AIN NEWS 1: वृंदावन, जिसे धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से एक पवित्र स्थान माना जाता है, इन दिनों लगातार विवादों में घिरता जा रहा है। हाल ही में संत अनिरुद्धाचार्य के बयान ने देशभर में आक्रोश फैला दिया था। उनके बयान को महिलाओं के प्रति अपमानजनक और असंवेदनशील माना गया, जिस पर राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लेकर जांच की थी। इस विवाद की आग अभी शांत भी नहीं हुई थी कि एक और संत – प्रेमानंद महाराज – के बयान ने सोशल मीडिया पर तूफान खड़ा कर दिया है।
संत प्रेमानंद का बयान – क्या कहा उन्होंने?
एक निजी बातचीत के दौरान संत प्रेमानंद महाराज ने कहा:
“आज के समय में 100 में से केवल 2-4 लड़कियां ही पवित्र रह गई हैं। आजकल लड़कियां गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड के रिश्तों में उलझी हैं, जो समाज के लिए उचित नहीं है। ऐसी बेटियां जब घर की बहू बनकर आती हैं, तो उनके संस्कार कैसे होंगे, यह सब देख सकते हैं।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस मामले में पुरुष भी पीछे नहीं हैं। “आज के युवा लड़के भी एक से अधिक लड़कियों के संपर्क में रहते हैं। यह प्रवृत्ति समाज के लिए ठीक नहीं है,” उन्होंने कहा।
सोशल मीडिया पर वायरल, बढ़ा विरोध
जैसे ही यह बयान सोशल मीडिया पर पहुंचा, वीडियो वायरल हो गया। हजारों लोगों ने इस बयान की निंदा की और कहा कि यह महिलाओं के चरित्र पर अनावश्यक सवाल उठाता है। ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर #RespectWomen, #PremanandMaharaj और #VrindavanControversy जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे।
एक यूजर ने लिखा, “महिला की पवित्रता पर सवाल उठाने का अधिकार किसी को नहीं है, खासकर उन लोगों को जिन्हें समाज का मार्गदर्शक माना जाता है।”
दूसरे ने लिखा, “भारत की बेटी को प्रमाणपत्र देने की आवश्यकता नहीं है। हर महिला सम्मान की हकदार है।”
ब्रज के लोग क्या कहते हैं?
कौशल किशोर ठाकुर (पोठा पीश्वर सनातन धर्म स्थापीठ, नाजन)
“नारी शक्ति ही इस सृष्टि का मूल है। जिनसे हम जन्म लेते हैं, उन्हीं पर ऐसे बयान देना बेहद निंदनीय है। संतों को यह समझना चाहिए कि उनके बयान से समाज में क्या संदेश जाता है।”
रवि चौहान (रियल एस्टेट कारोबारी)
“भारत की हर बेटी पवित्र है। संत प्रेमानंद महाराज को ऐसा बयान नहीं देना चाहिए था। एक संत का काम समाज को जोड़ना होता है, न कि विवाद पैदा करना।”
महामंडलेश्वर नकलगिरी महाराज
“संत तो वही है जो लोगों के जीवन को बदल दे और उन्हें सही राह दिखाए। बहन-बेटियों के सम्मान पर इस तरह की बयानबाजी संत की गरिमा को ठेस पहुंचाती है। यह बयानबाजी लगता है सोशल मीडिया पर टीआरपी बढ़ाने की होड़ का हिस्सा है।”
नीलम गोस्वामी (स्थानीय महिला नेता)
“महिला सम्मान पर चोट पहुंचाने वाले बयान समाज में नफरत फैलाते हैं। संतों को यह समझना चाहिए कि उनकी बातें लोगों के विचारों पर गहरा असर डालती हैं।”
महिला संगठनों का रुख
राष्ट्रीय महिला आयोग के अलावा कई महिला संगठनों ने इस बयान की निंदा की है। “जब महिलाएं हर क्षेत्र में नेतृत्व कर रही हैं, तब उनके चरित्र को लेकर सवाल उठाना उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाता है। ऐसे बयान से समाज में नकारात्मक ऊर्जा फैलती है,” दिल्ली स्थित महिला संगठन ‘नारी शक्ति मंच’ ने अपने बयान में कहा।
सनातन धर्म की छवि पर असर
धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि संतों के ऐसे बयान धर्म की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं। पहले के संत समाज सुधार और शांति का संदेश देते थे, लेकिन हाल में कुछ संतों के बयान विवाद और असंतोष का कारण बन रहे हैं।
“सनातन धर्म का मूल विचार ‘सर्वे भवंतु सुखिनः’ है। ऐसे बयान इस विचारधारा के विपरीत हैं और समाज को बांटने का काम करते हैं,” एक स्थानीय धर्माचार्य ने कहा।
लोगों का सवाल – बार-बार महिलाएं ही निशाने पर क्यों?
सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि आखिर महिलाएं ही क्यों लगातार संतों के निशाने पर आ रही हैं।
एक यूजर ने लिखा: “जब महिलाएं हर क्षेत्र में अच्छा कर रही हैं, तब कुछ लोग उनके चरित्र पर ही क्यों सवाल उठा रहे हैं? क्या समाज को सही दिशा देने की जिम्मेदारी संतों की नहीं है?”
आश्रम की चुप्पी
इस विवाद के बाद मीडिया ने संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली। आश्रम से जुड़े लोगों ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
समाज को जोड़ना संत का कार्य है
आज समाज को जोड़ने और महिलाओं के सम्मान को बढ़ाने की आवश्यकता है। महिलाएं आज हर क्षेत्र में सम्मानजनक योगदान दे रही हैं – चाहे वह विज्ञान हो, राजनीति हो, सेना हो या कला। ऐसे समय में उनके चरित्र पर सवाल उठाना समाज के लिए किसी भी तरह से लाभकारी नहीं है। संतों को अपनी वाणी में मर्यादा रखनी चाहिए, ताकि उनके संदेश समाज को प्रेरित करें, न कि विवाद का कारण बनें।
Vrindavan is witnessing controversy after saint Premanand Maharaj’s remark questioning the purity of girls went viral on social media. The statement has triggered massive outrage, with citizens, women’s rights groups, and social media users criticizing the comment for disrespecting women and harming the image of spiritual leadership in India. The debate highlights growing concerns about gender equality and the need for religious figures to focus on positive and inclusive messages rather than divisive remarks.



















