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राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर सीएम योगी का सख्त संदेश: “अपराधी कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा”, 15 दिन में SIT देगी रिपोर्ट

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AIN NEWS 1 | अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की राशि में कथित अनियमितताओं और चोरी के आरोपों को लेकर चल रहे विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को अयोध्या पहुंचकर पहली बार सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि किसी ने अपराध किया है तो उसकी पहचान चाहे जो भी हो, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) अगले 15 दिनों के भीतर पूरी सच्चाई सामने ले आएगी।

राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक बयानबाजी तेज है। विपक्ष लगातार मंदिर प्रशासन और सरकार पर सवाल उठा रहा है, जबकि मंदिर ट्रस्ट और सरकार आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की बात कह रहे हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोगों से धैर्य रखने और जांच पूरी होने तक अनावश्यक टिप्पणी करने से बचने की अपील की है।

“SIT दूध का दूध, पानी का पानी कर देगी”

अयोध्या में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर सरकार ने SIT का गठन किया है। यह जांच पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ की जा रही है।

उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति या संगठन के पास इस मामले से जुड़ा कोई प्रमाण है, तो वह उसे SIT के सामने प्रस्तुत करे। जांच एजेंसी सभी तथ्यों और सबूतों के आधार पर निष्कर्ष निकालेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और किसी भी व्यक्ति को ऐसा बयान नहीं देना चाहिए जिससे रामभक्तों की भावनाएं आहत हों। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच पूरी होने के बाद सभी तथ्य सार्वजनिक किए जाएंगे।

रामभक्तों से संयम बरतने की अपील

मुख्यमंत्री योगी ने रामभक्तों से विशेष अपील करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम ने मर्यादा और धैर्य का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए समाज ने लगभग 500 वर्षों तक संघर्ष किया है, इसलिए कुछ दिनों का इंतजार और किया जा सकता है।

उन्होंने कहा, “15 दिन और प्रतीक्षा कर लीजिए। चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। यदि किसी ने कोई अपराध किया है तो वह कानून के शिकंजे से नहीं बच पाएगा।”

मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि वे अफवाहों और भ्रामक प्रचार से बचें तथा जांच प्रक्रिया पर विश्वास बनाए रखें।

विपक्ष पर साधा निशाना

अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी दलों, विशेषकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला।

उन्होंने कहा कि आज जो लोग रामभक्तों के सम्मान और राम मंदिर की चिंता की बात कर रहे हैं, वही लोग पहले राम मंदिर आंदोलन का विरोध करते थे। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि राम मंदिर निर्माण को रोकने के लिए कांग्रेस ने हर संभव प्रयास किया था और अदालत में भी भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाए गए थे।

उन्होंने कहा कि जो राजनीतिक दल कभी रामभक्तों और कारसेवकों पर गोली चलाने के आरोपों से घिरे रहे, वे आज रामभक्तों के हितैषी बनने का प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इसे विपक्ष का “दोहरे चरित्र” वाला रवैया बताया।

“अयोध्या धाम को बदनाम करने की साजिश”

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल और समूह अयोध्या की बढ़ती प्रतिष्ठा से परेशान हैं और जानबूझकर शहर तथा राम मंदिर की छवि खराब करने का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पहले अयोध्या को मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित रखा गया था, जबकि आज यह विश्वस्तरीय धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। ऐसे में कुछ लोग दुष्प्रचार के माध्यम से अयोध्या की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जनता को ऐसे प्रयासों से सावधान रहना चाहिए और बिना तथ्यों के किसी भी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए।

कैसे शुरू हुआ चढ़ावा चोरी का विवाद?

राम मंदिर चढ़ावा विवाद तब चर्चा में आया जब समाजवादी पार्टी सरकार में मंत्री रह चुके पवन पांडेय ने दावा किया कि राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे में करोड़ों रुपये की अनियमितता हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग 5 करोड़ से 7.5 करोड़ रुपये तक की राशि में गड़बड़ी हुई है।

इसके बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि मामले में सरकार की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। उन्होंने इस मामले की न्यायिक निगरानी में जांच की मांग की थी।

हालांकि, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अब तक किसी प्रकार की चोरी या वित्तीय गड़बड़ी का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है।

प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचा मामला

विवाद बढ़ने के बाद भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग की थी।

इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने भी मंदिर ट्रस्ट से इस पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी। इसके बाद जांच प्रक्रिया और तेज हो गई तथा राज्य सरकार ने SIT के माध्यम से मामले की गहन जांच शुरू कर दी।

अब तक क्या कार्रवाई हुई?

जांच के दौरान अब तक पांच लोगों के नाम सामने आने की बात कही जा रही है। इनमें लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू शामिल हैं। ये सभी किसी न किसी रूप में मंदिर में आने वाली दान राशि की गिनती और प्रबंधन से जुड़े बताए जा रहे हैं।

जांच एजेंसियों के अनुसार अब तक लगभग 2 करोड़ रुपये की राशि बरामद की जा चुकी है। वहीं मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कर्मचारी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के घर से सोना मिलने की भी जानकारी सामने आई है। हालांकि बरामद सोने की मात्रा और उसका स्रोत अभी जांच का विषय बना हुआ है।

SIT की जांच में अब तक क्या हुआ?

पहला दिन

SIT ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और आमंत्रित सदस्य गोपाल राव से पूछताछ की। साथ ही संदेह के दायरे में आए कर्मचारियों से कई घंटों तक सवाल-जवाब किए गए।

दूसरा दिन

जांच टीम ने चंपत राय और गोपाल राव से दोबारा विस्तृत पूछताछ की और वित्तीय प्रक्रियाओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझा।

तीसरा दिन

बैंक अधिकारियों और नोटों की गिनती से जुड़ी निजी एजेंसी के प्रतिनिधियों से पूछताछ की गई। इस दौरान बैंक रिकॉर्ड, जमा प्रक्रिया और वित्तीय दस्तावेजों की जांच भी की गई।

चौथा दिन

SIT ने मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र से कई घंटों तक पूछताछ की। दान राशि की गिनती, रिकॉर्ड रखने की प्रक्रिया, बैंक में जमा कराने की व्यवस्था और कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़े पहलुओं पर जानकारी जुटाई गई। इसके अलावा रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू से भी पूछताछ कर विभिन्न बयानों का मिलान किया गया।

15 दिन में सामने आ सकती है पूरी तस्वीर

राम मंदिर चढ़ावा विवाद फिलहाल राजनीतिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर विपक्ष मामले में पारदर्शिता की मांग कर रहा है, वहीं सरकार और मंदिर ट्रस्ट जांच पूरी होने तक धैर्य रखने की अपील कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कर दिया है कि जांच में यदि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी या चोरी साबित होती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब सभी की नजरें SIT की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके अगले 15 दिनों में आने की संभावना जताई जा रही है।

रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि चढ़ावे की राशि में वास्तव में कोई अनियमितता हुई थी या नहीं, और यदि हुई तो उसके लिए जिम्मेदार कौन है।

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