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चंपत राय को पहले से था चढ़ावा चोरी का शक? 5 जून के CCTV फुटेज से बड़ा खुलासा, एफआईआर से पहले हुई थी कार्रवाई!

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AIN NEWS 1 | अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की जांच में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। अब सामने आई जानकारी से संकेत मिलते हैं कि मंदिर ट्रस्ट को कथित गड़बड़ी की भनक औपचारिक एफआईआर दर्ज होने से पहले ही लग चुकी थी। सूत्रों के मुताबिक, 5 जून को ट्रस्ट के निर्देश पर पुलिस ने आरोपी अविनाश शुक्ला के ठिकाने पर कार्रवाई की थी। इसी कार्रवाई का एक 24 सेकंड का CCTV फुटेज भी सामने आया है, जिसमें पुलिस आरोपी को हिरासत में लेकर जाती हुई दिखाई दे रही है।

हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि पुलिस या श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से नहीं की गई है। मामले की जांच अभी जारी है।

5 जून को हुई थी शुरुआती कार्रवाई

सूत्रों के अनुसार, 5 जून 2026 को ट्रस्ट के प्रतिनिधियों के साथ पुलिस टीम ने आरोपी अविनाश शुक्ला के ठिकाने पर छापेमारी की थी। बताया जा रहा है कि कार्रवाई के दौरान अविनाश शुक्ला को हिरासत में लिया गया और उसके पास से नकदी भी बरामद की गई।

दिलचस्प बात यह है कि उस समय तक इस मामले में ट्रस्ट की ओर से कोई औपचारिक एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई थी। बाद में 7 जून को मामला सार्वजनिक रूप से सामने आया।

CCTV फुटेज में क्या दिखाई दिया?

सामने आए 24 सेकंड के CCTV फुटेज का समय 5 जून 2026 की रात 8 बजकर 13 मिनट बताया जा रहा है।

फुटेज में पुलिसकर्मी और कुछ अन्य लोग आरोपी अविनाश शुक्ला को पकड़कर सफेद रंग की कार की ओर ले जाते दिखाई देते हैं। वीडियो में अविनाश के हाथ में एक काला बैग भी नजर आता है।

सूत्रों का दावा है कि इसी बैग में बरामद नकदी रखी गई थी। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

करीब 5 लाख रुपये बरामद होने का दावा

सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपी अविनाश शुक्ला के पास से लगभग पांच लाख रुपये नकद बरामद किए थे।

फिलहाल पुलिस ने इस बरामदगी को लेकर सार्वजनिक रूप से विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है। जांच एजेंसियां मामले से जुड़े सभी वित्तीय पहलुओं की जांच कर रही हैं।

सभी आठ आरोपियों के घरों पर फिर हुई छापेमारी

रविवार को पुलिस ने मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों के घरों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। स्थानीय मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में हुई इस कार्रवाई के दौरान कई अहम दस्तावेज और जेवरात बरामद किए गए।

पुलिस अब इन दस्तावेजों और संपत्तियों का सत्यापन कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनकी खरीद का स्रोत क्या है और कहीं इनका संबंध कथित चोरी की रकम से तो नहीं है।

किन-किन आरोपियों के घर हुई तलाशी?

पुलिस टीम ने लव कुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, रामाशंकर उर्फ टिन्नू यादव, मनीष यादव समेत अन्य आरोपियों के घरों की तलाशी ली।

तलाशी के दौरान—

  • जेवरात बरामद किए गए।
  • प्रॉपर्टी से जुड़े दस्तावेज मिले।
  • बैंकिंग रिकॉर्ड जब्त किए गए।
  • आधार कार्ड और पैन कार्ड सहित कई पहचान संबंधी दस्तावेज कब्जे में लिए गए।
  • परिवार के सदस्यों से पूछताछ की गई।

बताया गया कि कुछ घर बंद होने के कारण पुलिस ने परिजनों की मौजूदगी में ताले खुलवाकर तलाशी ली।

पड़ोसियों और रिश्तेदारों से भी पूछताछ

जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने आरोपियों के पड़ोसियों और रिश्तेदारों से भी बातचीत की। अधिकारियों ने आरोपियों की आर्थिक स्थिति, संपत्ति, सामाजिक पृष्ठभूमि और हाल के वर्षों में हुई गतिविधियों की जानकारी जुटाई।

पुलिस यह भी जांच रही है कि क्या आरोपियों की संपत्ति में हाल के समय में असामान्य वृद्धि हुई थी।

अब तक आठ आरोपी गिरफ्तार

मामले में अब तक कुल आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें—

  • अविनाश शुक्ला
  • अनुकल्प मिश्रा
  • लव कुश मिश्रा
  • मनीष कुमार यादव
  • करुणेश पांडेय
  • राम शंकर मिश्रा
  • सुभाष श्रीवास्तव
  • रामाशंकर उर्फ टिन्नू यादव

शामिल हैं।

पुलिस के अनुसार, ये सभी राम मंदिर में चढ़ावे के रूप में प्राप्त नकदी और कीमती सामान की गिनती तथा उससे जुड़े कार्यों में किसी न किसी रूप में जुड़े हुए थे।

79.85 लाख रुपये की बरामदगी

पुलिस के मुताबिक, अब तक की कार्रवाई में आरोपियों के विभिन्न ठिकानों से कुल 79.85 लाख रुपये बरामद किए जा चुके हैं।

मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की चोरी, आपराधिक विश्वासघात, चोरी की संपत्ति रखने और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं के अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।

यह एफआईआर विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर दर्ज की गई थी। उत्तर प्रदेश सरकार ने मंदिर फंड में कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद इस मामले की जांच के लिए SIT का गठन किया था।

जांच जारी, रिमांड की तैयारी

सभी आठ आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। माना जा रहा है कि अगली अदालत पेशी के दौरान पुलिस उनसे विस्तृत पूछताछ के लिए कस्टडी रिमांड की मांग कर सकती है।

जांच एजेंसियां अब CCTV फुटेज, बरामद नकदी, बैंक रिकॉर्ड, संपत्ति के दस्तावेज, मोबाइल डेटा और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं। मामले में आगे होने वाली कार्रवाई जांच और अदालत की कार्यवाही के आधार पर तय होगी।

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