Supreme Court’s New Directive for Kanwar Yatra Route: Display License at Hotels and Dhaba
कांवड़ यात्रा मार्ग पर होटल-ढाबों को दिखाना होगा लाइसेंस, सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश
AIN NEWS 1: हर साल सावन के पवित्र महीने में लाखों शिवभक्त गंगा जल लेकर कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं। यह यात्रा उत्तर भारत के कई राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा और दिल्ली से होकर गुजरती है। इस दौरान यात्रा मार्ग में पड़ने वाले ढाबे, होटल और रेस्टोरेंट कांवड़ियों के लिए भोजन और विश्राम का एक महत्वपूर्ण जरिया बनते हैं। लेकिन हाल ही में इन दुकानों की वैधता, स्वच्छता और गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे थे। इसी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस विषय में एक अहम निर्देश जारी किया है।
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: अब दिखाना होगा लाइसेंस
सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि कांवड़ यात्रा के रूट पर स्थित सभी होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट को अब अपने लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र सार्वजनिक रूप से अपनी दुकान के बाहर डिस्प्ले करने होंगे। यानी अब हर ऐसी दुकान को यह बताना जरूरी होगा कि वह वैध रूप से पंजीकृत है और उसके पास जरूरी कागजात मौजूद हैं। कोर्ट ने यह आदेश कांवड़ यात्रा के अंतिम दिन (22 जुलाई 2025) को तत्काल प्रभाव से लागू करने के लिए कहा है।
QR कोड को लेकर क्या कहा कोर्ट ने?
कुछ याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से यह भी मांग की थी कि इन दुकानों को QR कोड भी डिस्प्ले करने के लिए बाध्य किया जाए ताकि ग्राहक एक स्कैन से दुकान की वैधता, रेटिंग या स्वच्छता की जानकारी पा सकें। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग पर अभी कोई त्वरित आदेश देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि QR कोड जैसे तकनीकी मुद्दों पर विचार की आवश्यकता है और इस पर बाद में फैसला लिया जाएगा।
क्यों उठी यह मांग?
बीते कुछ समय में सोशल मीडिया पर यह चर्चा तेज हो गई थी कि कुछ होटल और ढाबे बिना किसी पंजीकरण के कांवड़ यात्रा मार्ग पर काम कर रहे हैं। कई यात्रियों ने शिकायत की कि उन्हें अशुद्ध या मिलावटी खाना मिला, जिससे उनकी तबीयत खराब हो गई। इसके बाद कुछ सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने मांग की कि इन दुकानों की वैधता को सार्वजनिक किया जाए और QR कोड जैसी तकनीक से पारदर्शिता लाई जाए।
सुप्रीम कोर्ट का उद्देश्य क्या है?
कोर्ट का उद्देश्य साफ है—यात्रा में शामिल लाखों शिवभक्तों की सुरक्षा सुनिश्चित करना। जब दुकानदारों को अपने दस्तावेज खुले में लगाने होंगे, तो अवैध दुकानें सामने आ जाएंगी और लोगों को भरोसेमंद स्थानों पर भोजन मिलेगा। इससे न केवल दुकान चलाने वालों की जिम्मेदारी तय होगी, बल्कि ग्राहकों को भी राहत मिलेगी।
क्या बदलेगा अब?
अब कांवड़ यात्रा रूट पर कोई भी होटल या रेस्टोरेंट बिना लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के नहीं चल सकेगा। यदि कोई दुकान ऐसा करने की कोशिश करती है, तो उसके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई संभव होगी। साथ ही, इस निर्देश से यह भी उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में अन्य धार्मिक आयोजनों और भीड़ वाले आयोजनों में भी इसी तरह की पारदर्शिता लाई जाएगी।
दुकानदारों की क्या होगी जिम्मेदारी?
इस आदेश के बाद अब सभी होटल, ढाबे और खाने-पीने की दुकानों के मालिकों को अपने वैध दस्तावेजों को अपडेट कर उन्हें दुकान के बाहर एक स्पष्ट स्थान पर लगाना अनिवार्य हो गया है। इसके लिए दुकान का नाम, मालिक का नाम, लाइसेंस नंबर और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट की एक कॉपी प्रदर्शित करनी होगी। इससे न केवल ग्राहक को भरोसा मिलेगा, बल्कि प्रशासन को भी निगरानी में आसानी होगी।
कांवड़ियों को क्या मिलेगा लाभ?
कांवड़ यात्री अब यह देख सकेंगे कि जिस स्थान पर वे भोजन कर रहे हैं वह वैध है या नहीं। इससे उनकी सुरक्षा बढ़ेगी और भोजन की गुणवत्ता को लेकर उनका विश्वास मजबूत होगा। साथ ही, अगर किसी जगह पर समस्या आती है तो वे संबंधित दस्तावेजों के आधार पर शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
प्रशासन की भी बड़ी जिम्मेदारी
अब जिला प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी संबंधित दुकानें सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का पालन कर रही हैं। इसके लिए टीम बनाकर रूट की निगरानी करनी होगी और जिन दुकानों ने दस्तावेज नहीं लगाए हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई करनी होगी।
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय न केवल यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से अहम है, बल्कि यह सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। QR कोड पर भले ही अभी निर्णय नहीं हुआ हो, लेकिन लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट का प्रदर्शन एक बड़ा सुधार माना जा रहा है। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में धार्मिक आयोजनों में भाग लेने वाले लोगों को और भी सुरक्षित और व्यवस्थित माहौल मिलेगा।
The Supreme Court has issued a crucial directive during the concluding day of the Kanwar Yatra, mandating that all hotels, restaurants, and roadside eateries along the Kanwar Yatra route must publicly display their valid licenses and registration certificates. This move is aimed at improving transparency and ensuring the safety of Shiva devotees. While the court refused to pass any interim order regarding the QR code display, it emphasized that further discussion will take place. This order ensures that only authorized and hygienic food joints serve pilgrims on the Kanwar route.


















