हरिद्वार पुलिस ने सहारनपुर स्थित आवास से किया गिरफ्तार, पूर्व विधायक सुरेश राठौर की बेटी की शिकायत पर दर्ज हुआ था मुकदमा; नार्को टेस्ट को लेकर अदालत की कार्यवाही भी चर्चा में
AIN NEWS 1 हरिद्वार/सहारनपुर। उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी के नाम को लेकर सुर्खियों में आईं अभिनेत्री उर्मिला सनावर एक बार फिर चर्चा में हैं। हरिद्वार पुलिस ने उन्हें 25 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई रानीपुर कोतवाली में दर्ज एक मुकदमे के सिलसिले में की गई है। शिकायत पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर की बेटी की ओर से दर्ज कराई गई थी।
शिकायत में उर्मिला सनावर पर पांच करोड़ रुपये मांगने, रविदास धाम की संपत्ति अपने नाम कराने का दबाव बनाने, सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और मानहानिकारक टिप्पणियां करने तथा जान से मारने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने मामले की जांच के दौरान कथित घटना में इस्तेमाल मोबाइल फोन भी बरामद करने की बात कही है।

उर्मिला की गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है, जब अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कथित वीआईपी मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच और प्रस्तावित नार्को टेस्ट को लेकर चर्चाएं तेज हैं। हालांकि, दोनों मामलों की कानूनी प्रक्रिया अलग-अलग है और इन्हें एक ही मुकदमे का हिस्सा मानना सही नहीं होगा।
शिकायत में क्या आरोप लगाए गए?
पुलिस के अनुसार, टिहरी विस्थापित कॉलोनी निवासी शिकायतकर्ता ने 24 अक्टूबर की रात रानीपुर कोतवाली में तहरीर दी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उर्मिला सनावर ने सोशल मीडिया पर ऐसी टिप्पणियां कीं, जिनसे शिकायतकर्ता और उनके परिवार की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
इसके अलावा, शिकायतकर्ता ने व्हाट्सऐप कॉल के माध्यम से रविदास धाम की संपत्ति अपने नाम कराने और पांच करोड़ रुपये देने की मांग किए जाने का आरोप लगाया। शिकायत में यह भी कहा गया कि कथित मांग पूरी नहीं होने पर जान से मारने की धमकी दी गई।
इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने संबंधित कानूनी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर पुलिस टीम गठित की गई और प्रभारी निरीक्षक मनोहर सिंह भंडारी के नेतृत्व में टीम सहारनपुर पहुंची। वहां कार्रवाई करते हुए उर्मिला सनावर को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस की ओर से मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और न्यायालय में पेशी की जानकारी दी गई। मीडिया रिपोर्टों में उनकी न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की भी खबर सामने आई है। हालांकि, मामले में अंतिम न्यायिक आदेश और आगे की कार्यवाही की स्थिति को संबंधित अदालत के आधिकारिक रिकॉर्ड से देखना जरूरी है।
यह स्पष्ट रहना चाहिए कि शिकायत में लगाए गए आरोप अभी आरोप हैं। उनकी सत्यता का निर्धारण जांच, साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
अंकिता भंडारी हत्याकांड से कैसे जुड़ा है विवाद?
अंकिता भंडारी हत्याकांड उत्तराखंड के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल है। सितंबर 2022 में पौड़ी गढ़वाल क्षेत्र के गंगा-भोगपुर स्थित वनंतरा रिजॉर्ट में 19 वर्षीय रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों को दोषी ठहराया गया था। तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
मामले में दोषियों को सजा मिलने के बाद भी कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर सवाल समय-समय पर उठते रहे। इसी संदर्भ में अभिनेत्री उर्मिला सनावर और पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर से जुड़ी कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग तथा वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुए।
उर्मिला ने दावा किया कि इन रिकॉर्डिंग में अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं का उल्लेख है। कथित बातचीत में भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम का नाम भी चर्चा में आया। गौतम ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज किया है।
हालांकि, किसी ऑडियो या वीडियो में किसी व्यक्ति का नाम आने मात्र से उसकी आपराधिक संलिप्तता साबित नहीं होती। रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता, बातचीत का संदर्भ और उससे संबंधित साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण है। इस मामले में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच एजेंसी की आधिकारिक जानकारी और न्यायालय के निष्कर्षों का इंतजार करना जरूरी है।
उर्मिला सनावर और सुरेश राठौर के बीच विवाद
उर्मिला सनावर और पूर्व विधायक सुरेश राठौर के संबंधों को लेकर भी विवाद सामने आता रहा है। उर्मिला खुद को सुरेश राठौर की पत्नी बताती रही हैं, जबकि राठौर ने उनके दावे का खंडन किया है। इस विवाद ने बाद में राजनीतिक और कानूनी रूप ले लिया।
