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राहुल गांधी की स्वीकारोक्ति: “जाति जनगणना न कराना मेरी व्यक्तिगत गलती थी”

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AIN NEWS 1 | कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार, 25 जुलाई 2025 को एक बड़ी स्वीकारोक्ति की। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस सत्ता में थी, तब उनकी सबसे बड़ी गलती यह रही कि जाति जनगणना नहीं कराई गई। उन्होंने इसे व्यक्तिगत चूक माना और साफ कहा कि यह कांग्रेस पार्टी की नहीं, बल्कि उनकी अपनी गलती है।

राहुल गांधी दिल्ली में आयोजित ‘ओबीसी भागीदारी न्याय सम्मेलन’ को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, “मैं 2004 से राजनीति में हूं। इतने सालों में मैंने जहां कुछ अच्छे काम किए, वहीं कुछ कमियां भी रहीं। दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों से जुड़े मसलों को मैं बेहतर ढंग से समझ पाया। महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर भी मैंने काफी ध्यान दिया। लेकिन जब मैं ओबीसी वर्ग की स्थिति पर नजर डालता हूं, तो यह स्पष्ट होता है कि वहां मैं चूक गया।”

उन्होंने साफ कहा कि ओबीसी वर्ग की परेशानियों को समझना आसान नहीं है। जबकि आदिवासी और दलित समाज की दिक्कतें ज्यादा प्रत्यक्ष होती हैं, ओबीसी की समस्याएं बहुत गहराई में छिपी होती हैं। राहुल ने कहा कि अगर उन्हें उस समय ओबीसी वर्ग की स्थितियों और इतिहास की गहरी समझ होती, तो वो सत्ता में रहते हुए ही जातिगत जनगणना करा देते।

“वो समय निकल गया, यह मेरी गलती है। और मैं इस गलती की पूरी जिम्मेदारी लेता हूं। यह कांग्रेस की नहीं, मेरी व्यक्तिगत चूक थी,” राहुल गांधी ने कहा।

उन्होंने इस मौके पर जोर दिया कि अब वह अपनी गलती सुधारने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। राहुल गांधी ने जाति जनगणना को “राजनीतिक भूकंप” करार दिया और कहा कि इसका असर आने वाले समय में देश की राजनीति की दिशा बदल सकता है।

“शायद आपको अभी इसका झटका महसूस नहीं हो रहा, लेकिन इसका असर हो चुका है,” उन्होंने कहा।

राहुल गांधी ने कहा कि 21वीं सदी डेटा की सदी है। आज जिस तरह पहले तेल को ताकत का प्रतीक माना जाता था, आज वही स्थिति डेटा की हो चुकी है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे भी बार-बार डेटा की बात करते हैं, लेकिन असली डेटा कहां है, यह नहीं बताते।

उन्होंने तेलंगाना सरकार की मिसाल देते हुए बताया कि वहां की सरकार के पास इतना विस्तृत डेटा है कि एक मिनट में यह बताया जा सकता है कि राज्य के कॉरपोरेट सेक्टर में ओबीसी और दलितों की कितनी भागीदारी है।

“जब मैं किसी चीज को ठान लेता हूं, तो फिर पीछे नहीं हटता। जाति जनगणना को लेकर भी मेरा यही संकल्प है। आप मेरी बहन प्रियंका गांधी से पूछ सकते हैं,” राहुल ने दृढ़ता से कहा।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस ने ओबीसी वर्ग के इतिहास को मिटाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि दलित, आदिवासी और ओबीसी वर्ग इस देश की असली उत्पादक शक्ति हैं, लेकिन उन्हें उनके हक का फल नहीं मिल पाया।

राहुल गांधी के इस बयान को कई राजनीतिक विश्लेषक एक बड़े राजनीतिक संकेत के तौर पर देख रहे हैं। इससे साफ होता है कि कांग्रेस अब ओबीसी कार्ड को पूरी मजबूती से खेलने की रणनीति बना चुकी है।

उन्होंने सम्मेलन के दौरान यह भी कहा कि कांग्रेस अब इस गलती को सुधारने के लिए पूरी तैयारी में है और जातिगत आंकड़ों को सामने लाकर ओबीसी, दलित और आदिवासी समाज की भागीदारी सुनिश्चित करेगी।

उनके अनुसार, जब तक समाज के सबसे मजबूत और उत्पादक वर्गों को उनका हक नहीं मिलेगा, तब तक सामाजिक न्याय और बराबरी की बात अधूरी रहेगी।

Rahul Gandhi admitted his mistake of not implementing caste census during the Congress regime, calling it a personal failure, not the party’s. At the ‘OBC Participation Justice Conference’, he emphasized the importance of caste census, OBC rights, and social justice in India. He labeled the caste census as a political earthquake that will reshape Indian politics. Rahul committed to correcting this historical oversight and accused BJP-RSS of erasing OBC history. This move signals Congress’s renewed focus on OBC empowerment, data-based governance, and inclusive development.

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