AIN NEWS 1 नई दिल्ली। फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों से जुड़े एक मामले में दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को दोषी करार दिया है। यह मामला उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दयालपुर इलाके में हुई आगजनी और हिंसा से संबंधित है। अदालत ने ताहिर हुसैन को दंगा करने के अपराध से जुड़े प्रावधानों के तहत दोषी माना, जबकि उनके खिलाफ लगाए गए अन्य आरोपों से उन्हें बरी कर दिया। इस मामले में उनके साथ आरोपी बनाए गए 12 अन्य लोगों को भी अदालत ने सभी आरोपों से बरी कर दिया है।
अदालत के इस फैसले के बाद अब ताहिर हुसैन को कितनी सजा मिलेगी, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत ने सजा की अवधि को लेकर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के लिए 16 नवंबर 2026 की तारीख तय की है। फिलहाल मामले में सजा पर अंतिम फैसला आना बाकी है। <u>यह फैसला 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े एक विशिष्ट मामले में आया है, इसे दंगों से संबंधित सभी मुकदमों का फैसला नहीं समझना चाहिए।</u>
कड़कड़डूमा कोर्ट ने किन धाराओं में दोषी माना?
इस मामले की सुनवाई कड़कड़डूमा अदालत में हुई। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश परवीन सिंह ने ताहिर हुसैन को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147 के साथ धारा 109 के तहत दोषी ठहराया।
भारतीय दंड संहिता की धारा 147 दंगा करने के अपराध से संबंधित है, जबकि धारा 109 अपराध के लिए उकसाने या दुष्प्रेरण से जुड़ी है। अदालत ने ताहिर हुसैन को इन प्रावधानों के तहत दोषी माना, लेकिन उनके खिलाफ लगाए गए बाकी आरोपों में उन्हें बरी कर दिया।
मामले में कुल 13 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें ताहिर हुसैन के अलावा मोहम्मद शादाब, शाह आलम, रियासत अली, गुलफाम, राशिद, मोहम्मद रिहान, मोहम्मद आबिद, अरशद कय्यूम, इरशाद अहमद, दीपक सिंह सैनी, नवनीत और मेहक सिंह शामिल थे।
अदालत ने ताहिर हुसैन को कुछ आरोपों में दोषी ठहराया, जबकि बाकी 12 आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया। इस प्रकार, इस मामले में दोषसिद्धि केवल ताहिर हुसैन के खिलाफ हुई है।
क्या है दयालपुर आगजनी का मामला?
यह मुकदमा फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दयालपुर इलाके में हुई हिंसा के दौरान एक दुकान में कथित लूटपाट और आगजनी से जुड़ा है। इस घटना को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की और आरोपियों के खिलाफ मामला अदालत तक पहुंचा।
शिकायतकर्ता इरशाद अली ने आरोप लगाया था कि 24 फरवरी 2020 को दंगों के दौरान उनकी दुकान का शटर तोड़कर सामान लूटा गया और बाद में दुकान में आग लगा दी गई। शिकायत में चोरी हुए सामान की कीमत करीब 17 से 18 लाख रुपये बताई गई थी। इसके अलावा, दुकान और संपत्ति को नुकसान पहुंचने से लगभग 10 लाख रुपये की क्षति होने का दावा भी किया गया था।
इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने दंगा करने, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, आगजनी और आपराधिक साजिश सहित विभिन्न अपराधों से संबंधित धाराओं में कार्रवाई की थी। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने अभियोजन पक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों और संबंधित साक्ष्यों पर विचार किया गया।
हालांकि, किसी शिकायत में लगाए गए आरोप अपने आप में अपराध साबित नहीं करते। अदालत का फैसला उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होता है। इस मामले में अदालत ने ताहिर हुसैन को कुछ आरोपों में दोषी माना, जबकि अन्य आरोपों से उन्हें बरी कर दिया। साथ ही, बाकी 12 आरोपियों को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया।
16 नवंबर को तय होगी सजा
ताहिर हुसैन को दोषी ठहराए जाने के बाद अब अगला महत्वपूर्ण चरण सजा पर सुनवाई का है। अदालत 16 नवंबर 2026 को इस बात पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनेगी कि दोषसिद्धि के बाद उन्हें कितनी सजा दी जानी चाहिए।
सजा पर सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष अपने-अपने तर्क रख सकते हैं। अदालत संबंधित कानूनी प्रावधानों और मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सजा तय करेगी।
अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि ताहिर हुसैन को इस मामले में कितने वर्ष की सजा मिलेगी। जब तक अदालत सजा को लेकर अंतिम आदेश नहीं देती, तब तक किसी निश्चित सजा का उल्लेख करना उचित नहीं होगा।
इस फैसले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि ताहिर हुसैन को सभी आरोपों में दोषी नहीं ठहराया गया है। अदालत ने उन्हें कुछ आरोपों से बरी किया है। इसी तरह, अन्य 12 आरोपियों को इस मुकदमे में सभी आरोपों से बरी कर दिया गया है।
अंकित शर्मा हत्याकांड में भी हो चुकी है दोषसिद्धि
ताहिर हुसैन के खिलाफ 2020 के दिल्ली दंगों से संबंधित यह पहला मामला नहीं है, जिसमें अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया है। इससे पहले जुलाई 2026 में दिल्ली की एक अदालत ने इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या से जुड़े अलग मुकदमे में ताहिर हुसैन और चार अन्य लोगों को दोषी ठहराया था। उस मामले में ताहिर हुसैन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।
अंकित शर्मा की हत्या का मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा से जुड़ा था। इस मामले में अलग प्राथमिकी दर्ज की गई थी और अलग न्यायिक प्रक्रिया के तहत सुनवाई हुई।
दोनों मामलों के तथ्यों और आरोपों को अलग-अलग समझना जरूरी है। अंकित शर्मा हत्याकांड में हुई दोषसिद्धि और सजा का संबंध उस मुकदमे से है, जबकि दयालपुर आगजनी मामले में अदालत ने अलग आरोपों पर फैसला सुनाया है। वर्तमान मामले में सजा पर सुनवाई 16 नवंबर को होनी है।
फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों में गई थी 53 लोगों की जान
फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में हिंसा भड़क गई थी। इस दौरान लोगों की जान गई, कई लोग घायल हुए और घरों, दुकानों तथा अन्य संपत्तियों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा। विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक, इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी।
हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस ने अलग-अलग घटनाओं को लेकर अनेक प्राथमिकी दर्ज की थीं। इन मामलों में दंगा, हत्या, आगजनी, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और आपराधिक साजिश जैसे आरोपों की जांच की गई। कई मामलों में सुनवाई और कानूनी कार्यवाही अलग-अलग अदालतों में आगे बढ़ी।
दयालपुर आगजनी मामले में आया ताजा फैसला भी इन्हीं घटनाओं से संबंधित मुकदमों में से एक है। इस फैसले में अदालत ने एक आरोपी को कुछ आरोपों में दोषी ठहराया और बाकी 12 आरोपियों को बरी कर दिया।
फैसले के बाद आगे क्या होगा?
फिलहाल इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण तारीख 16 नवंबर 2026 है, जब अदालत सजा के प्रश्न पर दलीलें सुनेगी। इसके बाद अदालत के आदेश से स्पष्ट होगा कि ताहिर हुसैन को इस मामले में क्या सजा दी जाती है।
इस बीच, मामले के विस्तृत फैसले का इंतजार है। विस्तृत आदेश सामने आने के बाद अदालत द्वारा दोषसिद्धि और आरोपों से बरी किए जाने के पीछे दिए गए कारणों की अधिक स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।
कड़कड़डूमा अदालत ने 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े दयालपुर आगजनी मामले में पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को IPC की धारा 147 के साथ धारा 109 के तहत दोषी ठहराया है। हालांकि, उन्हें अन्य आरोपों से बरी किया गया है और उनके साथ आरोपी बनाए गए 12 लोगों को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया है। अब 16 नवंबर 2026 को होने वाली सुनवाई में ताहिर हुसैन की सजा पर दलीलें सुनी जाएंगी।
Former AAP councillor Tahir Hussain has been convicted by a Delhi court in a case linked to the 2020 Northeast Delhi riots in the Dayalpur area. The Karkardooma Court found him guilty under Sections 147 and 109 of the Indian Penal Code (IPC), while acquitting him of the remaining charges. The court also acquitted 12 co-accused of all charges. Arguments on Tahir Hussain’s sentence are scheduled for November 16, 2026. The case is separate from the Ankit Sharma murder case, in which Hussain was previously sentenced to life imprisonment. The latest Delhi riots court verdict is an important development in the ongoing legal proceedings related to the February 2020 violence.



















