राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: SIT दोबारा पहुंची अयोध्या, आरोपियों के घरों पर बुलडोजर की तैयारी, ट्रस्ट से जुड़े लोगों से पूछताछ तेज
AIN NEWS 1: अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। जांच को तेज करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गुरुवार को एक बार फिर अयोध्या पहुंची। इससे पहले भी टीम 15 से 20 जून के बीच कई दिनों तक जांच कर चुकी थी। अब जांच का दूसरा चरण शुरू हो गया है, जिसमें मंदिर की व्यवस्था, चढ़ावा गिनने की प्रक्रिया और ट्रस्ट से जुड़े लोगों की भूमिका की विस्तार से पड़ताल की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक SIT की टीम मंदिर परिसर में मौजूद दस्तावेजों, रिकॉर्ड और कर्मचारियों से पूछताछ कर रही है। इस दौरान मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा से भी पूछताछ होने की संभावना जताई जा रही है।

अयोध्या पुलिस ने भी मंदिर पहुंचकर की जांच
SIT के अलावा अयोध्या पुलिस भी गुरुवार सुबह करीब 11 बजे राम मंदिर पहुंची। पुलिस अधिकारियों ने लगभग दो घंटे तक मंदिर परिसर में जांच की। विशेष रूप से उस कमरे का निरीक्षण किया गया, जहां श्रद्धालुओं के चढ़ावे की गिनती की जाती है।
जांच के दौरान अधिकारियों ने कर्मचारियों से पूरी प्रक्रिया की जानकारी ली। यह समझने की कोशिश की गई कि चढ़ावे की सुरक्षा कैसे होती थी, किसकी क्या जिम्मेदारी थी और गिरफ्तार किए गए आरोपियों की मंदिर की व्यवस्था में कितनी भूमिका थी।
सूत्रों के अनुसार जांच का नेतृत्व क्षेत्राधिकारी (CO) आशुतोष तिवारी ने किया।
आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी
जांच के साथ-साथ प्रशासन अब आरोपियों की संपत्तियों की भी जांच कर रहा है। अयोध्या विकास प्राधिकरण (ADA) ने उन भवनों की पहचान कर ली है, जहां निर्माण नियमों के उल्लंघन की आशंका है।
बताया जा रहा है कि आरोपी लवकुश मिश्रा का शहादतगंज स्थित निर्माणाधीन मकान और अनुकल्प मिश्रा का कौशलपुरी स्थित मकान प्रशासन की कार्रवाई की जद में हैं। यदि जांच में निर्माण नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो इन भवनों पर बुलडोजर कार्रवाई की जा सकती है।
ADA ने लवकुश मिश्रा की पत्नी सुप्रिया मिश्रा को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
वकीलों का प्रदर्शन, ट्रस्ट पदाधिकारियों पर FIR की मांग
इस पूरे मामले को लेकर अयोध्या में अधिवक्ताओं का आक्रोश भी देखने को मिला। गुरुवार सुबह करीब 500 से अधिक वकील सड़कों पर उतर आए और राम जन्मभूमि परिसर से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने मंदिर ट्रस्ट के महासचिव रहे चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा, गोपाल राव समेत अन्य लोगों पर FIR दर्ज करने की मांग की। इसके बाद वकीलों ने सिविल लाइन चौकी पहुंचकर लिखित शिकायत भी दी।
फैजाबाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा ने कहा कि अब यह मामला केवल चोरी का नहीं बल्कि जवाबदेही का भी है। दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए।
केजरीवाल ने उठाए सवाल
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी इस मामले को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि राम मंदिर जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल पर यदि इतना बड़ा घोटाला हुआ है तो इसकी जानकारी सरकार को पहले क्यों नहीं हुई।
उन्होंने आरोप लगाया कि जब मामला सार्वजनिक हुआ तब लोगों का ध्यान भटकाने के लिए SIT का गठन किया गया। हालांकि इन आरोपों पर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
मंत्री ए.के. शर्मा का बयान
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ए.के. शर्मा ने कहा कि श्रीराम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। यदि व्यवस्था में कहीं कोई कमी रही होगी तो उसे दूर किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता निष्पक्ष जांच है और जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
आरोपी अविनाश शुक्ला से होगी गहन पूछताछ
चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार आरोपी अविनाश शुक्ला को पुलिस रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है। इसके लिए गुरुवार को कोर्ट में रिमांड अर्जी दाखिल की गई।
इससे पहले पुलिस जेल जाकर भी उससे पूछताछ कर चुकी है। जांच के दौरान उसके योग केंद्र से एक लोहे का संदूक बरामद हुआ था, जिस पर “रामराज्य कोष” लिखा था। पुलिस इस बरामदगी को जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रही है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि अब तक की जांच में अविनाश शुक्ला की भूमिका सबसे अहम आरोपियों में सामने आई है।
कैसे सामने आया मामला?
राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला पहली बार 7 जून को सामने आया था। शुरुआती जांच के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को SIT का गठन किया।
इसके बाद 25 जून को इस मामले में FIR दर्ज की गई और पुलिस ने रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू सहित कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया।
इसी दिन मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि जांच एजेंसियां उनके इस्तीफे और पूरे घटनाक्रम के बीच संबंधों की भी जांच कर रही हैं।
पड़ोसियों ने भी जताई नाराजगी
मुख्य आरोपी लवकुश मिश्रा के निर्माणाधीन मकान के पड़ोसियों ने भी इस मामले पर नाराजगी जाहिर की।
स्थानीय निवासी राजकुमार पांडे ने बताया कि मकान का निर्माण पिछले वर्ष फरवरी में शुरू हुआ था और लवकुश समय-समय पर निर्माण कार्य देखने आता था। उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है और यदि किसी ने चढ़ावे में गड़बड़ी की है तो उसे किसी भी हालत में माफ नहीं किया जाना चाहिए।
जांच का अगला चरण
अब SIT की नजर मंदिर की पूरी वित्तीय व्यवस्था, चढ़ावा गिनने की प्रक्रिया, रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, कर्मचारियों की भूमिका और गिरफ्तार आरोपियों के नेटवर्क पर है। साथ ही ट्रस्ट से जुड़े अधिकारियों से पूछताछ और आरोपियों की संपत्तियों की जांच भी आगे बढ़ाई जा रही है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे और लोगों से पूछताछ या नई कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला अब केवल चोरी की जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही, ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और वित्तीय पारदर्शिता से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। एक ओर SIT और पुलिस लगातार जांच में जुटी हैं, वहीं दूसरी ओर आरोपियों की संपत्तियों पर कार्रवाई, वकीलों का प्रदर्शन और राजनीतिक बयानबाजी इस मामले को और अधिक संवेदनशील बना रही है। आने वाले दिनों में SIT की रिपोर्ट और पुलिस जांच से इस पूरे प्रकरण में कई नए तथ्य सामने आने की संभावना है।
The Ram Mandir Donation Theft Case has become one of the biggest headlines in Uttar Pradesh as the Special Investigation Team (SIT) intensifies its probe in Ayodhya. The investigation includes questioning temple officials, examining the donation counting process, police interrogation of key suspects, possible bulldozer action against illegally constructed properties, and growing political reactions. Stay updated with the latest developments in the Ram Mandir Donation Theft investigation, Ayodhya Police action, and Uttar Pradesh government updates.


















