प्रयागराज घटना पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के गंभीर आरोप, यूपी पुलिस ने किया खंडन!

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AIN NEWS 1: प्रयागराज में हुई हालिया घटना को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उत्तर प्रदेश पुलिस पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि उनके समर्थकों के साथ कथित रूप से हुई मारपीट के दौरान पुलिस प्रशासन पूरी तरह मूकदर्शक बना रहा। शंकराचार्य का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम में स्थानीय पुलिस ही नहीं, बल्कि पुलिस कमिश्नर से लेकर गृह सचिव तक ने कोई हस्तक्षेप नहीं किया।

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने यह आरोप एक सार्वजनिक बयान और वीडियो संदेश के माध्यम से लगाए, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रयागराज में उनके अनुयायी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे थे, लेकिन उनके साथ बल प्रयोग किया गया और पुलिस ने उन्हें सुरक्षा देने के बजाय आंखें मूंदे रखीं।

🟠 “प्रशासन सब कुछ देखता रहा” – शंकराचार्य

शंकराचार्य ने अपने बयान में कहा,

“जब मेरे समर्थकों पर हमला हो रहा था, तब यूपी पुलिस के बड़े अधिकारी वहां मौजूद थे। पुलिस कमिश्नर से लेकर गृह सचिव तक सब जानते थे, लेकिन किसी ने भी हस्तक्षेप करना जरूरी नहीं समझा।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि एक सोची-समझी चुप्पी थी, जिससे यह सवाल उठता है कि आखिर पुलिस किसके इशारे पर काम कर रही थी।

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🟠 समर्थकों के साथ मारपीट का आरोप

शंकराचार्य के अनुसार, उनके समर्थकों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, वह लोकतांत्रिक व्यवस्था और कानून के शासन पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि अगर साधु-संत और आम नागरिक भी सुरक्षित नहीं हैं, तो प्रदेश की कानून व्यवस्था पर गंभीर बहस होनी चाहिए।

उनका कहना है कि यह घटना केवल एक व्यक्ति या संगठन से जुड़ी नहीं है, बल्कि यह धार्मिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति के अधिकार से भी जुड़ा मामला है।

🟠 यूपी पुलिस का पलटवार

शंकराचार्य के आरोपों के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। प्रयागराज पुलिस की ओर से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज किया गया।

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि

किसी भी प्रकार की लाठीचार्ज या मारपीट नहीं हुई

कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए न्यूनतम आवश्यक कदम उठाए गए

शंकराचार्य के समर्थकों को कोई जानबूझकर नुकसान नहीं पहुंचाया गया

पुलिस का दावा है कि सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे वीडियो और बयान भ्रामक हैं और वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाते।

🟠 प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या बोली पुलिस?

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि कार्यक्रम स्थल पर भारी भीड़ मौजूद थी और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए सुरक्षाबलों की तैनाती की गई थी। उनके अनुसार, कुछ लोगों द्वारा नियमों का उल्लंघन किया गया, जिसके बाद उन्हें हटाने की कार्रवाई की गई, लेकिन बल प्रयोग का आरोप गलत है।

पुलिस ने यह भी कहा कि वह किसी भी धार्मिक नेता या संगठन के खिलाफ पक्षपात नहीं करती और कानून सभी के लिए समान है।

🟠 राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है। कई लोग शंकराचार्य के आरोपों को गंभीर मानते हुए निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग पुलिस के पक्ष में खड़े नजर आ रहे हैं।

सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा ट्रेंड कर रहा है, जहां लोग सवाल पूछ रहे हैं कि अगर आरोप गलत हैं, तो फिर वीडियो और चश्मदीदों के बयान क्या कहते हैं?

🟠 निष्पक्ष जांच की मांग

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा है कि वह इस मामले को यहीं खत्म नहीं होने देंगे। उन्होंने मांग की है कि पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि सच सामने आ सके।

उनका कहना है कि अगर आज आवाज नहीं उठाई गई, तो कल किसी और के साथ भी यही हो सकता है।

🟠 कानून व्यवस्था पर फिर सवाल

यह मामला एक बार फिर उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था, पुलिस की भूमिका और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। सच क्या है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा, लेकिन इतना तय है कि यह विवाद आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।

Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand has accused the UP Police of remaining inactive during the alleged assault on his supporters in Prayagraj. The Prayagraj incident has triggered a major debate on police inaction, law and order in Uttar Pradesh, and the safety of religious leaders. While Swami Avimukteshwaranand claims that senior officials ignored the violence, the UP Police has denied all allegations through an official press conference. The controversy has drawn nationwide attention and raised serious questions about governance and accountability.

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