Powered by : PIDIT KO NYAY ( RNI - UPBIL/25/A1914)

spot_imgspot_img

कर्नल सोफिया कुरैशी केस: मंत्री पर कार्रवाई में देरी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, एमपी सरकार से मांगा जवाब!

spot_img

Date:

AIN NEWS 1: कर्नल सोफिया कुरैशी से जुड़े बहुचर्चित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार के रवैये पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में पूछा है कि जब जांच पूरी हो चुकी है, तो अब तक बीजेपी मंत्री कुंवर विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी क्यों नहीं दी गई।

यह मामला ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़ा है। इस टिप्पणी को लेकर देशभर में नाराज़गी देखने को मिली थी, जिसके बाद मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई थी।

🔍 क्या है पूरा मामला?

कर्नल सोफिया कुरैशी भारतीय सेना की एक वरिष्ठ और सम्मानित अधिकारी हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनके संदर्भ में की गई कथित टिप्पणी को न केवल असंवेदनशील बताया गया, बल्कि इसे महिला अधिकारी और सेना की गरिमा से जोड़कर देखा गया।

इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर विवाद गहरा गया। दबाव बढ़ने पर राज्य सरकार ने एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया, ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा सके।

Rajkummar Rao और Patralekha ने बेटी का नाम किया रिवील, पहली तस्वीर आई सामने

🕵️ SIT की जांच और रिपोर्ट

SIT ने कई महीनों तक गवाहों से पूछताछ की, वीडियो और बयानों की जांच की और कानूनी पहलुओं का अध्ययन किया।

अगस्त 2025 में SIT ने अपनी जांच पूरी कर ली और अपनी रिपोर्ट मध्य प्रदेश सरकार को सौंप दी।

रिपोर्ट के साथ ही SIT ने स्पष्ट रूप से राज्य सरकार से यह अनुरोध किया कि मंत्री कुंवर विजय शाह के खिलाफ अभियोजन चलाने की अनुमति (Prosecution Sanction) दी जाए, ताकि अदालत में केस आगे बढ़ सके।

⚖️ सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

इस मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य सरकार की निष्क्रियता पर नाराज़गी जताई।

कोर्ट ने साफ पूछा:

“क्या हम यह सही समझ रहे हैं कि SIT ने अगस्त 2025 में ही जांच पूरी कर ली थी और सरकार से कार्रवाई की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन अब तक सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया?”

पीठ ने इसे बेहद गंभीर मामला बताते हुए कहा कि कानून के तहत सरकार की यह वैधानिक जिम्मेदारी है कि वह समय रहते फैसला करे।

देरी क्यों है, जवाब किसके पास?

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि किसी मंत्री के खिलाफ मामला होने के बावजूद कार्रवाई में देरी लोकतंत्र और कानून व्यवस्था के लिए गलत संदेश देती है।

अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि

जांच पूरी हो चुकी है

अनुमति मांगी जा चुकी है

फिर भी फाइलें आगे नहीं बढ़ रहीं

यह स्थिति “चुप्पी साधने” जैसी लगती है, जो स्वीकार्य नहीं है।

🏛️ कानून क्या कहता है?

भारतीय कानून के अनुसार, किसी जनप्रतिनिधि या मंत्री के खिलाफ केस चलाने के लिए सरकार की मंजूरी आवश्यक होती है।

लेकिन यह मंजूरी अनिश्चित काल तक रोकी नहीं जा सकती।

सुप्रीम कोर्ट पहले भी कई मामलों में यह साफ कर चुका है कि अभियोजन की अनुमति पर फैसला उचित समय सीमा में होना चाहिए, वरना यह न्याय में देरी मानी जाती है।

🔥 राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

इस मामले में विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर मंत्री को बचाने का आरोप लगाया है।

वहीं, सामाजिक संगठनों और पूर्व सैन्य अधिकारियों ने भी सवाल उठाया है कि सेना की एक महिला अधिकारी के सम्मान से जुड़े मामले में इतनी ढिलाई क्यों बरती जा रही है।

कई लोगों का कहना है कि अगर यही मामला किसी आम नागरिक से जुड़ा होता, तो कार्रवाई कब की हो चुकी होती।

👩‍✈️ कर्नल सोफिया कुरैशी क्यों हैं अहम?

कर्नल सोफिया कुरैशी सिर्फ एक अधिकारी नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण और सैन्य नेतृत्व की प्रतीक मानी जाती हैं।

उनके नाम से जुड़ा यह विवाद सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि

महिला सम्मान

सेना की गरिमा

राजनीतिक जवाबदेही

जैसे बड़े मुद्दों से जुड़ गया है।

📌 आगे क्या?

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद अब निगाहें मध्य प्रदेश सरकार पर टिकी हैं।

अदालत आने वाली सुनवाई में यह देखना चाहेगी कि सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है।

अगर जल्द फैसला नहीं लिया गया, तो कोर्ट सख्त निर्देश भी जारी कर सकता है।

कर्नल सोफिया कुरैशी केस सिर्फ एक बयान या विवाद तक सीमित नहीं है। यह मामला इस बात की परीक्षा है कि

क्या कानून सभी के लिए समान है?

क्या सत्ता में बैठे लोग जवाबदेह हैं?

और क्या सरकारें न्यायिक प्रक्रिया में देरी कर सकती हैं?

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल जो सवाल उठाए हैं, वे सिर्फ एक राज्य सरकार से नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम से जुड़े हैं।

The Colonel Sofia Qureshi case has drawn nationwide attention after the Supreme Court questioned the Madhya Pradesh government over its delay in granting prosecution sanction against BJP minister Kunwar Vijay Shah. The case relates to alleged objectionable remarks made during Operation Sindoor, with the SIT completing its investigation in August 2025. The Supreme Court emphasized the constitutional duty of the state government to take timely decisions, making the case a significant example of accountability, governance, and rule of law in India.

spot_img
spot_imgspot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_imgspot_img

Share post:

New Delhi
haze
26.1 ° C
26.1 °
26.1 °
24 %
1kmh
82 %
Mon
25 °
Tue
27 °
Wed
27 °
Thu
27 °
Fri
27 °

Subscribe

spot_img
spot_imgspot_img

Popular

spot_img

More like this
Related