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गुरुग्राम के थार मालिक ने हरियाणा DGP को भेजा लीगल नोटिस, बोले– ‘मेरी छवि खराब हुई, 15 दिन में माफी मांगें’!

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AIN NEWS 1: गुरुग्राम के एक थार मालिक और हरियाणा पुलिस के डीजीपी के बीच शुरू हुआ विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है। थार मालिक ने हरियाणा DGP शत्रुजीत कपूर को लीगल नोटिस भेजते हुए आरोप लगाया है कि उनके एक सार्वजनिक बयान के बाद समाज में उसकी किरकिरी होने लगी है। थार मालिक का कहना है कि डीजीपी के बयान ने लोगों के बीच उसकी छवि खराब की है और अब लोग उसका मजाक उड़ाने लगे हैं।

यह पूरा मामला सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और डीजीपी के बयान के बाद चर्चा में आया। थार मालिक ने अपने नोटिस में कहा है कि 15 दिनों के अंदर DGP उनसे माफी मांगें, नहीं तो वह कानूनी कार्रवाई करने को मजबूर होंगे।

घटना कैसे शुरू हुई?

कुछ समय पहले गुरुग्राम में एक सड़क घटनाक्रम के दौरान थार मालिक की गाड़ी को लेकर सोशल मीडिया पर काफी बातें वायरल हुई थीं। इसी मामले पर हरियाणा के डीजीपी ने एक कार्यक्रम के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा था कि “थार खरीदने के बाद कुछ लोग खुद को सड़कों पर रॉबिनहुड समझने लगते हैं।”

यह टिप्पणी इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो गई और लोगों ने इस बयान को थार मालिक के वीडियो के साथ जोड़ कर मीम बनाने शुरू कर दिए। थार मालिक का दावा है कि इस टिप्पणी के कारण लोग उसे पहचानकर मजाक उड़ाने लगे।

थार मालिक ने नोटिस में क्या लिखा?

नोटिस में थार मालिक ने लिखा है कि:

DGP की बात को लोग उसी पर लागू कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर उसकी छवि को लेकर मीम बन रहे हैं।

रिश्तेदार, दोस्त और समाज के लोग उसका मजाक बना रहे हैं।

इस वजह से उसका मानसिक तनाव बढ़ गया है।

नोटिस में यह भी कहा गया है कि उनका किसी भी विवाद से कोई लेना-देना नहीं था, लेकिन डीजीपी ने बिना सोचे समझे टिप्पणी कर दी, जिससे उसकी पर्सनल लाइफ और इमेज पर खराब असर पड़ा।

15 दिन में माफी नहीं तो कोर्ट में केस

थार मालिक के वकील ने नोटिस में साफ लिखा है कि अगर डीजीपी 15 दिनों के भीतर सार्वजनिक तौर पर माफी नहीं मांगते, तो उनके खिलाफ मानहानि का दावा दायर किया जाएगा।

मानहानि का केस नागरिक और आपराधिक दोनों रूपों में दायर किया जा सकता है, जिसमें आर्थिक हानि, मानसिक तनाव और सामाजिक बदनामी को आधार बनाया जाता है।

सोशल मीडिया पर बढ़ी चर्चा

घटना सामने आने के बाद यह खबर सोशल मीडिया पर तेजी से फैली। कई लोग थार मालिक का समर्थन कर रहे हैं और कह रहे हैं कि किसी पद पर बैठे अधिकारी को बयान देते समय जिम्मेदारी समझनी चाहिए। वहीं, कुछ लोग इसे ज्यादा प्रतिक्रिया बताकर इसे विवाद बढ़ाने वाला कदम मान रहे हैं।

लोगों का कहना है कि सोशल मीडिया के दौर में किसी भी बयान का गलत मतलब निकाला जा सकता है, इसलिए नेताओं और अधिकारियों को शब्दों का चयन संभलकर करना चाहिए।

क्या कहती है कानून की प्रक्रिया?

अगर कोई व्यक्ति महसूस करता है कि किसी बयान से उसकी व्यक्तिगत छवि को नुकसान हुआ है, तो वह नोटिस भेजकर माफी मांगने या नुकसान की भरपाई की मांग कर सकता है।

अगर आरोपी पक्ष जवाब नहीं देता या माफी नहीं मांगता, तो पीड़ित सीधे कोर्ट में जाकर मानहानि का दावा दायर कर सकता है।

इस मामले में भी थार मालिक का कहना है कि वह अपनी प्रतिष्ठा बचाना चाहता है और सोशल मीडिया पर हो रही बदनामी के कारण मानसिक परेशानी का सामना कर रहा है।

डीजीपी की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं

खबर लिखे जाने तक हरियाणा DGP की ओर से इस नोटिस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, विभागीय सूत्रों के अनुसार, मामले की जानकारी डीजीपी ऑफिस तक पहुंच चुकी है और जल्द ही इस पर कोई बयान सामने आ सकता है।

यह देखना दिलचस्प होगा कि DGP इस नोटिस का क्या जवाब देते हैं—क्या वे माफी मांगते हैं या फिर मामले को कोर्ट में चुनौती दी जाती है।

थार मालिक का कहना – ‘मेरी इमेज लगातार खराब हो रही है’

नोटिस के मुताबिक, थार मालिक ने यह भी कहा कि लोग उसके वीडियो पर डीजीपी का बयान जोड़कर तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं।

कुछ लोग उसके घर तक पहुंच रहे हैं और उसका मजाक उड़ा रहे हैं, जिससे उसे सामाजिक रूप से शर्मिंदगी उठानी पड़ रही है।

उसने कहा कि किसी आम इंसान की इमेज को इस तरह खराब करना गलत है, खासकर तब जब उसका किसी विवाद से कोई संबंध नहीं था।

मामला अब बना पब्लिक इंटरेस्ट का मुद्दा

इस पूरे मामले ने एक बड़ी बहस को जन्म दे दिया है—क्या किसी बड़े अधिकारी को सार्वजनिक टिप्पणी करते समय सामान्य नागरिकों का ध्यान नहीं रखना चाहिए?

क्या वायरल ट्रेंड्स और मीम कल्चर आम लोगों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकते हैं?

और क्या सोशल मीडिया पर फैल रही बातों के चलते कोई आम नागरिक अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए कोर्ट का रुख करने को मजबूर हो सकता है?

इन सवालों पर भी अब चर्चा हो रही है।

The Gurugram Thar owner has issued a legal notice to the Haryana DGP, alleging that the DGP’s public statement damaged his social image and triggered widespread mockery. The notice demands a public apology within 15 days, failing which the Thar owner plans to pursue a defamation case. This incident has sparked discussions about public remarks by officials, personal reputation, and social media impact across Haryana.

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