कथित ऑडियो और वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद अलग-अलग शिकायतें दर्ज होने की खबरें सामने आईं। इन शिकायतों में मानहानि, आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार और राजनीतिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने जैसे आरोप शामिल रहे।
जनवरी 2026 के दौरान भी उर्मिला सनावर से संबंधित मामलों में गैर-जमानती वारंट और पुलिस की तलाश को लेकर खबरें प्रकाशित हुई थीं। इसके बाद जून 2026 में कथित ऑडियो-वीडियो विवाद से जुड़े एक मामले में पूर्व विधायक सुरेश राठौर की गिरफ्तारी की खबर भी सामने आई थी।
इन घटनाओं को वर्तमान गिरफ्तारी से जोड़कर देखते समय यह अंतर समझना जरूरी है कि प्रत्येक मुकदमे के आरोप, जांच और न्यायिक स्थिति अलग हो सकती है। किसी एक मामले में हुई कार्रवाई दूसरे मामले में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है।
सीबीआई की पूछताछ और नार्को टेस्ट का मामला
अक्टूबर 2026 में अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कथित वीआईपी पहलू की जांच के तहत उर्मिला सनावर और सुरेश राठौर से पूछताछ किए जाने की खबरें सामने आईं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सीबीआई ने उर्मिला से कई घंटे तक सवाल-जवाब किए।
इसके बाद दोनों को देहरादून स्थित अदालत में पेश होने के लिए कहा गया, ताकि प्रस्तावित पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट के लिए उनकी सहमति की स्वैच्छिकता सुनिश्चित की जा सके।
23 अक्टूबर को उर्मिला सनावर और सुरेश राठौर अदालत में पेश हुए। रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों ने प्रस्तावित परीक्षणों के लिए सहमति जताई थी। उर्मिला की ओर से परीक्षण मीडिया की मौजूदगी में कराने की मांग किए जाने की बात भी सामने आई।
इस संबंध में अगली सुनवाई 26 अक्टूबर के लिए निर्धारित होने की खबर थी। हालांकि, सहमति दिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि नार्को टेस्ट हो चुका है या अदालत ने सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर दी हैं। परीक्षण से पहले संबंधित कानूनी प्रक्रिया और अदालत के आदेश की स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है।
नार्को टेस्ट क्या होता है?
नार्को टेस्ट एक विशेष जांच प्रक्रिया है, जिसमें दवा के प्रभाव में व्यक्ति से सवाल पूछे जाते हैं। इसे अपने आप में किसी आरोप का निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता। ऐसे परीक्षणों के संबंध में सहमति, संवैधानिक अधिकारों और न्यायिक दिशा-निर्देशों का पालन महत्वपूर्ण है। इसलिए प्रस्तावित परीक्षण और उससे मिलने वाली जानकारी को लेकर किसी भी दावे का मूल्यांकन कानूनी मानकों के आधार पर किया जाना चाहिए।
नार्को टेस्ट की सुनवाई से पहले गिरफ्तारी क्यों महत्वपूर्ण है?
25 अक्टूबर को उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी ने इस घटनाक्रम को नया मोड़ दिया। गिरफ्तारी उस समय हुई, जब अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी के मुद्दे पर सीबीआई की जांच और नार्को टेस्ट को लेकर सार्वजनिक चर्चा चल रही थी।
लेकिन उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि गिरफ्तारी नार्को टेस्ट रोकने के लिए की गई। पुलिस ने गिरफ्तारी को रानीपुर कोतवाली में दर्ज अलग मुकदमे से संबंधित बताया है। फिलहाल दोनों घटनाओं के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।
इस मामले में आगे की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों के समर्थन में क्या साक्ष्य उपलब्ध हैं। मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच भी घटनाक्रम को समझने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
अब आगे क्या होगा?
उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी के बाद तीन प्रमुख सवालों पर नजर रहेगी। पहला, पांच करोड़ रुपये की कथित मांग, संपत्ति से जुड़े विवाद और धमकी के मामले में पुलिस की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है। दूसरा, अदालत में उनकी हिरासत और आगे की कानूनी कार्यवाही को लेकर क्या आदेश आता है। तीसरा, अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी से जुड़े दावों और प्रस्तावित नार्को टेस्ट पर सीबीआई तथा अदालत की आगे की कार्रवाई क्या रहती है।
दोनों मामलों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के परिणाम सामने आने के बाद ही तस्वीर अधिक स्पष्ट होगी। फिलहाल, उर्मिला सनावर के खिलाफ दर्ज मुकदमे के आरोपों और अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कथित ऑडियो-वीडियो में किए गए दावों को प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है।
AIN NEWS 1 की नजर इस मामले के अगले घटनाक्रम पर बनी रहेगी। आधिकारिक पुलिस बयान और अदालत के आदेश उपलब्ध होने पर खबर को अपडेट कि जायेगी।
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