देश दिए गए हैं।
आश्रम से जुड़ी सूचना के मुताबिक सामान्य गृहस्थ शिष्य अब आम लोगों की तरह सामान्य वेश में रहेंगे। कुर्ता-पायजामा जैसे सामान्य वस्त्र पहनने की बात कही गई है। वहीं सफेद या विशेष वेशभूषा का इस्तेमाल साधना या सेवा की निर्धारित जिम्मेदारियों से जुड़े लोगों तक सीमित रखने की जानकारी सामने आई है।
इस बदलाव को आश्रम की मर्यादा और व्यवस्था से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, आश्रम की ओर से इस पूरी व्यवस्था के पीछे विस्तृत कारणों को लेकर सार्वजनिक रूप से बहुत अधिक जानकारी सामने नहीं आई है।
रसिक दुलारी कौन थे?
रसिक दुलारी शरण का वास्तविक नाम दीपक लोधी बताया गया है। वह संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य थे और पिछले कुछ समय से वृंदावन में आश्रम से जुड़े परिसर में रह रहे थे।
25 सितंबर को उनकी मौत के बाद मामला पुलिस जांच के दायरे में आया। घटना को लेकर अलग-अलग सवाल उठे, जिसके बाद पुलिस ने CCTV फुटेज, फॉरेंसिक साक्ष्य और वहां मौजूद लोगों से पूछताछ शुरू की।
पोस्टमार्टम में सामने आईं गंभीर चोटें
मौत के बाद किए गए पोस्टमार्टम में शरीर पर कई गंभीर चोटों की जानकारी सामने आई। रिपोर्टों के मुताबिक सिर सहित शरीर के अन्य हिस्सों में चोटें और अंदरूनी रक्तस्राव पाया गया।
एक रिपोर्ट में सिर पर गंभीर चोट और टांके लगाए जाने का उल्लेख है। पुलिस ने मौत की परिस्थितियों को समझने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट के साथ-साथ घटनास्थल से मिले दूसरे साक्ष्यों को भी जांच में शामिल किया है।
पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जांच में अत्यधिक रक्तस्राव मौत का प्रमुख कारण दिखाई देता है, लेकिन मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे वास्तविक वजह क्या थी, इसे लेकर जांच अभी जारी है।
CCTV और फॉरेंसिक जांच जारी
पुलिस ने मामले में CCTV फुटेज को भी जांच का अहम हिस्सा बनाया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक घटनास्थल और आसपास के कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है।
इसके साथ ही मृतक के मोबाइल, डायरी, फिंगरप्रिंट, ब्लड सैंपल और घटनास्थल से बरामद अन्य सामग्री को जांच में शामिल किया गया है। ब्लड सैंपल को FSL भेजे जाने की भी जानकारी सामने आई है।
पुलिस ने आश्रम से जुड़े लोगों से पूछताछ भी की है। जांच एजेंसियां अलग-अलग बयानों और फॉरेंसिक रिपोर्ट को आपस में मिलाकर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं।
परिवार ने भी निष्पक्ष जांच की मांग की
रसिक दुलारी की मौत के बाद परिवार की ओर से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग किए जाने की खबरें सामने आई हैं। वहीं घटना को लेकर कुछ साधु-संतों और अन्य लोगों की ओर से भी सवाल उठाए गए हैं।
हालांकि, इन सवालों या आशंकाओं को अभी जांच का निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। पुलिस की जांच पूरी होने और संबंधित फॉरेंसिक रिपोर्ट सामने आने के बाद ही मौत की परिस्थितियों को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
आश्रम में अब क्या बदला?
फिलहाल सामने आई जानकारी को आसान भाषा में समझें तो आश्रम से जुड़े प्रमुख बदलाव इस प्रकार हैं—
फाइनल दीक्षा की प्रक्रिया को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया गया है।
कुछ स्थानों पर दीक्षित भक्तों की दर्शन व्यवस्था में बदलाव किया गया है।
टोकन के जरिए होने वाली कुछ दर्शन व्यवस्थाओं पर रोक की जानकारी सामने आई है।
एकांतिक दर्शन और वार्तालाप की व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है।
गृहस्थ और अन्य दीक्षित शिष्यों के पहनावे को लेकर नए निर्देश दिए गए हैं।
विशेष सफेद या पीले वस्त्रों के इस्तेमाल को सीमित करने की जानकारी सामने आई है।
आश्रम की मर्यादा और अनुशासन को लेकर शिष्यों के लिए सख्ती बढ़ाई गई है।
क्या रसिक दुलारी की मौत के कारण ही सभी बदलाव हुए?
उपलब्ध रिपोर्टों में इन बदलावों को रसिक दुलारी की मौत के बाद सामने आई परिस्थितियों से जोड़कर बताया गया है। आश्रम से जुड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी नए निर्देशों की जानकारी प्रसारित हुई है।
लेकिन यह कहना कि इन सभी नियमों का एकमात्र कारण रसिक दुलारी की मौत है, फिलहाल पूरी तरह स्थापित तथ्य नहीं है। आश्रम की व्यवस्था में बदलाव की जानकारी जरूर सामने आई है, लेकिन इसके पीछे प्रबंधन के सभी विस्तृत कारण सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किए गए हैं।
इसी तरह सोशल मीडिया पर घटना को लेकर हत्या या साजिश जैसे कई दावे भी किए जा रहे हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए पुलिस जांच पूरी होने से पहले किसी भी संभावना को अंतिम निष्कर्ष के तौर पर पेश करना उचित नहीं होगा।
प्रेमानंद महाराज फिलहाल कहां हैं?
रिपोर्टों के मुताबिक संत प्रेमानंद महाराज फिलहाल मांट क्षेत्र के बेलवन स्थित यमुना विहार कुंज से जुड़ी व्यवस्था में हैं और एकांतवास में रहने की जानकारी सामने आई है। इस बीच केली कुंज से जुड़े शिष्यों और भक्तों के लिए नए नियमों को लागू किया गया है।
रसिक दुलारी शरण की मौत के बाद वृंदावन के श्रीराधा केली कुंज आश्रम में व्यवस्थाओं को लेकर निश्चित रूप से बदलाव सामने आए हैं। फाइनल दीक्षा पर रोक, दर्शन और टोकन व्यवस्था में बदलाव तथा शिष्यों की वेशभूषा को लेकर नए निर्देश इस बदलाव का हिस्सा हैं।
दूसरी ओर रसिक दुलारी की मौत की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। CCTV फुटेज, फॉरेंसिक जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मोबाइल और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस मामले की पड़ताल कर रही है। इसलिए घटना के कारण या किसी व्यक्ति की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि आश्रम की व्यवस्थाओं में बदलाव की पुष्टि वाली रिपोर्टें सामने आई हैं, जबकि रसिक दुलारी की मौत से जुड़े कई सवालों का जवाब पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
Premanand Maharaj Ashram in Vrindavan has introduced new rules related to diksha, darshan, token-based entry and disciple attire following the death of disciple Rasik Dulari Sharan, also known as Deepak Lodhi. The latest Premanand Maharaj Ashram update includes changes in final initiation and darshan arrangements, while police continue investigating the circumstances surrounding the Vrindavan incident. CCTV footage, forensic evidence, blood samples and other material are being examined as part of the investigation.



















