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अमेरिका में ट्रम्प के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन, “नो किंग” अभियान में लाखों लोग सड़कों पर!

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AIN NEWS 1: अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला है। इस प्रदर्शन का नाम रखा गया — “नो किंग प्रोटेस्ट”, यानी “कोई राजा नहीं” आंदोलन। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ट्रम्प का शासन तानाशाही की दिशा में बढ़ रहा है और वे अमेरिकी लोकतंत्र की बुनियाद को कमजोर कर रहे हैं।

देशभर में करीब 2600 रैलियां आयोजित की गईं, जिनमें करीब 70 लाख लोगों ने हिस्सा लिया। बोस्टन, शिकागो, न्यूयॉर्क, वॉशिंगटन डीसी और लॉस एंजिलिस जैसे बड़े शहरों की सड़कों पर लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। प्रदर्शनकारियों के हाथों में बैनर और प्लेकार्ड थे जिन पर लिखा था — “No King in America”, “Democracy Not Dictatorship”, और “We the People Stand for Freedom”।

ट्रम्प की नीतियों पर नाराज़गी

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ट्रम्प के हालिया फैसले देश को लोकतंत्र से दूर और केंद्रीकृत सत्ता की ओर ले जा रहे हैं। उनका आरोप है कि ट्रम्प प्रशासन मीडिया की स्वतंत्रता, न्यायपालिका की स्वायत्तता और नागरिक अधिकारों पर लगातार प्रहार कर रहा है।

कई लोगों ने कहा कि ट्रम्प खुद को ‘राजा’ की तरह पेश कर रहे हैं, जबकि अमेरिका में सत्ता जनता की होती है, न कि किसी एक व्यक्ति की।

“वे मुझे राजा कह रहे हैं, लेकिन मैं कोई राजा नहीं”: ट्रम्प

इन विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया देते हुए डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा, “वे मुझे राजा कह रहे हैं, लेकिन मैं कोई राजा नहीं हूं। मैं सिर्फ अमेरिका को फिर से महान बनाना चाहता हूं।”

हालांकि, उनके इस बयान के बाद आलोचकों का कहना है कि ट्रम्प अपनी नीतियों और व्यवहार से बिल्कुल विपरीत संदेश दे रहे हैं।

प्रदर्शन के दौरान हादसा

लॉस एंजिलिस में एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना के दौरान एक युवक प्रदर्शन के बीच वाहन की चपेट में आ गया। स्थानीय पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला। युवक को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

पुलिस ने बताया कि घटना के पीछे कोई राजनीतिक मकसद नहीं था, बल्कि यह ट्रैफिक मिसमैनेजमेंट का मामला है।

शटडाउन से बढ़ी जनता की नाराजगी

अमेरिका इस समय शटडाउन की स्थिति से गुजर रहा है — यानी सरकार के कई विभाग बंद हैं और सरकारी सेवाएं ठप हैं। इस कारण लाखों सरकारी कर्मचारी बिना वेतन के घर बैठने को मजबूर हैं।

प्रदर्शनकारियों ने इस स्थिति के लिए सीधे ट्रम्प प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना है कि अगर सरकार खुद अपने कर्मचारियों की सुरक्षा और आजीविका सुनिश्चित नहीं कर पा रही है, तो वह जनता का भला कैसे कर सकती है।

युवा और महिलाएं बने आंदोलन की ताकत

इस आंदोलन में बड़ी संख्या में युवाओं, महिलाओं और सामाजिक संगठनों ने भाग लिया।

कई विश्वविद्यालयों के छात्र “Democracy Walk” के बैनर तले सड़कों पर उतरे। महिलाओं ने “Equal Rights and Voice for All” के नारे के साथ ट्रम्प प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाए।

सोशल मीडिया पर भी इस विरोध का असर दिखा — #NoKingInAmerica, #ProtestForFreedom और #StandForDemocracy जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे।

विशेषज्ञों की राय

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रदर्शन केवल एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि अमेरिकी लोकतंत्र की आत्मा की रक्षा के लिए है।

राजनीति विशेषज्ञ डॉ. विलियम हेंडरसन ने कहा, “यह प्रदर्शन बताता है कि अमेरिका की जनता अभी भी अपने संविधान और स्वतंत्रता के मूल्यों पर गर्व करती है। जब भी किसी नेता ने उन सीमाओं को पार करने की कोशिश की है, जनता ने आवाज उठाई है।”

आगे क्या?

हालांकि ट्रम्प समर्थकों का कहना है कि यह प्रदर्शन राजनीतिक एजेंडा से प्रेरित है और विपक्ष इसे भुनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन विरोध की व्यापकता यह दिखाती है कि देश में असंतोष गहराता जा रहा है।

अगले कुछ हफ्तों में कांग्रेस और प्रशासन के बीच चल रही खींचतान का असर नीतिगत फैसलों पर पड़ सकता है।

कई लोगों का मानना है कि अगर ट्रम्प ने अपने नेतृत्व शैली में बदलाव नहीं किया, तो आगामी चुनावों में यह असंतोष निर्णायक साबित हो सकता है।

The No King Protest in America has become one of the largest demonstrations against President Donald Trump, with over 7 million people participating in more than 2600 rallies across major cities like Boston, Chicago, Los Angeles, and Washington D.C. Protesters accused Trump of moving towards dictatorship, undermining democracy, freedom, and constitutional values. Amidst the ongoing US government shutdown, this nationwide protest highlights growing public anger and the demand to protect democratic principles in America.

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