पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा भूचाल, बागी TMC गुट ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी पर लिया बड़ा फैसला
AIN NEWS 1: पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार को बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक बागी गुट ने पार्टी नेतृत्व को लेकर बड़ा दावा करते हुए मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को चेयरपर्सन पद से हटाने की घोषणा की। इसके साथ ही पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को भी पद से निलंबित करने का दावा किया गया है।
बागी गुट की ओर से यह कदम न्यू टाउन में आयोजित एक विशेष बैठक के बाद उठाया गया। बैठक में मौजूद नेताओं ने दावा किया कि वह “असली टीएमसी” का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और पार्टी में कथित संवैधानिक संकट को दूर करने के लिए नया संगठनात्मक ढांचा तैयार किया जा रहा है।
ममता बनर्जी की जगह अरूप रॉय को बनाया चेयरपर्सन
बागी गुट ने हावड़ा सेंट्रल से विधायक और वरिष्ठ नेता अरूप रॉय को नया चेयरपर्सन नियुक्त करने का ऐलान किया। नेताओं का कहना है कि पार्टी को नए नेतृत्व और नई दिशा की जरूरत है।
अरूप रॉय टीएमसी के पुराने नेताओं में शामिल रहे हैं और लंबे समय से बंगाल की राजनीति में सक्रिय हैं। बागी खेमे ने उन्हें संगठन संभालने की जिम्मेदारी देकर ममता बनर्जी के नेतृत्व को सीधी चुनौती दी है।
अभिषेक बनर्जी पर भी कार्रवाई का दावा
बागी गुट ने टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को भी उनके पद से निलंबित करने की घोषणा की। अभिषेक बनर्जी को ममता बनर्जी के बाद पार्टी में सबसे प्रभावशाली नेताओं में माना जाता है।
बागी नेताओं का आरोप है कि पार्टी में फैसले लेने की प्रक्रिया कुछ लोगों तक सीमित हो गई थी और संगठन के अंदर लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर हुई। हालांकि, इन आरोपों पर ममता बनर्जी गुट की ओर से अलग प्रतिक्रिया सामने आ सकती है।
बागी गुट ने किया बड़ी संख्या में समर्थन का दावा
बैठक के बाद बागी नेताओं ने दावा किया कि उनके साथ बड़ी संख्या में विधायक और पार्टी कार्यकर्ता हैं। कुछ रिपोर्टों में बागी गुट द्वारा कई विधायकों के समर्थन का दावा किए जाने की बात कही गई है। हालांकि, इन दावों की वास्तविक स्थिति आगे की राजनीतिक गतिविधियों और आधिकारिक प्रक्रियाओं से स्पष्ट होगी।
टीएमसी में बढ़ी अंदरूनी कलह
तृणमूल कांग्रेस लंबे समय से पश्चिम बंगाल की सबसे प्रभावशाली राजनीतिक ताकत रही है। ममता बनर्जी पार्टी की स्थापना से ही इसके केंद्रीय चेहरे के रूप में रही हैं। ऐसे में पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर उठी यह चुनौती बंगाल की राजनीति में महत्वपूर्ण मोड़ मानी जा रही है।
बागी नेताओं ने समानांतर संगठनात्मक ढांचा तैयार करने का संकेत दिया है और चुनाव आयोग के सामने भी अपना पक्ष रखने की बात कही है।
आगे क्या होगा?
इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल यही है कि टीएमसी का आधिकारिक नेतृत्व किसके पास रहेगा। राजनीतिक दलों में ऐसे विवादों में अंतिम फैसला संगठन के नियमों, विधायकों के समर्थन और जरूरत पड़ने पर चुनाव आयोग की प्रक्रिया से तय होता है।
अगर दोनों गुट अपने-अपने दावे करते हैं तो आने वाले दिनों में पार्टी के नाम, चुनाव चिन्ह और संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर कानूनी लड़ाई भी देखने को मिल सकती है।
पश्चिम बंगाल में टीएमसी के अंदर शुरू हुआ यह विवाद अब बड़े राजनीतिक संकट में बदलता दिखाई दे रहा है। बागी गुट द्वारा ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के खिलाफ उठाया गया कदम पार्टी के इतिहास की सबसे बड़ी आंतरिक चुनौतियों में से एक माना जा रहा है। हालांकि, अंतिम तस्वीर आने वाले दिनों में साफ होगी जब दोनों पक्ष अपने दावों को मजबूती से सामने रखेंगे।
The Trinamool Congress (TMC) is facing a major internal crisis in West Bengal politics as a rebel faction has claimed to remove Mamata Banerjee from the chairperson post and suspend Abhishek Banerjee from the position of national general secretary. The rebel group has appointed Arup Roy as the new chairperson and announced a parallel leadership structure. The development has created political uncertainty around TMC leadership, West Bengal political developments, and the future of the Trinamool Congress amid growing internal disputes.


















