AIN NEWS 1: उन्नाव कस्टोडियल डेथ मामले में दोषी ठहराए जा चुके पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा कानूनी झटका लगा है। कोर्ट ने उनकी सजा निलंबन (Sentence Suspension) की याचिका को खारिज कर दिया है। इस फैसले के साथ ही यह साफ हो गया है कि अदालत इस संवेदनशील और गंभीर मामले में किसी भी तरह की नरमी बरतने के मूड में नहीं है।
🔴 क्या था मामला?
यह मामला उन्नाव जिले से जुड़ा है, जहां एक युवक की पुलिस हिरासत में संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। जांच में सामने आया कि इस घटना में राजनीतिक दबाव और साजिश की भूमिका रही। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच सीबीआई (CBI) को सौंपी गई थी। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने कुलदीप सिंह सेंगर को दोषी करार दिया था।
⚖️ दिल्ली हाईकोर्ट में क्या दलील दी गई?
कुलदीप सिंह सेंगर ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सजा निलंबन की मांग की थी। उन्होंने अपनी अर्जी में तर्क दिया कि वे लंबे समय से जेल में बंद हैं और उनकी सेहत लगातार खराब हो रही है। सेंगर की ओर से कहा गया कि उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को देखते हुए उन्हें अस्थायी राहत दी जानी चाहिए।
🚫 सीबीआई और पीड़ित पक्ष का कड़ा विरोध
सेंगर की इस याचिका का सीबीआई और पीड़ित पक्ष ने सख्त विरोध किया। सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि यह मामला न केवल गंभीर है बल्कि न्यायिक प्रक्रिया के लिए भी बेहद संवेदनशील है। एजेंसी ने तर्क दिया कि दोषी को किसी भी तरह की राहत देना न्याय के साथ समझौता होगा।
पीड़ित पक्ष की ओर से भी कहा गया कि सेंगर पहले से ही प्रभावशाली रहे हैं और यदि उन्हें सजा निलंबन दिया गया तो इससे गवाहों और पीड़ित परिवार पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
🧑⚖️ कोर्ट का रुख: “मामले की गंभीरता सर्वोपरि”
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि यह मामला बेहद गंभीर प्रकृति का है। अदालत ने माना कि स्वास्थ्य संबंधी कारण अहम हो सकते हैं, लेकिन ऐसे मामलों में सार्वजनिक हित और न्याय की भावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने यह भी कहा कि सजा निलंबन कोई अधिकार नहीं बल्कि विशेष परिस्थितियों में दी जाने वाली राहत है, और वर्तमान मामले में ऐसी परिस्थितियां मौजूद नहीं हैं।
⛓️ पहले से उम्रकैद की सजा काट रहे हैं सेंगर
गौरतलब है कि कुलदीप सिंह सेंगर पहले से ही उन्नाव बलात्कार मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। उस मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया था और महिला सुरक्षा, राजनीतिक संरक्षण तथा कानून व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े किए थे।
अब कस्टोडियल डेथ केस में भी राहत न मिलने से सेंगर की कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
📌 क्यों अहम है यह फैसला?
यह फैसला सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह न्याय प्रणाली का एक मजबूत संदेश भी है। अदालत ने यह स्पष्ट किया है कि राजनीतिक रसूख, पूर्व पद या स्वास्थ्य संबंधी दलीलें गंभीर अपराधों में न्याय के रास्ते में बाधा नहीं बन सकतीं।
कानूनी जानकारों का मानना है कि यह आदेश भविष्य में कस्टोडियल हिंसा और सत्ता के दुरुपयोग से जुड़े मामलों में एक मिसाल बनेगा।
🗣️ पीड़ित परिवार की प्रतिक्रिया
पीड़ित पक्ष ने कोर्ट के फैसले पर संतोष जताया है। परिवार का कहना है कि उन्हें लंबे समय से न्याय का इंतजार था और यह आदेश उनके विश्वास को मजबूत करता है। उनका कहना है कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए, चाहे आरोपी कितना ही प्रभावशाली क्यों न हो।
🔍 आगे क्या?
अब सेंगर के पास सीमित कानूनी विकल्प बचे हैं। वे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं, लेकिन वहां भी राहत मिलना आसान नहीं माना जा रहा। फिलहाल, उन्हें जेल में ही अपनी सजा काटनी होगी।
The Delhi High Court has rejected the sentence suspension plea of former BJP MLA Kuldeep Singh Sengar in the Unnao custodial death case, emphasizing the seriousness of the crime. Despite citing health issues, the court ruled that the gravity of the offense and the impact on justice outweigh personal considerations. Sengar is already serving a life sentence in the Unnao rape case, making this verdict a significant development in one of India’s most high-profile criminal cases.


















