AIN NEWS 1: रांची में पुलिस तंत्र की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। चैनपुर थाना प्रभारी शैलेश कुमार को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। हैरानी की बात यह है कि शैलेश कुमार ने थाना प्रभारी का पद संभालने के महज 96 घंटे के भीतर ही भ्रष्टाचार का रास्ता अपना लिया।
यह मामला सिर्फ रिश्वतखोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस व्यवस्था की सच्चाई को भी उजागर करता है, जिसमें गरीब और कमजोर लोगों को डराकर उनसे अवैध वसूली की जाती है।
कैसे सामने आया पूरा मामला
इस पूरे मामले की शुरुआत एक गरीब ग्रामीण जयपाल नायक की शिकायत से हुई। जयपाल नायक ने बताया कि पुलिस अधिकारी उससे निजी काम के बदले पैसे मांग रहे थे। आरोप है कि चैनपुर के पूर्व थाना प्रभारी अशोक कुमार और वर्तमान थाना प्रभारी शैलेश कुमार ने उससे निजी मकान के लिए ईंट पकाने के एवज में रिश्वत मांगी थी।
जयपाल नायक का कहना है कि जब उसने पैसे देने से इनकार किया, तो पुलिस की ओर से उसे लगातार परेशान किया जाने लगा। कभी थाने बुलाया जाता, तो कभी बेवजह पूछताछ की जाती। इस मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर आखिरकार उसने रांची स्थित एसीबी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई।
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ACB की योजना और कार्रवाई
शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने पूरे मामले की गंभीरता से जांच की। प्राथमिक जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद एसीबी ने जाल बिछाने का फैसला किया। तय योजना के तहत शिकायतकर्ता जयपाल नायक को रिश्वत की रकम लेकर थाना प्रभारी के आवास पर भेजा गया।
जैसे ही शैलेश कुमार ने 30 हजार रुपये की रिश्वत स्वीकार की, एसीबी की टीम ने मौके पर छापा मारकर उन्हें रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के दौरान रिश्वत की रकम भी बरामद कर ली गई।
96 घंटे में भ्रष्टाचार की शुरुआत
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शैलेश कुमार ने थाना प्रभारी का पद संभालने के सिर्फ चार दिन के भीतर ही रिश्वत लेना शुरू कर दिया। आमतौर पर जनता को उम्मीद होती है कि नया अधिकारी ईमानदारी से काम करेगा, लेकिन इस घटना ने उन उम्मीदों को गहरा झटका दिया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर किसी अधिकारी का रवैया शुरुआत से ही ऐसा हो, तो आम आदमी न्याय की उम्मीद किससे करे?
पूर्व थाना प्रभारी की भूमिका भी जांच के घेरे में
एसीबी सूत्रों के अनुसार, इस मामले में पूर्व थाना प्रभारी अशोक कुमार की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। आरोप है कि रिश्वत मांगने की शुरुआत उन्हीं के कार्यकाल में हुई थी और बाद में शैलेश कुमार ने इसे आगे बढ़ाया।
अब एसीबी इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या दोनों अधिकारियों के बीच आपसी सांठगांठ थी और इससे पहले भी इस तरह की वसूली की गई थी या नहीं।
गरीब ग्रामीणों पर दबाव बनाने का आरोप
जयपाल नायक जैसे पीड़ितों का कहना है कि पुलिस का डर दिखाकर उनसे निजी काम करवाया जाता है। गरीब लोग कानूनी प्रक्रिया से अनजान होते हैं, इसलिए वे अक्सर डर के मारे चुप रहते हैं। लेकिन इस बार जयपाल ने हिम्मत दिखाई और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई।
उनकी शिकायत के बाद हुई कार्रवाई ने यह साबित कर दिया कि अगर नागरिक साहस दिखाएं, तो भ्रष्ट अधिकारियों को कानून के कटघरे तक लाया जा सकता है।
ACB की कार्रवाई से क्या संदेश गया?
एसीबी की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। यह स्पष्ट करता है कि चाहे अधिकारी कितना भी नया या ताकतवर क्यों न हो, कानून से ऊपर कोई नहीं है।
हालांकि, यह सवाल भी उठता है कि ऐसे मामले सामने आने के बाद भी भ्रष्टाचार क्यों नहीं रुक रहा। क्या केवल गिरफ्तारी ही समाधान है, या पुलिस व्यवस्था में व्यापक सुधार की जरूरत है?
आगे की कानूनी प्रक्रिया
शैलेश कुमार को गिरफ्तार करने के बाद एसीबी उन्हें कोर्ट में पेश करेगी और रिमांड की मांग कर सकती है। पूछताछ के दौरान यह जानने की कोशिश होगी कि क्या उन्होंने इससे पहले भी किसी से रिश्वत ली है और क्या इस नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल हैं।
यदि आरोप साबित होते हैं, तो उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कड़ी सजा हो सकती है।
जनता की प्रतिक्रिया
इस घटना के बाद इलाके में चर्चा का माहौल है। लोग पुलिस पर भरोसे की बात कर रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं कि जब कानून के रखवाले ही कानून तोड़ने लगें, तो आम नागरिक कहां जाए।
कई सामाजिक संगठनों ने एसीबी की कार्रवाई की सराहना की है और मांग की है कि ऐसे मामलों में सख्त और तेज कार्रवाई होनी चाहिए।
The Ranchi police bribery case has once again highlighted corruption within the law enforcement system in Jharkhand. The arrest of Chainpur SHO Shailesh Kumar by ACB Jharkhand for accepting a bribe of Rs 30,000 within just 96 hours of assuming office has shocked the public. This police corruption case in Ranchi exposes how vulnerable citizens are harassed and pressured for illegal payments, raising serious concerns about accountability and governance in the police department.


















