spot_imgspot_img

गोरक्षा पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का सियासी संकेत, चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार उतारने का ऐलान!

spot_img

Date:

AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के मेरठ से एक बड़ा धार्मिक-राजनीतिक संदेश सामने आया है। ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गोरक्षा के मुद्दे को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए साफ संकेत दिया है कि अगर राजनीतिक दल इस विषय पर ठोस नीति नहीं लाते, तो गोरक्षक खुद चुनावी मैदान में उतरेंगे। उनके बयान ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

गोरक्षा को लेकर सख्त रुख, राजनीति से नाराज़गी

मेरठ के गंगानगर स्थित एक निजी कार्यक्रम में प्रेस से बातचीत के दौरान शंकराचार्य ने कहा कि वर्षों से “गौमाता” के नाम पर राजनीति तो खूब होती रही है, लेकिन ज़मीन पर कोई ठोस बदलाव नहीं दिखता। उनका कहना था कि हर चुनाव में यह मुद्दा उठता है, लेकिन चुनाव खत्म होते ही इसे भुला दिया जाता है।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब केवल भाषणों और वादों से काम नहीं चलेगा। यदि आने वाले चुनावों में किसी भी पार्टी ने गोरक्षा को लेकर ठोस और लागू करने योग्य संकल्प नहीं दिया, तो गोरक्षक समाज अपने प्रत्याशी उतारने को मजबूर होगा।

 “गाय को ‘मां’ का दर्जा मिले” – सरकार से मांग

शंकराचार्य ने सरकार से एक बड़ी मांग रखते हुए कहा कि गाय को पशुओं की श्रेणी से हटाकर “मां” का दर्जा दिया जाना चाहिए। उनका मानना है कि जब तक यह कानूनी और सामाजिक स्तर पर स्थापित नहीं होगा, तब तक गोरक्षा के प्रयास अधूरे ही रहेंगे।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकारें इस मुद्दे को गंभीरता से सुनने के बजाय टालती रही हैं, जिससे समाज में निराशा बढ़ रही है।

‘शंकराचार्य चतुरंगिणी सेना’ का गठन

गोरक्षा आंदोलन को संगठित रूप देने के लिए शंकराचार्य ने “शंकराचार्य चतुरंगिणी सेना” के गठन का ऐलान किया है। उन्होंने बताया कि इस संगठन में चार प्रमुख ताकतों को शामिल किया गया है:

जनबल

धनबल

मनबल

तनबल

इस पहल की खास बात यह है कि इसमें पुरुष, महिला और तृतीय लिंग—तीनों को नेतृत्व में भागीदारी देने का प्रस्ताव रखा गया है। उनका कहना है कि यह आंदोलन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक भागीदारी का बड़ा उदाहरण बनेगा।

 3 मई से गोरक्षा यात्रा की शुरुआत

शंकराचार्य ने घोषणा की कि 3 मई से गोरखपुर से एक विशाल गोरक्षा यात्रा शुरू होगी। यह यात्रा 23 जुलाई को लखनऊ के काशीराम पार्क में जाकर समाप्त होगी।

इस यात्रा में लगभग 1,18,700 लोगों की भागीदारी का लक्ष्य रखा गया है। यात्रा का उद्देश्य है:

गोरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाना

समाज को इस मुद्दे पर संगठित करना

सरकार पर ठोस नीति बनाने का दबाव बनाना

गायों की संख्या घटने पर चिंता

शंकराचार्य ने हाल की पशु गणना का हवाला देते हुए दावा किया कि उत्तर प्रदेश में गायों की संख्या में कमी आई है, जबकि पश्चिम बंगाल में इसमें वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन राज्यों में गोरक्षा पर राजनीति कम होती है, वहां स्थिति बेहतर दिखाई देती है।

उनका आरोप था कि उत्तर प्रदेश में इस मुद्दे का उपयोग केवल ध्रुवीकरण के लिए किया जाता है, न कि वास्तविक संरक्षण के लिए।

धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप पर नाराज़गी

प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कुछ हालिया घटनाओं का जिक्र करते हुए चिंता जताई। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में धार्मिक प्रतीकों और परंपराओं में हस्तक्षेप की घटनाएं सामने आ रही हैं, जो समाज में असंतोष पैदा कर रही हैं।

उनके अनुसार, तिलक, बिंदी या जनेऊ जैसी परंपराएं केवल आस्था का विषय नहीं हैं, बल्कि यह सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा हैं।

 चुनावी राजनीति पर उठाए सवाल

शंकराचार्य ने कहा कि चुनाव के समय अक्सर फिल्मों, बयानों और धार्मिक मुद्दों के जरिए माहौल बनाया जाता है। इसके बाद वोट मांगे जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही इन मुद्दों पर कोई ठोस काम नहीं होता।

उन्होंने कहा कि जनता अब इस पैटर्न को समझने लगी है और भरोसा धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है।

CM योगी आदित्यनाथ पर तीखी टिप्पणी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए शंकराचार्य ने कहा कि गोरक्षा को लेकर दिए गए बयान केवल भाषणों तक सीमित रह गए हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री की कार्यशैली अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है और इस विषय पर ठोस नीतिगत कदमों की कमी साफ दिखाई देती है।

क्या बदल सकता है सियासी समीकरण?

शंकराचार्य के इस बयान को केवल धार्मिक टिप्पणी के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे एक संभावित राजनीतिक संकेत के तौर पर भी समझा जा रहा है। यदि गोरक्षा के नाम पर निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में उतरते हैं, तो यह कई सीटों पर समीकरण बदल सकता है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम:

पारंपरिक वोट बैंक को प्रभावित कर सकता है

धार्मिक मुद्दों को चुनावी केंद्र में ला सकता है

राजनीतिक दलों पर दबाव बढ़ा सकता है

Shankaracharya Avimukteshwarananda has stirred political debate in Uttar Pradesh by raising strong concerns over cow protection and warning political parties of independent candidates if concrete policies are not introduced. His remarks targeting CM Yogi Adityanath and highlighting declining cattle numbers in UP have intensified discussions around Goraksha, religious sentiments, and electoral impact ahead of upcoming elections.

spot_img
spot_imgspot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_imgspot_img

Share post:

New Delhi
light rain
29.7 ° C
29.7 °
29.7 °
71 %
3.6kmh
96 %
Tue
34 °
Wed
38 °
Thu
37 °
Fri
35 °
Sat
31 °
Video thumbnail
सोमवार पूरा महादेव
00:18
Video thumbnail
चिल्लाता रह गया विपक्ष, मोदी सरकार ने पास किया ऐतिहासिक बिल! Lok Sabha
20:41
Video thumbnail
2.70 लाख रुपए के नोटों से बनी कांवड़ हुई वायरल
00:19
Video thumbnail
अखिलेश यादव बोले- छात्रों का मुद्दा और आस्था से खिलवाड़, दोनों पर सरकार चर्चा करे
00:59
Video thumbnail
राम मंदिर चढ़ावा मामले पर दूध लेकर संसद पहुंचे डिंपल यादव समेत सांसद
00:42
Video thumbnail
झारखंड में वाटर कैनन के सामने डटे छात्र, पीछे हटने की बजाय किया डांस
00:21
Video thumbnail
‘आंसू की हर एक बूंद से टपक रहा गोल्ड मेडल’, खिलाड़ियों के जज्बे पर PM Modi का बयान
00:14
Video thumbnail
Dimple Yadav : "FCRA बिल इसलिए लाया जा रहा है जिससे संगठनों पर दबाव...”
00:47
Video thumbnail
Dimple Yadav on Yogi Adityanath & Ram Mandir Donation Theft : "दूध का दूध और पानी का पानी...”
01:12
Video thumbnail
झारखंड में युवा विधानसभा के बाहर
00:05

Subscribe

spot_img
spot_imgspot_img

Popular

spot_img

More like this
Related