AIN NEWS 1 | संभल जिले में जामा मस्जिद सर्वे को लेकर भड़की हिंसा अब कानूनी मोड़ ले चुकी है। अदालत ने इस गंभीर मामले में समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क समेत 23 आरोपियों के खिलाफ समन जारी किया है। सभी को 8 अगस्त 2025 को अदालत में पेश होने का आदेश दिया गया है। यह कार्रवाई उस हिंसा के संबंध में की गई है जिसमें चार लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हो गए थे।
सर्वे से उपजा विवाद – कैसे शुरू हुआ मामला?
संभल प्रशासन ने कुछ समय पहले जामा मस्जिद का सर्वेक्षण कराने का निर्णय लिया था। हालांकि, इस फैसले की पूर्व सूचना या संवाद के अभाव में स्थानीय लोगों के बीच आशंका और असंतोष फैल गया। लोगों ने इसे धार्मिक भावना से खिलवाड़ मानते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
शांत प्रदर्शन से हिंसा तक का सफर
शुरुआत में विरोध शांतिपूर्ण रहा, लेकिन जल्द ही भीड़ उग्र हो गई। कुछ शरारती तत्वों ने पथराव और तोड़फोड़ शुरू कर दी। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। इस हिंसा में चार लोगों की मौत हुई और कई पुलिसकर्मी घायल हो गए।
जियाउर्रहमान बर्क पर क्या है आरोप?
जांच के दौरान सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क का नाम सामने आया। पुलिस का कहना है कि बर्क ने लोगों को भड़काने और माहौल को खराब करने का काम किया। हालांकि, बर्क ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने तो लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की थी और उन्हें राजनीतिक दुर्भावना के तहत निशाना बनाया जा रहा है।
कोर्ट का आदेश: पेश हों या गिरफ्तारी तय
अदालत ने सभी 23 आरोपियों को 8 अगस्त को स्वयं उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि अगर कोई पेश नहीं होता, तो उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया जाएगा।
राजनीतिक घमासान तेज
इस समन के बाद राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। समाजवादी पार्टी के नेताओं ने इसे विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास बताया है। उनका आरोप है कि राज्य की बीजेपी सरकार विरोधियों को राजनीतिक रूप से कुचलने की कोशिश कर रही है। वहीं, बीजेपी नेताओं ने स्पष्ट कहा कि हिंसा में शामिल किसी को नहीं बख्शा जाएगा, चाहे वह कोई भी हो।
जनता की मिली-जुली प्रतिक्रिया
स्थानीय नागरिकों की राय बंटी हुई है। कुछ का मानना है कि प्रशासन को सर्वे से पहले जनता को भरोसे में लेना चाहिए था। अचानक लिए गए फैसले से भ्रम फैला और विरोध भड़क गया। वहीं, कई लोग यह भी मानते हैं कि भीड़ में शामिल कुछ असामाजिक तत्वों ने जानबूझकर माहौल बिगाड़ा।
आगे क्या?
अब इस मामले में कानूनी प्रक्रिया ने जोर पकड़ लिया है। सभी आरोपी अदालत की नजर में हैं। अगर जांच में आरोप सिद्ध होते हैं, तो उन्हें जेल की सजा हो सकती है। चूंकि इस केस में एक मौजूदा सांसद शामिल हैं, इसलिए मामला और भी संवेदनशील हो गया है।
प्रशासन इस बार कड़ी कार्रवाई के मूड में है और संकेत दिए हैं कि कोई भी आरोपी राजनीतिक दबाव से नहीं बचेगा।
संभल की जामा मस्जिद को लेकर शुरू हुआ यह विवाद धार्मिक असंतुलन से लेकर राजनीतिक गर्मी तक का रास्ता तय कर चुका है। कोर्ट की कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब कोई भी इस मामले में कानून के शिकंजे से बाहर नहीं रहेगा। आने वाले दिनों में इस केस की सुनवाई प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दे सकती है।
The Sambhal Jama Masjid violence case has taken a legal turn as the court has issued summons to SP MP Ziaur Rahman Barq and 23 others. The incident occurred after protests against a proposed Jama Masjid survey in Uttar Pradesh turned violent, resulting in four deaths and several injuries. The court has directed all accused to appear on August 8. This case has sparked a political storm between SP and BJP, with the government asserting that no one involved in the violence will be spared.



















