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संभल 1978 दंगा पीड़ित रस्तोगी परिवार को 48 साल बाद मिलेगा न्याय, प्रशासन सौंपेगा जमीन का पट्टा!

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संभल में 48 साल बाद न्याय की नई शुरुआत: 1978 दंगा पीड़ित रस्तोगी परिवार को मिलेगा जमीन का पट्टा

AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में 3 जून 2026 का दिन एक ऐसे परिवार के लिए ऐतिहासिक साबित होने जा रहा है, जो लगभग आधी सदी से न्याय और अपने अधिकारों की प्रतीक्षा कर रहा था। वर्ष 1978 में हुए सांप्रदायिक दंगे के दौरान अपने परिवार के मुखिया को खोने और शहर छोड़ने पर मजबूर हुए रस्तोगी परिवार को अब दोबारा संभल में बसाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। जिला प्रशासन इस परिवार को सरकारी भूमि का पट्टा सौंपेगा, जिससे वे वर्षों बाद अपने मूल शहर में नई शुरुआत कर सकेंगे।

48 वर्षों के इंतजार के बाद मिला न्याय

संभल प्रशासन ने 1978 के दंगों में प्रभावित हुए रस्तोगी परिवार के पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी कर ली है। जिला प्रशासन की ओर से शेर खा सराय क्षेत्र में स्थित 100 वर्गमीटर भूमि का पट्टा परिवार को दिया जाएगा। यह वही जमीन है, जिसे प्रशासन ने हाल ही में अवैध कब्जे से मुक्त कराया था।

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार भूमि हस्तांतरण से पहले विधि-विधान के साथ भूमि पूजन और हवन कराया जाएगा। इसके बाद परिवार को आधिकारिक रूप से भूमि का स्वामित्व प्रदान किया जाएगा। इस कार्यक्रम में जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे।

1978 के दंगों में हुई थी परिवार के मुखिया की हत्या

रस्तोगी परिवार की पीड़ा की कहानी करीब पांच दशक पुरानी है। वर्ष 1978 में संभल में भड़के सांप्रदायिक दंगों के दौरान मोहल्ला कोटपूर्वी निवासी राम सरन दास रस्तोगी को दंगाइयों ने निशाना बनाया था। बताया जाता है कि उनकी दुकान पर ही निर्मम हत्या कर दी गई थी।

परिजनों के अनुसार हत्या के बाद उनके शव के साथ भी अमानवीय व्यवहार किया गया। इस दर्दनाक घटना ने पूरे परिवार को भय और असुरक्षा के माहौल में धकेल दिया। हालात इतने खराब हो गए कि परिवार को अपना घर, कारोबार और शहर छोड़कर दिल्ली में जाकर बसना पड़ा।

मुख्यमंत्री से लगाई थी न्याय की गुहार

कई वर्षों तक विस्थापन का जीवन जीने के बाद रस्तोगी परिवार ने हाल के महीनों में उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन से संपर्क किया। परिवार के सदस्यों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिला प्रशासन के सामने अपनी पीड़ा रखी और संभल में दोबारा बसने की इच्छा जताई।

परिवार ने बताया कि दंगों के बाद उनकी संपत्तियों पर कब्जा हो गया था और उन्हें अपने ही शहर से पलायन करना पड़ा। उन्होंने सरकार से न्याय और पुनर्वास की मांग की थी।

मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद तेज हुई कार्रवाई

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुछ समय पहले सार्वजनिक मंच से इस मामले का उल्लेख किया था। उन्होंने कहा था कि दंगा पीड़ित परिवार ने उनसे मिलकर अपनी संपत्ति और अधिकार वापस दिलाने की मांग की थी। मुख्यमंत्री ने परिवार को न्याय दिलाने और उनकी समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया था।

इसके बाद संभल प्रशासन ने मामले को प्राथमिकता पर लेते हुए आवश्यक कार्रवाई शुरू की। राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीमों ने भूमि का रिकॉर्ड खंगाला और क्षेत्र की पैमाइश कराई। जांच में सामने आया कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा किया गया था।

अवैध कब्जा हटाकर जमीन कराई गई खाली

प्रशासन ने शेर खा सराय क्षेत्र में स्थित सरकारी भूमि को कब्जा मुक्त कराने के लिए अभियान चलाया। अधिकारियों की निगरानी में भूमि की पैमाइश की गई और अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई की गई।

इस प्रक्रिया के बाद जमीन को पूरी तरह प्रशासनिक नियंत्रण में लिया गया। भूमि को समतल कर पुनर्वास के लिए तैयार किया गया ताकि रस्तोगी परिवार को बिना किसी विवाद के उसका स्वामित्व सौंपा जा सके।

पुनर्वास से जुड़े सामाजिक और प्रशासनिक संदेश

विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक परिवार को जमीन देने का मामला नहीं है, बल्कि लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे दंगा पीड़ितों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश भी है। प्रशासन की यह पहल दर्शाती है कि वर्षों पुराने मामलों में भी यदि पीड़ित पक्ष अपनी बात रखे और सरकार इच्छाशक्ति दिखाए, तो समाधान संभव है।

यह कदम उन परिवारों के लिए भी उम्मीद की किरण माना जा रहा है, जो विभिन्न कारणों से विस्थापन का जीवन जी रहे हैं और अपने अधिकारों की बहाली की मांग कर रहे हैं।

प्रशासन ने पूरी की तैयारियां

जिला प्रशासन ने भूमि हस्तांतरण समारोह की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। अधिकारियों के अनुसार पट्टा वितरण की प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी और राजस्व अभिलेखों के अनुरूप की जा रही है। कार्यक्रम के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों के साथ भूमि पूजन किया जाएगा और उसके बाद परिवार को भूमि संबंधी दस्तावेज सौंपे जाएंगे।

प्रशासन का कहना है कि यह कदम केवल पुनर्वास नहीं बल्कि न्याय की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

संभल के लिए ऐतिहासिक दिन

3 जून का दिन संभल के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज हो सकता है। लगभग 48 वर्ष पहले हुए दंगे की पीड़ा झेलने वाले परिवार को अब अपने शहर में फिर से बसने का अवसर मिलने जा रहा है। लंबे संघर्ष, प्रशासनिक कार्रवाई और सरकारी हस्तक्षेप के बाद रस्तोगी परिवार को जो अधिकार मिलने जा रहा है, उसे न्याय और पुनर्वास की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

यह घटना बताती है कि समय भले ही बीत जाए, लेकिन न्याय की उम्मीद खत्म नहीं होती। संभल में होने जा रही यह पहल न केवल एक परिवार के लिए नई शुरुआत है, बल्कि उन तमाम लोगों के लिए भी एक संदेश है जो वर्षों से अपने अधिकारों और सम्मान की लड़ाई लड़ रहे हैं।

संभावित खबर का फोकस

48 साल बाद दंगा पीड़ित परिवार को न्याय

संभल प्रशासन देगा 100 वर्गमीटर जमीन का पट्टा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आश्वासन के बाद हुई कार्रवाई

अवैध कब्जा हटाकर कराया गया पुनर्वास

1978 दंगा पीड़ित परिवार की घर वापसी का रास्ता साफ

The Sambhal administration is set to provide land ownership rights to the family of a victim killed during the 1978 Sambhal riots. After nearly five decades, the Uttar Pradesh government has reclaimed illegally occupied government land and allocated a 100-square-meter plot to the displaced Rastogi family. The initiative, supported by Chief Minister Yogi Adityanath, is being viewed as a significant step toward justice, rehabilitation, and the restoration of rights for riot-affected families in Sambhal.

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