AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश में पुलिस एनकाउंटर को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। हाल ही में जब हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली और एनकाउंटर संस्कृति को लेकर टिप्पणी की, तो इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिना किसी का नाम लिए बेहद साफ और सख्त संदेश दिया। उनका कहना था कि अगर अपराधियों को गोली चलाने की पूरी आज़ादी है, तो पुलिस को भी अपनी और जनता की रक्षा के लिए उसी स्तर पर जवाब देने का अधिकार होना चाहिए।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि “अगर पुलिस गोली न मारे तो क्या पुलिस गोली खाए?” यह बयान न सिर्फ प्रशासनिक सोच को दर्शाता है, बल्कि उस जमीनी हकीकत को भी सामने रखता है जिसमें पुलिस रोज़ाना अपराधियों से दो-दो हाथ करती है।
🔍 हाईकोर्ट की टिप्पणी और पृष्ठभूमि
हाईकोर्ट ने हाल के दिनों में कुछ मामलों की सुनवाई के दौरान यूपी में हो रहे पुलिस एनकाउंटर पर सवाल उठाए थे। अदालत की चिंता यह थी कि कानून के दायरे में रहते हुए ही अपराध पर नियंत्रण किया जाए और किसी भी तरह की मनमानी न हो। कोर्ट की इस टिप्पणी को कानून के शासन की याद दिलाने के तौर पर देखा गया।
हालांकि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि अदालतों की चिंता अपनी जगह सही हो सकती है, लेकिन जमीनी हालात को भी समझना ज़रूरी है। उन्होंने इशारों-इशारों में कहा कि जब अपराधी खुलेआम हथियार लेकर पुलिस पर हमला करता है, तो ऐसे में पुलिस के पास आत्मरक्षा के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।
🚨 “अपराधी जिस भाषा में समझे, उसी भाषा में समझाना पड़ेगा”
मुख्यमंत्री योगी ने अपने बयान में यह भी कहा कि अपराधियों से संवाद की भाषा अलग होती है। जो अपराधी कानून, संविधान और चेतावनी से नहीं समझते, उन्हें उसी तरीके से जवाब देना पड़ता है जो वे समझते हैं।
उन्होंने साफ किया कि सरकार ने पुलिस को पिस्तौल इसलिए नहीं दी है कि वह बेवजह इस्तेमाल करे, बल्कि इसलिए दी है ताकि वह अपराधी का सामना कर सके और जनता की सुरक्षा सुनिश्चित कर सके। उनका मानना है कि कमजोर पुलिस व्यवस्था अपराधियों के हौसले बढ़ाती है, जबकि सख्त और सक्षम पुलिस अपराध पर लगाम लगाती है।
🛡️ पुलिस के मनोबल का सवाल
योगी सरकार के अनुसार, यदि हर एनकाउंटर के बाद पुलिसकर्मियों को कठघरे में खड़ा कर दिया जाएगा, तो उनका मनोबल टूटेगा। मुख्यमंत्री ने संकेतों में कहा कि पुलिस अगर हर कार्रवाई से पहले यह सोचे कि बाद में उसे ही आरोपी बना दिया जाएगा, तो वह अपनी ड्यूटी ठीक से नहीं निभा पाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि यूपी में कानून-व्यवस्था सुधारने के पीछे पुलिस की बड़ी भूमिका है। बीते कुछ वर्षों में अपराध के कई बड़े नेटवर्क टूटे हैं, माफिया पर कार्रवाई हुई है और आम जनता में सुरक्षा का भरोसा बढ़ा है।
📉 योगी सरकार का दावा: अपराध में आई गिरावट
सरकार का दावा है कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में संगठित अपराध, माफिया राज और गैंगवार पर बड़ी हद तक नियंत्रण पाया गया है। बड़े-बड़े अपराधी या तो जेल में हैं, या प्रदेश छोड़ चुके हैं। पुलिस की सक्रियता और त्वरित कार्रवाई को इसकी वजह बताया जाता है।
मुख्यमंत्री का कहना है कि यह सब बिना मजबूत पुलिस व्यवस्था के संभव नहीं था। उन्होंने यह भी जोड़ा कि कानून सबके लिए बराबर है, लेकिन कानून तोड़ने वालों से सख्ती से निपटना भी राज्य की जिम्मेदारी है।
⚖️ कानून, सुरक्षा और संतुलन
योगी आदित्यनाथ ने यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि सरकार न तो कानून से ऊपर है और न ही पुलिस को खुली छूट देना चाहती है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि अदालत, सरकार और पुलिस—तीनों का उद्देश्य एक ही है: जनता की सुरक्षा।
उनका मानना है कि एनकाउंटर कोई नीति नहीं, बल्कि परिस्थितियों में लिया गया निर्णय होता है। जब अपराधी गोली चलाता है, तब पुलिस का जवाब देना मजबूरी बन जाता है।
🗣️ राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। विपक्ष इसे मानवाधिकारों से जोड़कर देख रहा है, जबकि समर्थकों का कहना है कि योगी सरकार ने पहली बार अपराधियों में डर पैदा किया है।
सामाजिक स्तर पर भी राय बंटी हुई है। एक वर्ग पुलिस की सख्ती को जरूरी मानता है, तो दूसरा वर्ग न्यायिक प्रक्रिया की अनदेखी को लेकर सवाल उठा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह बयान साफ संकेत देता है कि उनकी सरकार कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर कोई नरमी बरतने के मूड में नहीं है। हाईकोर्ट की टिप्पणी के जवाब में उन्होंने जो कहा, वह प्रशासन, पुलिस और अपराध के बीच संतुलन को लेकर उनकी सोच को दर्शाता है।
अब देखना यह होगा कि आने वाले समय में अदालत, सरकार और पुलिस के बीच यह संतुलन कैसे बनाए रखा जाता है, ताकि कानून का राज भी कायम रहे और जनता खुद को सुरक्षित भी महसूस करे।
Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath has responded strongly to recent High Court remarks on police encounters, stating that police cannot be expected to face bullets without defending themselves. Emphasizing law and order, Yogi said that if criminals are free to use weapons, police must also be empowered to confront them. The statement has reignited the debate around police encounters, crime control, and the balance between human rights and public safety in Uttar Pradesh.


















